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50 साल पुरानी औद्योगिक पहचान पर संकट...उद्योगों का शहर, फिर भी युवा क्यों छोड़ रहे कानपुर? टैलेंट का NCR की ओर पलायन

Published: Mon, 07 Sep 2026 10:58 PM (IST)

नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, कानपुर की औद्योगिक पहचान के बावजूद खराब सड़कें, जाम और कम वेतन जैसे मुद्दे ...और पढ़ें

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HighLights

  1. नीति आयोग की रिपोर्ट में कानपुर की औद्योगिक चुनौतियां उजागर

  2. खराब सड़कें, जाम, कम वेतन युवाओं के पलायन का कारण

  3. प्रतिभाओं को रोकने और बुनियादी ढांचे में सुधार की आवश्यकता

जागरण संवाददाता,कानपुर। उद्योगों की पहचान, हुनरमंद कामगारों की उपलब्धता और बड़ा बाजार...कानपुर के पास निवेश आकर्षित करने के लिए बहुत कुछ है, लेकिन शहर की कुछ पुरानी और नई समस्याएं इसकी औद्योगिक उड़ान में ब्रेक लगा रही हैं। जाम, खराब आंतरिक सड़कें, कमजोर औद्योगिक कनेक्टिविटी और अपेक्षाकृत कम वेतन अब सिर्फ शहरवासियों की परेशानी नहीं, बल्कि निवेश और रोजगार के लिए भी चुनौती बन रहे हैं। यही वजह है कि बेहतर अवसर की तलाश में कानपुर का युवा टैलेंट राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) की ओर रुख कर रहा है। यह बात हम नहीं बल्कि केंद्र सरकार के नीति निर्माता विभाग नीति आयोग की रिपोर्ट में इन बातों का उल्लेख किया गया है।

बीते तीन जुलाई को नीति आयोग की इन्वेस्टमेंट फ्रेंडलीनेस इंडेक्स-2026 रिपोर्ट प्रकाशित हुई है। इस रिपोर्ट में प्रदेश के साथ ही कानपुर को लेकर निवेशकों की प्रतिक्रियाओं के आधार पर कई महत्वपूर्ण चुनौतियां सामने आई हैं।

आयोग के उद्योग एवं विदेशी निवेश प्रभाग के कार्यक्रम निदेशक इश्तियाक अहमद के नेतृत्व में तैयार की गई रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश की औद्योगिक क्षमता को मजबूत बताया गया है, लेकिन कानपुर जैसे बड़े औद्योगिक शहरों में बुनियादी ढांचे और प्रतिभाओं को रोकने की क्षमता सुधारने की जरूरत पर जोर दिया गया है।

रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश के राज्य राजमार्गों को अपेक्षाकृत बेहतर माना गया है, लेकिन शहरों के भीतर की सड़कों की स्थिति को सुधार की जरूरत बताई गई है। रिपोर्ट में कानपुर का विशेष उल्लेख करते हुए सड़क ढांचे को मजबूत करने, जाम कम करने और कनेक्टिविटी बेहतर करने की आवश्यकता बताई गई है। औद्योगिक क्षेत्रों तक पहुंचने वाली सड़कों की स्थिति को बेहतर नहीं माना गया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि किसी औद्योगिक क्षेत्र से माल आसानी से बाहर नहीं निकल पा रहा है या कर्मचारियों को रोजाना जाम से जूझना पड़ रहा है तो निवेशक के लिए यह सीधे लागत बढ़ाने वाला कारक बन रहा है। ऐसे में कानपुर की औद्योगिक पहचान के बावजूद शहर खराब आंतरिक सड़कें और यातायात व्यवस्था शहर को पीछे धकेल रही है।

टैलेंट है, रोकने के लिए माहौल नहीं

रिपोर्ट का सबसे अहम संकेत मानव संसाधन को लेकर है। उत्तर प्रदेश में विनिर्माण क्षेत्र के लिए पर्याप्त और विविध कार्यबल उपलब्ध है। यानी उद्योगों को काम करने वाले लोगों की कमी बड़ी समस्या नहीं है। लेकिन कानपुर में कुशल और पेशेवर टैलेंट को लंबे समय तक रोक पाना चुनौती बना हुआ है।

एनसीआर की तरफ रुख करते पेशेवर

बेहतर वेतन, आधुनिक बुनियादी ढांचे और अधिक अवसरों की तलाश में कई पेशेवर एनसीआर का रुख कर रहे हैं। इसका सीधा असर शहर की औद्योगिक प्रतिस्पर्धा पर पड़ रहा है। जिस शहर में प्रतिभाशाली युवा पढ़ते और तैयार होते हैं, अगर वही रोजगार के लिए बाहर चले जाएं तो स्थानीय उद्योगों को कुशल मानव संसाधन बनाए रखने के लिए अधिक खर्च करना पड़ता है।

