Kanpur News: कानपुर की बदहाल सड़कें इंटरनेट मीडिया पर छाईं, यूजर्स बोले- अरबों खर्च कर शहर में लाए ‘चांद के गड्ढे’
कानपुर में अरबों रुपये खर्च होने के बावजूद सड़कें गड्ढों से भरी हैं और बारिश में शहर डूब रहा है, ...और पढ़ें

जरीब चौकी से अफीम कोठी केे बीच जीटी रोड पर नजर आते गड्ढे और उनमें भरा वर्षा का पानी। जागरण
HighLights
कोई जवाबदेही लेने को तैयार नहीं, व्यवस्थाओं का जिम्मेदार नगर निगम घोटाले में व्यस्त
इस वित्तीय वर्ष में सड़क निर्माण व मरम्मत में लगभग 400 करोड़ तक खर्च हुए
वित्तीय वर्ष 2024-25 में करीब 2300 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत हुआ था
रितेश द्विवेद, कानपुर। कानपुर शहर की सड़कें छलनी, हाईवे गड्ढों में तब्दील, पुल और आरओबी की सरिया टूटी हैं। लोग गड्ढों में गिर रहे हैं, लेकिन सरकारी तंत्र खामोश बैठा है, आम आदमी की लाचारी पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। लोग व्यवस्था के प्रति गुस्सा इंटरनेट मीडिया पर निकाल रहे हैं। कानपुर की बदहाल सड़कों की तस्वीरें और वीडियो इंटरनेट मीडिया पर चर्चा में हैं। यूजर्स ने तंज कसते हुए कहा कि अरबों रुपये खर्च करने के बाद भी शहर में ‘चांद के गड्ढे’ दिखाई दे रहे हैं।
अरबों रुपये खर्च होने के बाद भी शहर की शायद ही ऐसी कोई सड़क सुरक्षित बची होगी जिसमें चलना आसान हो। नगर निगम में पुलिस की कार्रवाई के बाद अधिकारियों और इंजीनियरों ने काल उठाना बंद कर दिया है, जनप्रतिनिधि केवल आश्वासन दे रहे हैं, व्यवस्था का हाल ऐसा हो गया है कि कोई देखने और सुनने वाला नहीं है। शहर के जिम्मेदार सवालों से बचते नजर आ रहे हैं। शहर के इन हालात के लिए कोई जवाबदेही लेने को तैयार नहीं है क्योंकि सबसे बड़ी जिम्मेदारी जिस नगर निगम की है वह विकास व अन्य इंतजामों में घपला-घोटालों के आरोपों से जूझ रहा है।
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पालीटेक्निक के सामने टूटी जीटी रोड। जागरण
शहर की सड़कें अब सिर्फ रास्ते नहीं रह गई हैं, बल्कि आम आदमी के लिए रोजाना की परीक्षा बन चुकी हैं। कहीं सड़क गड्ढों में तब्दील है तो कहीं गड्ढों में सड़क तलाशनी पड़ रही है। हाईवे पर जगह-जगह टूटे हिस्से हादसों को न्योता दे रहे हैं। पुल और आरओबी की टूटी सरिया व्यवस्था की बदहाली की कहानी कह रही हैं। बारिश ने हालात और भयावह कर दिए हैं। शहर से जुड़ी बस्तियां बाढ़ और जलभराव की चपेट में हैं।
सड़क पर निकलने वाला व्यक्ति नहीं जानता है कि अगला गड्ढा कहां मिलेगा। सड़क से गुजरते दोपहिया वाहन चालक गिर रहे हैं। निर्माण और मरम्मत के नाम पर जगह-जगह पड़ी मिट्टी और धूल हवा में उड़ रही है। बारिश के बाद यही धूल कीचड़ बनकर सड़कों को और खतरनाक कर देती है। सवाल यह है कि जिस शहर में सड़कों, नालों और मूलभूत सुविधाओं पर अरबों रुपये खर्च किए गए, तो व्यवस्थाएं दुरुस्त क्यों नहीं हुई।
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चमनगंज क्षेत्र में धंसी सड़क। जागरण
594 करोड़, 765 काम,… फिर भी सड़कें बदहाल
नगर निगम में बीते दो साल में 15वें वित्त आयोग से करीब 594 करोड़ रुपये का बजट 765 विकास कार्यों के लिए वितरित किया गया। इसमें सड़क और नाला निर्माण जैसे मूलभूत कार्य भी शामिल हैं। लेकिन बारिश आते ही इन विकास कार्यों की हकीकत सामने आ गई। बीते वर्ष 16 जनवरी 2025 को हुई नगर निगम कार्यकारिणी की बैठक में वर्ष 2025-26 के लिए करीब 2800 करोड़ रुपये का बजट मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए स्वीकृत किया गया था।
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कर्रही रोड की टूटी सड़क भरा पानी । जागरण
वर्ष 2024-25 में करीब 2300 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत हुआ
