Kanpur Floods: कानपुर में पांडु नदी का कहर, 5 लाख लोग प्रभावित, घर पानी में डूबे
पांडु नदी में बढ़ते जलस्तर से कानपुर के कई इलाकों में बाढ़ आ गई है, जिससे लगभग पाँच लाख लोग ...और पढ़ें

HighLights
पांडु नदी की बाढ़ से कानपुर में हाहाकार।
पांच लाख आबादी प्रभावित, घर-बार डूबे।
प्रशासन द्वारा ट्रैक्टर से राहत सामग्री वितरण।
जागरण संवाददाता, कानपुर। पांडु नदी का बढ़ता जलस्तर नदी किनारे बसे परिवारों के लिए बड़ी मुसीबत बन गया है। गोपालपुरवा, मेहरबान सिंह पुरवा, बर्रा आठ, गुजैनी, बनपुरवा, वरुण विहार, कपिली और बौद्ध विहार समेत कई इलाकों में पानी घरों तक पहुंच गया है। करीब पांच लाख की आबादी बाढ़ से प्रभावित बताई जा रही है।
पानी बढ़ने के बाद लोगों को अपने आशियाने छोड़कर सुरक्षित स्थानों और राहत केंद्रों में जाना पड़ा है। घरों में रखा जरूरी सामान, कपड़े, बिस्तर, राशन और घरेलू उपकरण पानी में खराब हो गए हैं। कई परिवारों के सामने अब घर लौटने के बाद जिंदगी दोबारा पटरी पर लाने की चिंता है।
बाढ़ प्रभावित बस्तियों में लोगों की आंखों के सामने उनकी वर्षों की जमा पूंजी पानी में बर्बाद हो गई। किसी का बिस्तर भीग गया तो किसी का राशन पानी में बह गया। कई घरों में फर्नीचर और घरेलू सामान पूरी तरह खराब हो चुका है। गरीब और मजदूर परिवारों के लिए यह नुकसान और भी बड़ा है, क्योंकि रोज कमाकर परिवार चलाने वाले इन लोगों के पास सामान दोबारा खरीदने के लिए बचत तक नहीं है।
गोपालपुरवा निवासी रामस्वरूप ने बताया कि गांव में पानी बढ़ने के बाद सबसे पहले बच्चों और बुजुर्गों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की चिंता हुई। घर छोड़ते समय गांव के कई परिवार जरूरी सामान तक नहीं निकाल सके। पानी लगातार बढ़ने के कारण लोगों को मजबूरी में अपना घर छोड़ना पड़ा। जिन झोपड़ियों में परिवार वर्षों से रह रहे थे, उनमें से कई पूरी तरह पानी में डूब गईं।
‘घर छोड़ आए, अब लौटेंगे तो क्या बचेगा’
बाढ़ प्रभावित लोगों की सबसे बड़ी चिंता सिर्फ पानी नहीं, बल्कि पानी उतरने के बाद की जिंदगी है। लोगों का कहना है कि घरों में पानी भरने के बाद वह रहने लायक भी नहीं बचे हैं। दीवारें और फर्श खराब हो गए हैं और घरेलू सामान नष्ट हो चुका है। ऐसे में पानी उतरने के बाद भी परिवारों के सामने सुरक्षित छत और रोजमर्रा की जरूरतें जुटाने की चुनौती रहेगी। वरुण विहार और आसपास की कच्ची बस्तियों में हालात और खराब हैं। हजारों झोपड़ियां पानी में डूबने के बाद परिवार शेल्टर होम पहुंच गए हैं। यहां पहुंचे लोगों का कहना है कि वह अपने पीछे सबकुछ छोड़ आए हैं। कई परिवारों को यह भी चिंता है कि उनके घरों में रखा सामान पानी में खराब हो चुका है और वापस लौटने पर रहने की स्थिति नहीं होगी।
ट्रैक्टर से तहसीलदार बांट रहे राहत सामग्री
प्रशासन की ओर से करीब एक हजार परिवारों को राहत सामग्री बांटने का दावा किया गया है, जबकि करीब दो सौ परिवारों को राहत केंद्र में रखने की बात कही गई है। तहसीलदार सदर विनय
कुमार द्विवेदी ने बताया कि ट्रैक्टर से हर घर तक राहत सामग्री पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है।
बच्चों और बुजुर्गों की बढ़ी परेशानी
जलभराव के कारण सबसे ज्यादा परेशानी बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को उठानी पड़ रही है। घर छोड़कर राहत केंद्र पहुंचने वाले परिवारों के लिए रोजमर्रा की दिनचर्या पूरी तरह बदल गई है। छोटे बच्चों के साथ अस्थायी ठिकानों पर रहना लोगों के लिए मुश्किल साबित हो रहा है। वहीं, बुजुर्गों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की चिंता है। लोगों ने प्रशासन से स्वास्थ्य सेवाओं और दवाओं की पर्याप्त व्यवस्था कराने की मांग की है।
सांसद के सामने रखी समस्याएं
शनिवार को सांसद रमेश अवस्थी ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर स्थानीय लोगों से बातचीत की। उन्होंने लोगों की समस्याएं सुनीं और राहत केंद्र पहुंचकर भोजन, रहने, स्वास्थ्य समेत अन्य सुविधाओं की जानकारी ली। प्रभावित परिवारों ने उनके सामने राहत और सुरक्षित आवास की मांग रखी। सांसद ने अधिकारियों को प्रभावित लोगों की समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बाढ़ की स्थिति में किसी प्रभावित परिवार को परेशानी नहीं होनी चाहिए। राहत और बचाव कार्य में तेजी बनाए रखने के साथ लोगों की आवश्यक जरूरतों का ध्यान रखा जाए। सांसद ने बाढ़ प्रभावित परिवारों को सरकारी योजनाओं के तहत आवास उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू करने और पात्र परिवारों का चिह्नीकरण करने के निर्देश भी दिए।