नोएडा जैसा निवेश कानपुर को भी चाहिए

रिपोर्ट में मजबूत औद्योगिक आधार वाले शहरों में औद्योगिक पार्कों के विस्तार की जरूरत बताई गई है। संकेत साफ है कि औद्योगिक पार्कों में निवेश का बड़ा हिस्सा सिर्फ नोएडा तक सीमित नहीं रहना चाहिए। कानपुर की मौजूदा औद्योगिक क्षमता को देखते हुए यहां भी आधुनिक औद्योगिक पार्क, बेहतर आधारभूत सुविधाएं और निवेश अनुकूल माहौल तैयार किया जा सकता है। ऐसे निवेश से केवल नए उद्योगों को जगह नहीं मिलेगी, बल्कि मौजूदा इकाइयों के विस्तार का रास्ता भी खुलेगा। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ सकता है और युवाओं को शहर में ही बेहतर अवसर मिलने की संभावना बनेगी।

प्रदूषण भी निवेश के रास्ते में चुनौती

पर्यावरणीय स्थिति को भी प्रदेश के लिए बड़ी चुनौती माना गया है। रिपोर्ट के अनुसार नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, बुलंदशहर और मुजफ्फरनगर में वर्ष के अधिकांश समय वायु गुणवत्ता सूचकांक 200 से 300 के बीच रहता है। प्रदेश के अधिकांश अन्य शहरों में भी लंबे समय तक यह 100 से 200 के बीच रहने की बात कही गई है। हालांकि इस सूची में कानपुर के नाम का कोई उल्लेख नहीं किया गया।


आयोग की नजर में प्रदेश की स्थिति

निवेश की क्षमता में प्रदेश ने लगाई लंबी छलांग

रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश को कुल 45 अंक मिले हैं। सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में प्रदेश की स्थिति 19वें स्थान पर है, जबकि बड़े राज्यों में 17 राज्यों के बीच यह 13वें स्थान पर है। प्रदेश का प्रति व्यक्ति सकल राज्य घरेलू उत्पाद 70,661 रुपये दर्ज किया गया है। सकल मूल्यवर्धन में कृषि की हिस्सेदारी 14.7 प्रतिशत, उद्योग की 28.8 प्रतिशत और सेवा क्षेत्र की 56.5 प्रतिशत है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में प्रदेश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश 333.61 मिलियन डालर बताया गया है।

सकारात्मक पक्ष भी सामने आया

प्रदेश की निवेश क्षमता के सकारात्मक पक्ष भी सामने आया है। वित्तीय वर्ष 2018-19 में सकल राज्य घरेलू उत्पाद के मुकाबले पूंजीगत व्यय आठ प्रतिशत था, जो 2023-24 में बढ़कर 13 प्रतिशत हो गया। यह बड़े राज्यों के औसत से करीब 40 प्रतिशत अधिक रहा। पूंजीगत व्यय में करीब 10 प्रतिशत की वार्षिक चक्रवृद्धि वृद्धि दर्ज की गई।


स्टार्टअप और नवाचार में भी बढ़ी ताकत

उत्तर प्रदेश में पंजीकृत स्टार्टअप की संख्या भी तेजी से बढ़ी है। वित्तीय वर्ष 2018-19 में इनकी संख्या 807 थी, जो 2023-24 में बढ़कर 3,426 हो गई। वर्ष 2023 में कुल कंपनियों की तुलना में पंजीकृत स्टार्टअप का हिस्सा बड़े राज्यों के औसत से 13 प्रतिशत अधिक था। वर्ष 2023 में प्रदेश में 955 अटल टिंकरिंग प्रयोगशालाएं थीं, जो देश में तीसरी सर्वाधिक संख्या है। यह आंकड़ा बताता है कि प्रदेश में नई पीढ़ी के कौशल और नवाचार के लिए आधार तैयार हो रहा है। चुनौती यह है कि इस टैलेंट को पढ़ाई और प्रशिक्षण के बाद दूसरे महानगरों में जाने से कैसे रोका जाए।


लाजिस्टिक और बिजली में भी सुधार जरूरी

रिपोर्ट में लाजिस्टिक ढांचे की कमियों को भी निवेश के लिए चुनौती माना गया है। प्रदेश के अंतर्देशीय कंटेनर डिपो में भीड़, सीमा शुल्क निकासी में समय का अंतर और सीमित डिजिटल सुविधाओं की समस्या बताई गई है। इसके लिए रेडियो आवृत्ति पहचान आधारित प्रवेश व्यवस्था, 24 घंटे सीमा शुल्क सहायता और पारदर्शी शुल्क व्यवस्था की सिफारिश की गई है। औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति भी चिंता का विषय है। अनियमित आपूर्ति को चुनौती बताते हुए अलग औद्योगिक फीडर स्थापित करने का सुझाव दिया गया है।

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