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    यूपी में हुए स्मार्ट मीटरिंग टेंडर की सरकार से CBI जांच कराने की मांग, उपभोक्ता परिषद ने उठाए गंभीर सवाल

    Updated: Mon, 10 Aug 2026 10:54 PM (IST)

    केंद्रीय मंत्री श्रीपाद नाईक द्वारा स्मार्ट मीटरिंग के लिए स्वीकृत राशि और यूपी के टेंडर में ₹8,500 करोड़ के अंतर पर उपभोक्ता परिषद ने CBI जांच की मां ...और पढ़ें

    राज्य में हुए स्मार्ट मीटरिंग टेंडर की सीबीआई जांच कराए सरकार।

    राज्य में हुए स्मार्ट मीटरिंग टेंडर की सीबीआई जांच कराए सरकार।

    HighLights

    1. स्मार्ट मीटरिंग टेंडर में ₹8,500 करोड़ का अंतर।

    2. उपभोक्ता परिषद ने CBI जांच की मांग की।

    3. पावर कारपोरेशन से अतिरिक्त वित्तीय भार पर सवाल।

    राज्य ब्यूरो, लखनऊ। केंद्रीय विद्युत राज्य मंत्री श्रीपाद नाईक द्वारा उत्तर प्रदेश में विद्युत आपूर्ति की गुणवत्ता में सुधार के लिए संशोधित वितरण क्षेत्र स्कीम (आरडीएसएस) के तहत विद्युत हानियां कम करने के लिए 21,782 करोड़ रुपये और स्मार्ट मीटरिंग के लिए 18,959 करोड़ रुपये स्वीकृत किए जाने की जानकारी दिए जाने के बाद राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने पावर कारपोरेशन प्रबंधन को कटघरे में खड़ा किया है।

    पूछा है कि जब केंद्र सरकार ने स्मार्ट मीटरिंग के लिए 18,959 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं तो 27,342 करोड़ रुपये का टेंडर कैसे किया गया। अतिरिक्त 8500 करोड़ रुपये की भरपाई कौन करेगा। सरकार से इस मामले की सीबीआइ जांच कराने की मांग की है।

    नाईक ने भाजपा नेता व राज्यसभा सदस्य डा. लक्ष्मी कान्त वाजपेयी द्वारा पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में सोमवार को उपरोक्त जानकारी राज्यसभा में दी है।केंद्रीय राज्य मंत्री का जवाब आने के बाद उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने प्रदेश में स्मार्ट मीटरिंग के टेंडर की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

    पूछा है कि केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत धनराशि से अधिक का टेंडर कैसे अवार्ड किया गया। प्रदेश में विद्युत हानि कम करने से संबंधित टेंडर लगभग 16,112 तथा आर्म्ड सर्विस केबल का टेंडर 2276 करोड़ रुपये का अवार्ड हुआ।

    सूचना प्रौद्योगिकी और परिचालन प्रौद्योगिकी (आईटीओटी) के लिए 203 करोड़ रुपये का टेंडर किया गया। वहीं प्रदेश में स्मार्ट मीटरिंग का टेंडर 27,342 करोड़ रुपये के उच्च दर पर दिया गया।

    केंद्र सरकार द्वारा स्मार्ट मीटरिंग के लिए स्वीकृत धनराशि और प्रदेश में अवार्ड किए गए टेंडर धनराशि में 8500 करोड़ का अंतर है। इतने अधिक दर पर टेंडर क्यों दिया गया इसकी सीबीआई जांच होनी चाहिए। इस अतिरिक्त धनराशि का भार कौन उठाएगा।

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    पूछा है कि क्या पावर कारपोरेशन यह स्पष्ट करेगा कि यह अतिरिक्त धनराशि कहां से आएगी। यह सीधे तौर पर उपभोक्ताओं से जुड़ा हुआ प्रकरण है, इसलिए अतिरिक्त वित्तीय भार की जिम्मेदारी किस पर डाली जाएगी यह स्पष्ट किया जाना चाहिए।

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