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    Railway की बिछड़ों को अपनों से मिलाने की पहल ' नन्हे फरिश्ते ', 3 महीने में 97 बच्चों को मिलाया, 176 रेस्क्यू

    Updated: Sun, 09 Aug 2026 07:24 PM (GMT+05:30)

    रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने 'ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते' के तहत प्रयागराज मंडल में तीन महीने में 176 बच्चों को बचाया, जिनमें से 97 को उनके परिवारों से मिला ...और पढ़ें

    ये फोटो एआई जनरेटेड है।

    ये फोटो एआई जनरेटेड है।

    HighLights

    1. आरपीएफ ने 'नन्हे फरिश्ते' ऑपरेशन के तहत 176 बच्चों को बचाया

    2. प्रयागराज मंडल में 97 बच्चों को उनके परिजनों से मिलाया गया

    3. ट्रेनों और प्लेटफार्मों पर भटके बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की गई

    जागरण संवाददाता, कानपुर। प्रयागराज मंडल में रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने आपरेशन नन्हे फरिश्ते के तहत तीन महीने में 176 बच्चों को ट्रेनों और प्लेटफार्मों से रेस्क्यू किया। इनमें से 97 बच्चों की पहचान और उनके परिजनों का पता लगाकर उन्हें परिवार के सुपुर्द किया गया। वहीं, 79 बच्चों को एनजीओ और चाइल्डलाइन के हवाले किया गया।

    आरपीएफ के जवान ट्रेनों, प्लेटफार्मों और स्टेशन परिसर में अकेले या भटके हुए बच्चों पर नजर रखते हैं। बच्चा मिलने पर उनसे बातचीत कर उसके घर और परिजनों के बारे में पता करते हैं। इसके बाद संबंधित थानों और परिजनों की पहचान करते हैं। पूरी तरह आश्वस्त होने के बाद बच्चे को परिजनों को सौंप देते हैं।

    पिछले साल भी 652 बच्चों का हुआ था रेस्क्यू

    वर्ष 2025-26 में प्रयागराज मंडल में आरपीएफ ने 652 बच्चों को रेस्क्यू किया था। इनमें से 400 से अधिक बच्चों को उनके परिजनों से मिलाया गया। कई मामलों में आरपीएफ ने बच्चों की ओर से बताए गए पते और फोन पर संपर्क करने के बाद उनके परिवार तक पहुंचाया गया।

    कटिहार से भटककर कानपुर सेंट्रल पहुंचा बच्चा

    हाल ही में कटिहार से भटककर एक बच्चा कानपुर सेंट्रल स्टेशन पहुंच गया। यहां पर अकेले घूमते बच्चे पर आरपीएफ की नजर पड़ी तो उससे बातचीत की गई। बच्चे ने परिजनों से जुड़ी जानकारी दी। इस पर आरपीएफ ने संबंधित लोगों से संपर्क किया। परिजनों को सूचना दी गई और जरूरी प्रक्रिया पूरी कर बच्चे को परिवार से मिलाया गया।

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    प्रयागराज के बच्चे को मिलाया परिजनों से

    प्रयागराज का एक बच्चा परिजनों से बिछड़कर कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन पहुंच गया। आरपीएफ ने बच्चे को अकेला देखा तो उससे बातचीत कर परिजनों का पता लगाया। मोबाइल नंबर की जानकारी होने पर परिजनों से बातचीत की। दूसरे दिन परिजन आरपीएफ पोस्ट पहुंच गए। बच्चे ने परिजनों की पहचान की तो उन्हें उनके हवाले किया गया।


    आरपीएफ ने नन्हे फरिश्ते के तहत बेहतर काम किया है। कई बच्चों को उनके परिजनों से मिलवाया गया है। स्टेशनों पर अकेले घूमते बच्चों को देखकर यात्रियों को भी सतर्क रहना चाहिए। ऐसे बच्चे दिखाई देने पर तुरंत आरपीएफ या रेलवे के संबंधित सुरक्षा कर्मियों को सूचना दें।
    अमित कुमार सिंह, पीआरओ, प्रयागराज रेल मंडल

     

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