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Swine Flu vs Seasonal Flu: लक्षण तो एक जैसे, फिर स्वाइन फ्लू है या वायरल बुखार कैसे पहचानें?

Published: Tue, 08 Sep 2026 09:41 PM (IST)

कानपुर सहित प्रदेश में स्वाइन फ्लू और वायरल बुखार के बढ़ते मामलों के बीच लक्षणों में समानता से पहचान मुश्किल ...और पढ़ें

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HighLights

  1. स्वाइन फ्लू और वायरल बुखार के लक्षण अक्सर समान होते हैं

  2. स्वाइन फ्लू H1N1 से, वायरल बुखार कई वायरसों से होता है

  3. मास्क, हाथ धोना, दूरी बनाना संक्रमण से बचाव के मुख्य उपाय

जागरण संवाददाता, कानपुर। प्रदेश में स्वाइन फ्लू और वायरल बुखार को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। स्वाइन फ्लू से अब तक पांच मौतें हो चुकी हैं। उन्नाव और कानपुर में दो-दो और लखनऊ में एक मरीज की जान जा चुकी है। वहीं वायरल बुखार से भी इटावा में पांच बच्चों की मौत दर्ज हो चुकी है। शुरुआती दौर में दोनों बीमारियों के लक्षण एक जैसे दिखते हैं। ऐसे में सिर्फ लक्षण देखकर यह तय करना मुश्किल हो रहा है कि मरीज को स्वाइन फ्लू यानी इन्फ्लुएंजा एच1एन1 संक्रमण है या सिर्फ वायरल बुखार। पढ़िए रिपोर्ट...

ये होते हैं लक्षण, जिनमें अंतर करना मुश्किल

मेडिकल कालेज के वरिष्ठ प्रो. जेएस कुशवाहा के मुताबिक, स्वाइन फ्लू इन्फ्लूएंजा-ए (एच1एन1) वायरस से होने वाला संक्रामक श्वसन रोग है। इसके लक्षण सामान्य फ्लू और वायरल संक्रमण से काफी मिलते-जुलते हैं। मरीज को अचानक तेज बुखार, ठंड लगना, सूखी खांसी, गले में खराश, सिरदर्द, नाक बहना या बंद होना, मांसपेशियों और पूरे शरीर में दर्द तथा अत्यधिक थकान हो सकती है। सामान्य वायरल संक्रमण में भी बुखार के साथ शरीर और जोड़ों में दर्द, कमजोरी, भूख न लगना, सर्दी-जुकाम, नाक बहना, छींक आना और गले में भारीपन या चुभन की शिकायत हो सकती है। यही वजह है कि सिर्फ लक्षणों के आधार पर स्वाइन फ्लू और वायरल बुखार में पुख्ता अंतर करना संभव नहीं है। हालांकि वायरल संक्रमण के कुछ मरीजों में आंखों में जलन या पानी आने की समस्या भी दिखती है, जैसा स्वाइन फ्लू में नहीं होता।

स्वाइन फ्लू में अचानक बढ़ते हैं लक्षण

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) की पूर्व अध्यक्ष डा. नंदिनी रस्तोगी के अनुसार, एच1एन1 वायरस के संपर्क में आने के करीब तीन से पांच दिन में लक्षण सामने आ सकते हैं। कई बार बुखार अचानक तेज हो जाता है। बच्चों में इसके साथ उल्टी और दस्त की समस्या भी देखी जा सकती है। हालांकि, हर मरीज में सभी लक्षण एक साथ हों, यह जरूरी नहीं।

स्वाइन फ्लू के लिए सिर्फ एक, वायरल बुखार में कई वायरस जिम्मेदार

विशेषज्ञों ने बताया कि स्वाइन फ्लू की पहचान एच1एन1 वायरस के संक्रमण से होती है, जबकि वायरल बुखार किसी एक वायरस के संक्रमण से नहीं होता। राइनोवायरस, एडेनोवायरस और सामान्य इन्फ्लूएंजा जैसे वायरस के संक्रमण से हो सकता है। इसलिए हर बुखार को स्वाइन फ्लू मानना भी सही नहीं है और हर बुखार को सामान्य वायरल समझकर छोड़ देना भी जोखिम भरा हो सकता है।

