Swachh Vayu Sarvekshan 2026: कानपुर की हवा को लगी नजर, देश में टॉप-5 से 11वीं रैंक पर पहुंचा शहर
स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026 में कानपुर की रैंकिंग राष्ट्रीय स्तर पर 5वें से गिरकर 11वें स्थान पर आ गई है। ...और पढ़ें

जरीब चौकी चौराहा स्थित जीटी रोड पर उड़ती धूल । जागरण
HighLights
कानपुर स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में 5वें से 11वें स्थान पर खिसका
खराब सड़कों और मेट्रो निर्माण से धूल प्रदूषण बढ़ा
शहर में वायु प्रदूषण नियंत्रण प्रयासों पर सवाल उठे
जागरण संवाददाता, कानपुर। Swachh Vayu Sarvekshan 2026: कानपुर शहर की खराब सड़कों से उड़ती धूल और मेट्रो के निर्माण कार्यों के चलते शहर की स्वच्छ वायु रैंकिंग में बड़ा झटका लगा है। स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में कानपुर 183.2 अंक के साथ 11वें स्थान पर रहा है, वहीं 48 शहरों की जारी सूची में कानपुर 16वें पायदान पहुंच गया है।
पिछले वर्ष 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी में कानपुर देश में पांचवें और प्रदेश में दूसरे स्थान पर था। इस तरह एक साल में राष्ट्रीय स्तर पर आठ और प्रदेश स्तर पर 14 पायदान की गिरावट हुई है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की ओर से सोमवार को जारी रैंकिंग में लखनऊ प्रदेश में पहले स्थान पर रहा। आगरा पांचवें स्थान पर है। वहीं मध्य प्रदेश के इंदौर को दूसरा, जबलपुर को तीसरा और भोपाल को चौथा स्थान मिला है। वर्ष 2022 तक देश के सर्वाधिक वायु प्रदूषित शहरों में कानपुर का नाम शामिल था।
इसके बाद प्रदूषण नियंत्रण के उपायों से हवा की गुणवत्ता में सुधार हुआ और रैंकिंग लगातार बेहतर हुई थी। पिछले वर्ष आठ सितंबर 2025 को केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की स्वच्छ वायु सर्वेक्षण रिपोर्ट में 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी में कानपुर देश में पांचवें और उत्तर प्रदेश में दूसरे स्थान पर शामिल था। इस बार रैंकिंग में आई गिरावट ने शहर में वायु प्रदूषण नियंत्रण के उपायों पर फिर सवाल खड़े किए हैं।
धूल नियंत्रण में लापरवाही भारी
शहर में विभिन्न स्थानों पर सड़क, सीवर और अन्य अवस्थापना से जुड़े निर्माण कार्य चल रहे हैं। निर्माण सामग्री खुले में पड़े रहने और वाहनों की आवाजाही से धूल उड़ती है। कई प्रमुख मार्गों पर सड़कें क्षतिग्रस्त होने से भी धूल का उत्सर्जन बढ़ रहा है। सड़क किनारे जमा मिट्टी वाहनों के गुजरने पर हवा में घुल रही है। वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए निर्माण स्थलों पर पानी का छिड़काव, निर्माण सामग्री और मलबे को ढककर रखना, सड़कों की नियमित सफाई और धूल को फैलने से रोकने के इंतजाम जरूरी हैं। इन उपायों में कमी का असर स्वच्छ वायु सर्वेक्षण की रैंकिंग पर पड़ा है।
करोड़ों खर्च के बाद भी बजरी और धूल में बनी आफत
बारिश के बाद शहर की प्रमुख सड़कों पर बिखरी बजरी हवा को प्रदूषित करने के साथ ही हादसों का कारण बन रही है। जीटी रोड, वीआइपी रोड और बर्रा बाईपास से गोविंद नगर रोड सहित 50 से अधिक सड़के खुदी पड़ी हैं, या गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं। जीटी रोड में फैली बजरी से दोपहिया वाहन सवार फिसल कर गिर रहे हैं। तिलक नगर और माल रोड पर भी सड़क किनारे जमा बजरी और धूल राहगीरों के लिए मुसीबत बनी है।
सड़कें गड्ढा मुक्त नहीं हो सकी
सड़क निर्माण और मरम्मत के नाम पर नगर निगम में बीते दो वर्षों में 15वें वित्त आयोग से करीब 594 करोड़ रुपये 765 विकास कार्यों में खर्च किए गए, इसके बावजूद सड़कों की बदहाली दूर नहीं हुई। वहीं लोक निर्माण विभाग भी एक साल में चार सौ करोड़ रुपये का बजट खर्च चुका है, लेकिन सड़कें गड्ढा मुक्त नहीं हो सकी।
सुधार की उपलब्धि को लगा झटका
प्रदूषण नियंत्रण को लेकर किए गए प्रयासों के बाद कानपुर की स्थिति में सुधार आया था। इसी का नतीजा था कि 2025 के सर्वेक्षण में शहर देश के टाप पांच शहरों में शामिल हुआ था। इस बार 11वीं रैंक मिलने से पिछले सुधार को झटका लगा है। अब शहर के सामने दोबारा ऊंची रैंक हासिल करने के लिए सड़क की धूल और निर्माण गतिविधियों से होने वाले प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण की चुनौती है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण कंट्रोल बोर्ड की और से रैकिंग जारी की गई है, जबकि बीते वर्ष केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2025 की रिपोर्ट जारी की गई थी। उस रिपोर्ट में 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी में कानपुर को देश में पांचवां और प्रदेश में दूसरा स्थान मिला था। इस बार रैकिंग में गिरावट का मुख्य कारण मेट्रो का निर्माण कार्य, टूटी और खुदी सड़कों से उड़ रही धूल-मिट्टी के कारण रैकिंग में गिरावट दर्ज की गई है। इसमें सुधार के लिए नगर निगम अन्य विभागों को पत्र भेजकर जरूरी कदम उठाने के लिए कहा जाएगा।
- अजीत कुमार सुमन, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी
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