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    UP Flood Alert: फर्रुखाबाद में गंगा में कटान से 8 मकान गिरे, 3 पर खतरा, फतेहपुर में रपटा बहा

    Updated: Sun, 09 Aug 2026 08:52 PM (IST)

    फर्रुखाबाद में गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु से ऊपर होने के कारण कटान तेज हो गया है, जिससे 8 मकान ढह गए और 3 खतरे में हैं। फतेहपुर में एक साल पुराना रप ...और पढ़ें

    गांव दिलीप की मड़ैया में बाढ़ के पानी से कट रहे मकान के सामने खड़े राजू। जागरण

    गांव दिलीप की मड़ैया में बाढ़ के पानी से कट रहे मकान के सामने खड़े राजू। जागरण

    HighLights

    1. फर्रुखाबाद में गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु से 25 सेमी ऊपर

    2. दिलीप की मड़ैया में 8 मकान गिरे, 3 अन्य गिरने के कगार पर

    3. फतेहपुर में एक साल पुराना रपटा बह गया, ग्रामीणों की समस्या बढ़ी

    जागरण टीम, कानपुर। फर्रुखाबाद में गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु से 25 सेंटीमीटर ऊपर पहुंचने से कटान तेज हो गया है। दिलीप की मड़ैया में कटान की जद में आने से 8 मकान गिर गए, जबकि 3 गिरने के कगार पर हैं। ग्रामीण खुद मकान तोड़कर मलबा सुरक्षित स्थान पर ले जा रहे हैं। 36 गांव बाढ़ से प्रभावित है। उन्नाव में गंगा का जलस्तर दो सेंटीमीटर घटकर 111.930 मीटर पहुंच गया, जो चेतावनी बिंदु से सात सेंटीमीटर नीचे है। औरैया में पांडु नदी में पानी बढ़ने से बेला क्षेत्र के गांवों व खेतों में पानी पहुंच गया। चित्रकूट में मंदाकिनी और बरदहा नदी का जलस्तर स्थिर है। वहीं फतेहपुर में रपटा बह गया है।

    दिलीप की मड़ैया में गंगा के बढ़े जलस्तर से तोड़ रहे मकान

    फर्रुखाबाद की सदर तहसील क्षेत्र के गांव दिलीप की मढ़ैया में गंगा के बढ़े जलस्तर से कटाने तेजी से हो रहा है। रविवार सुबह बाढ़ में आठ ग्रामीणों के मकान गिर गए और तीन ग्रामीणों के मकान गिरने की कगार पर हैं। तेजी से होते कटान को देख ग्रामीण खुद ही मकान तोड़ने में लगे हैं। जिन ग्रामीणों ने मकान तोड़ लिया है वह नाव से ईंटें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाते नजर आए। एसडीएम सदर ने दिलीप की मड़ैया पहुंचकर बाढ़ पीड़ितों का दर्द जाना। गांव में तीन नाव और लगाई गई हैं, जिससे ग्रामीण अपना घरेलू सामान लेकर सुरक्षित स्थानों पर जाने लगे हैं।

    UP Flood Alert

    गांव चित्रकूट शरणालय से लंच पैकेट लेकर बाढ़ के पानी में निकलकर घर जाते बच्चे। जागरण

    चार से पांच दिन में 17 मकान बाढ़ से गिरे

    पिछले करीब चार-पांच दिन से गांव दिलीप की मड़ैया में 17 मकान बाढ़ की चपेट में आने से गिर चुके हैं। रविवार को गांव दिलीप की मड़ैया में प्रेमचंद्र, श्यामानंद, रंजेश कुमार, आशाराम, उर्मिला देवी पत्नी अंगनेलाल, पूरनलाल, राजू व रजनेश के मकान बाढ़ में कट गए। गांव के ही अमर सिंह, बेलवती व सत्यवीर के मकान के पास कटान तेजी से हो रहा था। इन ग्रामीणों ने बताया कि कटान तेजी से हो रहा है। इससे उनके मकान भी गिर जाएंगे। कटान तेज होने से पूरनलाल व रामू हथौड़े से मकान तोड़ने में लगे थे। बाढ़ के पानी में जानवर बंधे थे।

    राशन किट भी खत्म

    ग्रामीणों का कहना था कि भूसा आदि भीग गया है। जो कुछ बचा है, वह ही जानवरों को खिला रहे हैं। चार दिन पहले राशन किट बंटी थी, जो खत्म होने को है। दिलीप की मड़ैया से नाव से ईंटें ढोकर ग्रामीण प्रहलाद की मड़ैया सड़क किनारे पहुंचा रहे थे। नाव से ईंटें लेकर आए धनीराम बोले कि जैसे-तैसे मकान तोड़कर ईंटें बचा सके।

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    नाव से सुरक्षित जगह पहुंचाया जा रहा बाढ़ पीड़ितों को