स्वाइन फ्लू या वायरल बुखार, करीब से जानें-

1. कारण

  • स्वाइन फ्लू : इन्फ्लूएंजा-ए (एच1एन1) वायरस का संक्रमण।
  • वायरल बुखार : राइनोवायरस, एडेनोवायरस और सामान्य इन्फ्लूएंजा जैसे दो या अधिक वायरस का संक्रमण।

2. संक्रमण का फैलाव

  • स्वाइन फ्लू : संक्रमित के खांसने, छींकने, बोलने या सांस लेने से निकलने वाली श्वसन बूंदों व सूक्ष्म कणों के संपर्क में आने से।
  • वायरल बुखार : वायरस के प्रकार पर। कई वायरल संक्रमण खांसने-छींकने की बूंदों, संक्रमित व्यक्ति के संपर्क से फैल सकते हैं।

3. प्रमुख लक्षण

  • स्वाइन फ्लू : अचानक तेज बुखार, ठंड लगना, लगातार सूखी खांसी, गले में खराश, सिरदर्द, नाक बहना या बंद होना, मांसपेशियों व पूरे शरीर में तेज दर्द, अत्यधिक थकान और कमजोरी और बच्चों में उल्टी व दस्त।
  • वायरल बुखार : हल्का या तेज बुखार, शरीर व जोड़ों में दर्द, आंखों में जलन या पानी आना ,सामान्य कमजोरी, भूख न लगना, सर्दी-जुकाम, नाक बहना, छींक आना और गले में भारीपन या चुभन।

ये सबसे सतर्क रहें

  • स्वाइन फ्लू : पांच वर्ष से छोटे बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं, मधुमेह, हृदय या फेफड़ों की बीमारी वाले तथा कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले।
  • वायरल बुखार : छोटे बच्चे, बुजुर्ग और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाला कोई भी व्यक्ति।

ये सात तरीके दोनों बीमारियों से बचाएंगे जान

  • 1. भीड़भाड़ और संक्रमित व्यक्ति से दूरी बनाएं। जरूरत होने पर मास्क का इस्तेमाल करें।
  • 2. खांसते-छींकते समय नाक-मुंह को रुमाल, टिश्यू या मास्क से ढकें।
  • 3. साबुन-पानी से बार-बार हाथ धोएं। खासकर बाहर से आने, खाना खाने और खांसने-छींकने के बाद। आंख, नाक और मुंह को बिना हाथ धोए न छुएं।
  • 4. घर के दरवाजों के हैंडल, मोबाइल, टेबल जैसी बार-बार छुई जाने वाली सतहों की नियमित सफाई करें। व्यक्तिगत उपयोग की वस्तुएं साझा करने से बचें।
  • 5. संक्रमण के दौरान पर्याप्त आराम करें और शरीर पर अनावश्यक दबाव न डालें। पर्याप्त नींद और आराम लें, खासकर बुखार के दौरान।
  • 6. हल्का और सुपाच्य भोजन, मौसमी फल-सब्जियां तथा पौष्टिक आहार लें। पानी, सूप और अन्य तरल पदार्थ पर्याप्त मात्रा में लें। डिहाइड्रेशन से बचें।
  • 7. लक्षण दिखने पर तत्काल चिकित्सक सलाह से जांच व दवा लें। बिना चिकित्सकीय सलाह एंटीबायोटिक या अन्य दवाएं न लें।

महत्वपूर्ण: दोनों के लक्षण कई बार एक जैसे हो सकते हैं। इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर बीमारी की पुष्टि न करें और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से जांच व उपचार की सलाह लें।

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