इससे पहले वित्तीय वर्ष 2024-25 में करीब 2300 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत हुआ था। इस बजट से सीएम ग्रिड योजना समेत सड़क, स्वास्थ्य सेवाओं, स्ट्रीट लाइट और पार्कों के रखरखाव पर भी करोड़ों रुपये अभी तक खर्च हो चुके हैं, फिर भी बारिश में शहर का बड़ा हिस्सा जलभराव में डूब जाता है। सड़कें उखड़ जाती हैं और नालियां जवाब दे देती हैं। ऐसे में सवाल सिर्फ सड़क की मजबूती का नहीं है, बल्कि करोड़ों रुपये के इस्तेमाल और उसके परिणाम का भी है।
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80 फीट रोड पर धंसी सड़क । जागरण
पीडब्ल्यूडी के पास 1383 सड़कें, लंबाई 3145 किमी
शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों की जिम्मेदारी संभाल रहे लोक निर्माण विभाग के आंकड़े भी तस्वीर का दूसरा बड़ा हिस्सा सामने रखते हैं। पीडब्ल्यूडी के दस्तावेजों के अनुसार प्रांतीय खंड के अधीन 708 सड़कें हैं, जिनकी कुल लंबाई करीब 1818 किलोमीटर है। इनमें राज्य मार्ग, प्रमुख जिला मार्ग, अन्य जिला मार्ग तथा शहरी और ग्रामीण सड़कें शामिल हैं। वहीं खंड-दो के अधीन 675 सड़कें हैं, जिनकी कुल लंबाई करीब 1327 किलोमीटर है। दोनों खंडों को मिलाकर 1383 सड़कें और करीब 3145 किलोमीटर सड़क नेटवर्क विभाग की जिम्मेदारी में है।
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जीटी रोड पर भरा पानी । जागरण
जीटी रोड के हालात किसी से छिपे नहीं
इस वित्तीय वर्ष में सड़क निर्माण और मरम्मत में लगभग 400 करोड़ रुपये तक खर्च हुए हैं। इसके बावजूद शहर और आसपास के इलाकों में सड़कों की स्थिति यह सवाल खड़ा कर रही है, जीटी रोड के हालात किसी से छिपे नहीं हैं, पूरी सड़क गड्ढों में तब्दील हो चुकी है, लेकिन जिम्मेदार विभाग के इंजीनियर आंख बंद करके तमाशा देखने में जुटे हैं। विभागीय इंजीनियरों का कहना है कि मरम्मत के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी कराई जा रही है, बारिश बंद होने के बाद मरम्मत का कार्य शुरू होगा।
5523 करोड़ की परियोजनाएं मांगी गईं, पुराने काम अधूरे
18 जून 2025 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सीएसए में पीडब्ल्यूडी की समीक्षा बैठक की थी। इसमें कानपुर जिले के लिए करीब 5523 करोड़ रुपये की 344 परियोजनाओं का बजट मांगा गया था। नई परियोजनाओं और बड़े बजट की जरूरत से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन उससे पहले पुराने कामों की गुणवत्ता और उनकी स्थिति पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
ये हैं सड़कों के इस हालात के जिम्मेदार
- अर्पित उपाध्याय, नगर आयुक्त
- सैय्यद फरीद अख्तर जैदी, मुख्य अभियंता
- अखंडेश्वर प्रसाद, अधिशासी अभियंता
- अनूप कुमार मिश्र, अधिशासी अभियंता, प्रांतीय खंड पीडब्ल्यूडी
सड़कों के गड्ढों की मरम्मत के लिए नगर आयुक्त की अध्यक्षता में छह सदस्यीय कमेटी गठित की गई थी, जल्द ही रिपोर्ट मांगी जाएगी। विभागीय अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करके समस्या का निराकरण किया जाएगा, अगर किसी भी स्तर से लापरवाही बरती गई है, तो कार्रवाई की जाएगी।
के. विजयेन्द्र पांडियन, मंडलायुक्त
सड़कों की मरम्मत का काम जल्द शुरू होगा। सभी विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक करके जानकारी ली है, विभागीय अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही पक्के पैचवर्क का कार्य शुरू किया जाएगा। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सभी घरों में प्रशासन की ओर से राशन पहुंचाया जा रहा है।
रमेश अवस्थी, सांसद
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