कानपुर में 4 साल से चल रहा था किडनी की चोरी और तस्करी का काला कारोबार, विदेशी भी करा चुके हैं ट्रांसप्लांट
कानपुर में चार साल से चल रहे किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है। डॉक्टर दंपती, बिचौलिया शिवम अग्रवाल और एक गिरोह 50 से अधिक लोगों, जिनमें विद ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर।
HighLights
कानपुर में 4 साल से चल रहा था किडनी रैकेट।
डॉक्टर दंपती, बिचौलिया 50 से अधिक ट्रांसप्लांट में शामिल।
अस्पतालों में बिना रिकॉर्ड, कैमरे बंद कर होते थे ऑपरेशन।
जागरण संवाददाता, कानपुर। किडनी ट्रांसप्लांट, उसकी चोरी और तस्करी का खेल शहर के डॉक्टर दंपती व बिचौलिया समेत गिरोह के सदस्य करवा रहे हैं। ये गिरोह विभिन्न अस्पतालों में 50 लोगों का किडनी ट्रांसप्लांट करा चुका है, जिसमें विदेशी भी शामिल हैं।
केशवपुरम स्थित आहूजा अस्पताल में पिछले चार साल में किडनी ट्रांसप्लांट का काला कारोबार चल रहा है। आरोपित बिचौलिया शिवम अग्रवाल ने कबूला कि यहां वर्ष 2024 से अब तक सात ट्रांसप्लांट किए जा चुके हैं, जिसमें दक्षिण अफ्रीका की अर्बिका का भी किडनी ट्रांसप्लांट तीन मार्च को आहूजा अस्पताल में किया गया था। इसी तरह से शहर के सात और अस्पतालों में भी यही खेल चल रहा है।
पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने बताया कि कुछ समय से अस्पतालों में किडनी ट्रांसप्लांट की सूचनाएं मिल रही थीं। इस पर इंटेलीजेंस मेडिकल टीम के साथ जांच कर रही थी। सोमवार को सूचना मिली कि आहूजा अस्पताल में किडनी ट्रांसप्लांट के लिए बाहर के डॉक्टर पहुंचे हैं।
पुलिस टीम अस्पताल पहुंची तो परिसर में शिवम अग्रवाल मिला। पूछताछ में उसने खुद को एंबुलेंस चालक बताया। कहा कि वह छह साल से अस्पतालों में मरीज लेकर जा रहा है। किडनी ट्रांसप्लांट की बात पूछने पर वह अस्पताल संचालक डॉ. प्रीति आहूजा व उनके पति डॉ. सुरजीत आहूजा के पास ले गया। दोनों ने पूछताछ के बाद कबूला कि शिवम किडनी ट्रांसप्लांट कराने वाले मरीजों को यहां लाता है। हालांकि, पहले उन लोगों ने अस्पताल के कैमरे चालू होना बताया, पर जांच की तो वे बंद मिले।
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पूछने पर बताया कि जिस दिन किडनी ट्रांसप्लांट होता है तो मरीज को लाने और दूसरे अस्पताल भेजने तक सभी कैमरे बंद कर दिए जाते हैं। यहां तक अस्पताल में मरीज के भर्ती होने व केस हिस्ट्री का कोई रिकॉर्ड नहीं बनाते। रविवार रात मुजफ्फरनगर नार्थ सिविल लाइंस निवासी मरीज पारुल तोमर का आयुष कुमार की किडनी ट्रांसप्लांट उनके ऑपरेशन कक्ष में डॉ. रोहित की टीम ने किया था। इसके बाद पारुल को प्रिया अस्पताल और आयुष को मेड लाइफ अस्पताल भेज दिया था।
शिवम किडनी ट्रांसप्लांट की रकम नकद ही लेता और देता था। उसने बताया कि उसे सात लाख रुपये मिले थे, जिसमें 3.50 लाख रुपये आयुष के खाते में ट्रांसफर किए, जबकि 2.75 लाख रुपये आहूजा अस्पताल के संचालक को दिए। बाकी में 25 हजार रुपये मेड लाइफ अस्पताल के संचालक को और 50 हजार खुद रख लिए थे।
आठवीं पास शिवम, गले में आला लटका बताता था खुद को डॉक्टर
पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने बताया कि आठवीं पास शिवम अग्रवाल एंबुलेंस चालक है लेकिन अस्पतालों के संचालक व डाक्टरों से उसके अच्छे संबंध होने की वजह से वह भी गले में आला लटकाकर चलता और खुद को डाक्टर बताता था। डोनर आयुष से भी उसने खुद को डाक्टर ही बताया था। आहूजा अस्पताल में भी मरीजों के तीमारदारों से बातचीत करना व उन्हें शिफ्ट कराने और पैसों की डील करने का ठेका उसी के पास था।
सादे कागज पर दवाएं लिख चला जाता था डॉ. रोहित
प्रशिक्षु आईपीएस सुमेध जाधव ने बताया कि किडनी ट्रांसप्लांट करने के लिए जब डॉ. रोहित की टीम आती थी तो ट्रांसप्लांट के बाद वे एक सादे कागज पर पांच दिन की दवाएं व प्रिस्क्रिप्शन लिखकर चले जाते थे। इसके बाद उसी कागज के साथ दूसरे अस्पतालों में उन्हें भर्ती करा दिया जाता था। वहां उसी प्रिस्क्रिप्शन के आधार पर उन लोगों का इलाज चलता था। यही नहीं डोनर व किडनी रिसीवर को अलग-अलग अस्पतालों में इसलिए रखवाते थे, जिससे दोनों एक दूसरे के संपर्क में न आ सकें और कितने रुपये लिए और दिए गए, इसका राज न खुले।
डोनर पर साइबर ठगी के आरोप, होगी जांच
पुलिस आयुक्त ने बताया कि आयुष साइबर ठगों के लिए म्यूल अकाउंट (ठगी, मनी लांड्रिंग व सट्टेबाजी में इस्तेमाल करने के लिए खाते) लोगों के खुलवाता था। फिलहाल व आइसीयू में भर्ती है। स्वास्थ्य लाभ होने के बाद इसकी भी जांच की जाएगी।