Lucknow-Kanpur Expressway धंसने के बाद ट्रांसगंगा पुल पर सवाल, विवादित PNC-SP Singla कंपनी को मिला 500 करोड़ का ठेका
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे और घाटमपुर ओवरब्रिज की घटनाओं के बाद, कानपुर-उन्नाव ट्रांसगंगा सिटी पुल के 500.50 करोड़ रुपये के निर्माण का ठेका विवादित कंपनि ...और पढ़ें

एक्सप्रेसवे पर चलता पंखा, ट्रांस गंगा सिटी के पुल के लिए रानीघाट से प्रस्तावित जमीन। जागरण
HighLights
विवादित कंपनियों को ट्रांसगंगा पुल निर्माण का ठेका
एसपी सिंगला कंपनी भागलपुर पुल गिरने में शामिल
पीएनसी इंफ्राटेक के घाटमपुर ओवरब्रिज में दरार आई
रितेश द्विवेदी, कानपुर। लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे धंसने और घाटमपुर ओवरब्रिज में दरार की घटनाओं के बाद अब कानपुर को उन्नाव की ट्रांसगंगा सिटी से जोड़ने वाले 500.50 करोड़ रुपये के पुल का निर्माण भी विवादों में रही दो कंपनियां करेंगी। आगरा की पीएनसी इंफ्राटेक लिमिटेड और हरियाणा की एसपी सिंगला कंपनी के संयुक्त उपक्रम को यह ठेका मिला है।
दोनों कंपनियों के पिछले निर्माण कार्यों को लेकर उठे सवालों के चलते इस महत्वाकांक्षी परियोजना की गुणवत्ता और निगरानी पर सवाल खड़े होने लगे हैं। हालांकि सेतु निगम के अधिकारियों को कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए वह अतिरिक्त सतर्कता बरतेंगे।
ट्रांसगंगा सिटी पुल निर्माण में पीएनसी के साथ शामिल संयुक्त भागीदार कंपनी एसपी सिंगला कंपनी विवादों में रह चुकी है। चार जून 2023 को बिहार के भागलपुर में 1,717 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे अगुवानी-सुल्तानगंज पुल का हिस्सा गिरने के मामले में कंपनी जांच के दायरे में आई थी। मई 2020 में पटना की लोहिया पथ चक्र परियोजना के दौरान कंक्रीट स्लैब गिरने से तीन बच्चों की मौत के मामले में भी कंपनी का नाम सामने आया था।
इन घटनाओं के बावजूद दोनों कंपनियों को ट्रांसगंगा पुल जैसी महत्वपूर्ण परियोजना का ठेका मिलने से सवाल उठ रहे हैं। परियोजना के तहत कुल 753 करोड़ रुपये की लागत से वाई आकार का पुल बनाया जाएगा, जिसमें 500.50 करोड़ रुपये निर्माण कार्य पर खर्च होंगे। करीब चार किलोमीटर लंबे पुल का 1,825 मीटर हिस्सा गंगा नदी के ऊपर बनेगा और यह कानपुर के रानीघाट व धोबीघाट को सीधे उन्नाव की ट्रांसगंगा सिटी से जोड़ेगा।
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20 जून को घाटमपुर में पीएनसी का बनाया ओवर ब्रिज में आई थी दरार
पीएनसी इंफ्राटेक का नाम घाटमपुर में ओवरब्रिज से भी जुड़ा है। पीएनसी ने 46 करोड़ रुपये की लागत घाटमपुर ओवर ब्रिज का निर्माण किया था। 12 नवंबर 2022 को लोड टेस्टिंग पूरी होने के बाद इसे आम जनता के लिए खोल गया था, लेकिन 20 जून को ओवर ब्रिज में दरार आने के बाद 15 दिनों के लिए बंद कर दिया गया था। हालांकि एनएचएआइ के अफसरों ने पीएनसी को जिम्मेदार कंपनी बताते हुए मरम्मत का कार्य कराया था।
नौबस्ता हमीरपुर मार्ग का भी किया था चौड़ीकरण व रखरखाव
वहीं पीएनसी को वर्ष 2015 में लगभग 373 करोड़ रुपये की लागत से नौबस्ता-हमीरपुर मार्ग के 123 किलोमीटर चौड़ीकरण और रखरखाव की जिम्मेदारी भी मिली थी। अनुबंध के तहत कंपनी को जनवरी 2025 तक सड़क के रखरखाव का कार्य करना था। कंपनी का दावा था कि हर वर्ष इस सड़क की मरम्मत पर दो करोड़ रुपये से अधिक खर्च कर रही है, लेकिन इसके बावजूद सड़क सुरक्षा, दुर्घटना रोकने के उपाय और संरचनात्मक गुणवत्ता को लेकर लगातार शिकायतें सामने आती रहीं। जनवरी 2025 के बाद पीएनसी का अनुबंध नहीं बढ़ाया गया, वहीं एनएचएआइ स्वयं हमीरपुर रोड की जिम्मेदारी संभालने के साथ ही टोल वसूली कर रहा है।
वर्तमान में कानपुर क्षेत्र में पीएनसी इंफ्राटेक के पास एनएचएआइ का कोई निर्माण कार्य नहीं है। नौबस्ता-हमीरपुर मार्ग का अनुबंध जनवरी 2025 में समाप्त हो चुका है। इस हाईवे की सुरक्षा और टोल वसूली की जिम्मेदारी एनएचएआइ के पास है।
पंकज यादव, परियोजना निदेशक, एनएचएआइ
ट्रांसगंगा सिटी पुल निर्माण का कार्य सितंबर माह से शुरू होगा। पुल निर्माण की गुणवत्ता को लेकर थर्ड पार्टी निगरानी के लिए एजेंसी से अनुबंध कर लिया गया है। लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के मामले को लेकर इस प्रोजेक्ट पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
धर्मवीर सिंह, प्रबंध निदेशक, सेतु निगम, उत्तर प्रदेश