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    कासगंज के युवक का आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ा तार, इंस्टाग्राम चैट के आधार पर ATS की कार्रवाई

    Updated: Sun, 31 May 2026 10:29 PM (IST)

    कासगंज के एक युवक को आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े व्यक्ति के संपर्क में होने के संदेह में यूपी एटीएस ने हिरासत में लिया है। इंस्टाग्राम चैट और म ...और पढ़ें

    युवक का आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ा तार।

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    जागरण संवाददाता, कासगंज। सुन्नगढ़ी थाना क्षेत्र के गांव किलोनी किसौल निवासी एक युवक के पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े व्यक्ति के संपर्क में होने के संकेत मिले हैं।

    सोशल मीडिया प्लेटफार्म इंस्टाग्राम पर हुई कथित चैट और मोबाइल फोन से प्राप्त डाटा के आधार पर उत्तर प्रदेश एटीएस ने युवक को हिरासत में लेकर जांच शुरू की थी। शनिवार को उसे एनआईए कोर्ट, लखनऊ में पेश किए जाने के बाद मामला सुर्खियों में आ गया। कोर्ट ने उसे रिमांड पर भेज दिया।

    जानकारी के अनुसार गांव किलोनी किसौल निवासी 22 वर्षीय शहबाज सिद्दीकी को एटीएस ने 18 मई को उसके घर सुनगढ़ी क्षेत्र से हिरासत में लिया था। कार्रवाई बेहद गोपनीय ढंग से की गई थी, जिसके चलते स्थानीय पुलिस को भी तत्काल इसकी जानकारी नहीं मिल सकी।

    जांच एजेंसी के अनुसार युवक के सोशल मीडिया खातों पर पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े मोहम्मद उमर नामक व्यक्ति के साथ संपर्क के साक्ष्य मिले हैं।

    सूत्रों के मुताबिक इंस्टाग्राम पर दोनों के बीच लंबे समय से बातचीत हो रही थी। जांच के दौरान कुछ ऐसे संदेश भी सामने आए हैं, जिन्हें एजेंसियां संदिग्ध मानकर उनकी पड़ताल कर रही हैं। एटीएस को यह भी जानकारी मिली कि सोशल मीडिया के माध्यम से दोनों पक्षों के बीच नियमित संपर्क बना हुआ था।

    इसी आधार पर एजेंसी ने युवक को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। एटीएस की कार्रवाई के दौरान युवक के कब्जे से दो मोबाइल फोन भी बरामद किए गए। जांच एजेंसी ने दोनों मोबाइलों को अपने कब्जे में लेकर उनके डाटा का परीक्षण कराया।

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    प्रारंभिक जांच में सोशल मीडिया चैट, कॉल डिटेल और अन्य डिजिटल साक्ष्य मिलने की बात सामने आई है। इन्हीं तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

    शनिवार को एटीएस ने आरोपित युवक को एनआईए कोर्ट, लखनऊ में पेश किया, जहां से 30 मई सुबह 10 बजे से तीन जून शाम छह बजे तक के लिए रिमांड दे दी।

    कोर्ट में पेशी के बाद यह मामला इंटरनेट मीडिया पर तेजी से चर्चा का विषय बन गया। हालांकि जांच एजेंसियों ने अभी मामले से संबंधित कई जानकारियां सार्वजनिक नहीं की हैं और जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है।

    विधि विज्ञान प्रयोगशाला से मिली महत्वपूर्ण जानकारी

    एटीएस ने बरामद किए गए दोनों मोबाइल फोन को विधि विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) भेजा था। वहां मोबाइल डाटा की तकनीकी जांच की गई। सूत्रों के अनुसार एफएसएल से प्राप्त रिपोर्ट और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर एजेंसी मामले की विभिन्न पहलुओं से जांच कर रही है।

    सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और व्हाट्सएप समूहों से जुड़े अन्य संभावित संपर्कों की भी गोपनीय रूप से पड़ताल की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि युवक के संपर्क किन-किन लोगों से थे और इन संपर्कों की प्रकृति क्या थी। फिलहाल मामले की जांच जारी है और एटीएस सहित अन्य केंद्रीय एजेंसियां उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई में जुटी हैं।

    शहबाज मामले में पूरा आपरेशन एटीएस द्वारा गोपनीय ढंग से किया गया है। उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। जो भी कार्रवाई की जा रही है एटीएस के माध्यम से की जा रही है। -ओपी सिंह, एसपी।

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