    एसडीएम सदर संजय कुमार सिंह ने बताया कि बाढ़ पीड़ितों को सुरक्षित जगह पहुंचाने के लिए चार नाव और लगाई हैं। उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया भी जा रहा है। राशन किट वितरण के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि दिलीप की मड़ैया में अब तक 25 मकान कट चुके हैं।


    पांच सेंटीमीटर बढ़ा गंगा का जलस्तर

    गंगा का जलस्तर रविवार को पांच सेंटीमीटर बढ़कर समुद्र तल से 136.85 मीटर ऊंचाई पर पहुंच गया है। गंगा का चेतावनी बिंदु 136.60 मीटर पर दर्ज है। गंगा का जलस्तर चेतावनी रेखा से 25 सेंटीमीटर ऊपर बह रहा है। केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक नरौरा बांध से गंगा में 1,82,978 क्यूसेक, बिजनौर बैराज से 1,17,686 क्यूसेक व हरिद्वार बैराज से 87,421 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। जिससे गंगा के जलस्तर में और वृद्धि होगी। रामगंगा का जलस्तर घटकर गेज के नीचे पहुंच गया है। खोह, हरेली व रामनगर से रामगंगा में 4925 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।


    क्या कहते हैं बाढ़ पीड़ित

    गांव बाढ़ के पानी से चारों तरफ से घिरा हुआ है। पिछले साल आई बाढ़ में सड़क दो जगह कट गई थी। सड़क का निर्माण न होने से नाव के सहारे आवाजाही करनी पड़ रही है।
    - सोनू, गांव तीसराम की मड़ैया।


    गांव बाढ़ के पानी से घिरा है और बिजली की आपूर्ति बंद कर दी गई है। जिससे रात अंधेरे में गुजारनी पड़ती है। जहरीले कीड़े निकलने का खतरा बना रहता है। सोलर लाइट लगनी चाहिए जिससे रात में रोशनी हो सके।
    - कलक्टर, गांव तीसराम की मड़ैया।


    घर में राशन खत्म हो गया है, राशन लेने के लिए पांचाल घाट जा रहे हैं। बाढ़ में कटी सड़क बन जाती तो आवागमन में परेशानी नहीं होती। 50 मीटर सड़क कटी होने से दो स्थानों पर नाव से व तीन किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है।
    - मिहीलाल, गांव तीसराम की मड़ैया।


    कई घरों में बाढ़ का पानी भरा था। जलस्तर घटने से पानी गांव से निकल गया। चारों तरफ से बाढ़ के पानी से गांव घिरा हुआ है।जलस्तर बढ़ने पर दोबारा घरों में पानी भर जाएगा। मवेशियों के चारे की समस्या विकराल हो गई है।
    - अनूप कुमार, गांव तीसराम की मड़ैया।

    क्या कहते हैं एसडीएम

    बाढ़ का पानी निकलने के बाद लोक निर्माण विभाग को पत्र लिखकर तीसराम की मड़ैया की कटी सड़क का निर्माण कराया जाएगा।
    - श्वेता साहू, एसडीएम।


    फतेहपुर में पहली ही बारिश में ध्वस्त हुआ एक साल पुराना रपटा, बढ़ी ग्रामीणों की समस्या


    विकासखंड क्षेत्र के मदारपुर गांव में महज एक वर्ष पूर्व बना रपटा वर्षा के पानी में बहकर पूरी तरह ध्वस्त हो गया। निर्माण कार्य में बड़े पैमाने पर धांधली और घटिया सामग्री के इस्तेमाल का आरोप लगाते हुए आक्रोशित ग्रामीणों ने मामले की जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई और नए सिरे से सुरक्षित रपटा निर्माण की मांग की है। मानकों को दरकिनार कर किए गए निर्माण के कारण यह रपटा एक साल भी पूरा नहीं निकाल सका।

    पांच भैसों की मौत हो चुकी है

    ग्रामीण आयद अहमद ने आरोप लगाया कि रपटा बनने के बाद से अब तक दुर्घटनाओं और जलभराव के कारण पांच भैंसों की मौत हो चुकी है तथा कई लोग घायल हो चुके हैं। रपटा टूटने के कारण पास में स्थित प्राचीन मजार धन शहीद बाबा पर भी नदी के कटान का गंभीर खतरा मंडराने लगा है। स्थानीय निवासी रामहेत, शिवप्रसाद और रामपाल ने बताया कि रपटे के मलबे में विलायती बबूल और झाड़ियां फंस जाने से आवागमन अत्यंत जोखिम भरा हो गया है। ग्रामीणों ने बताया है कि यदि समय रहते प्रशासन ने झाड़ियों को हटवाकर मरम्मत कार्य शुरू नहीं कराया तो कभी भी बड़ी अनहोनी हो सकती है। इस संबंध में संबंधित जेई सदानंद से वार्ता करने का प्रयास किया गया। लेकिन उन्होंने फोन नहीं रिसीव किया।

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