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    लखनऊ का डॉ. रोहित चला रहा था किडनी खरीदने-बेचने का रैकेट, वैध ट्रांसप्लांट के खेल में चार डॉक्टरों की तलाश

    Updated: Thu, 02 Apr 2026 05:24 PM (IST)

    कानपुर में अवैध किडनी खरीद-बिक्री रैकेट का खुलासा हुआ है, जिसका मास्टरमाइंड लखनऊ का डॉ. रोहित बताया जा रहा है। पुलिस ने आहूजा अस्पताल के संचालक समेत छ ...और पढ़ें

    मेरठ, लखनऊ, नोएडा और दिल्ली में सक्रिय किडनी खरीदने-बेचने वालों का रैकेट। - सांकेत‍िक तस्‍वीर

    मेरठ, लखनऊ, नोएडा और दिल्ली में सक्रिय किडनी खरीदने-बेचने वालों का रैकेट। - सांकेत‍िक तस्‍वीर

    HighLights

    1. लखनऊ का डॉ. रोहित अवैध किडनी रैकेट का सरगना है।

    2. कानपुर के 50 अस्पताल पुलिस जांच के दायरे में हैं।

    3. मेरठ के तीन डॉक्टरों सहित मुख्य आरोपी की तलाश जारी।

    जागरण संवाददाता, कानपुर। अवैध तरीके से किडनी की खरीद-बिक्री और ट्रांसप्लांट का रैकेट लखनऊ का डॉ. रोहित चला रहा था। पकड़े गए अन्य डॉक्टर व दलाल डॉ. रोहित के लिए काम करते थे। ज्यादातर बार वही ट्रांसप्लांट करने जाता था।

    पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने बताया कि डॉ. रोहित ट्रांसप्लांट से पहले नया मोबाइल नंबर लेता था। ट्रांसप्लांट के बाद नंबर बंद कर देता था। फिलहाल उसके साथ ही मेरठ के तीन डॉक्टरों की तलाश में तीन टीमें मेरठ, नोएडा और दिल्ली पहुंच गई हैं। आरोपित देश से बाहर न जा सकें, इसलिए लुकआउट नोटिस कराने की तैयारी है।

    शहर के 50 अस्पताल जांच के घेरे में हैं। पकड़े गए आरोपितों के मोबाइल फोन में डाटा नहीं मिला है, इसलिए कॉल डिटेल रिपोर्ट (सीडीआर) निकलवाई जा रही है। लखनऊ की क्राइम ब्रांच ने गुरुवार को जीएसवीएस पीजीआइ में भर्ती आयुष से पूछताछ की। आयुष की महिला मित्र भी बिहार से उससे मिलने पहुंची। मेडिकल कालेज के प्राचार्य डा. संजय काला के अनुसार किडनी बेचने वाला और महिला दोनों स्वस्थ हैं। उन्हें गुरुवार सुबह लखनऊ के डॉ. राममनोहर लोहिया अस्पताल शिफ्ट किया जाएगा।

    कल्याणपुर के आहूजा अस्पताल में अवैध तरीके से ट्रांसप्लांट का मामला सामने आया था। रविवार रात यहां मुजफ्फरनगर निवासी पारुल का किडनी ट्रांसप्लांट किया गया था। इसके लिए बिहार के बेगूसराय निवासी और देहरादून के ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय से एमबीए अंतिम वर्ष के छात्र आयुष ने किडनी बेची थी। रैकेट के ही किसी सदस्य ने पुलिस को ट्रांसप्लांट की सूचना दे दी।

    खबरें और भी

    सोमवार को आहूजा अस्पताल के संचालक डॉ. सुरजीत सिंह आहूजा, उनकी पत्नी व इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) कानपुर की उपाध्यक्ष डॉ. प्रीति आहूजा व दलाल शिवम अग्रवाल और तीन अस्पताल संचालकों समेत छह लोगों को पकड़ा गया। मंगलवार को वे जेल भेज दिए गए। रैकेट के लोगों ने किडनी के काले कारोबार के लिए किडनी डोनर नाम से टेलीग्राम ग्रुप बना रखा था।

    जांच में पता चला है कि डॉ. रोहित के जरिये डॉ. अफजल कानपुर, मेरठ, लखनऊ, नोएडा और दिल्ली में अब तक सैकड़ों किडनी ट्रांसप्लांट करवा चुका है। पुलिस आयुक्त ने बताया कि डा. रोहित उर्फ राहुल, मेरठ के डॉ. अफजल, डा. अनुराग उर्फ अमित, डा. वैभव मुद्गल की तलाश हो रही है।


    मेरठ के तीन डॉक्टरों से मिल चुका था किडनी बेचने वाला


    किडनी बेचने वाले आयुष ने बुधवार को पुलिस को बताया कि पैसों की खातिर उसका संपर्क टेलीग्राम ग्रुप के जरिये दिल्ली के अली से हुआ। इसी बीच किडनी डोनर नाम के ग्रुप में किडनी की डिमांड आई। आयुष ने रुचि दिखाई तो अली ने उसे डा. वैभव, डॉ. अमित व डा. अफजल से मिलवाया।

    डॉ. अफजल का संपर्क मेरठ के अल्फा अस्पताल से था। अफजल के संपर्क में मरीज पारुल थी, जिनकी दोनों किडनी खराब हो चुकी थीं। डा. अफजल ने बताया तो डा. रोहित ने दलाल शिवम अग्रवाल से बात की। उसने आहूजा अस्पताल का नाम सुझाया। इसके बाद पारुल को कानपुर लाकर 10 दिन होटल में रोका गया।

    ट्रांसप्लांट से पहले गुर्जर अस्पताल में नौ बार उसकी डायलिसिस हुई। इस पूरे घटनाक्रम में अभी कई सवाल अनसुलझे हैं। पुलिस स्पष्ट नहीं कर पा रही कि दिल्ली के किस अस्पताल से डाक्टर आते थे? किडनी के एवज में मरीज से कुल कितने रुपये लिए गए थे?



    दलाल को मिला था लाखों रुपये मिलने का लालच


    तीन साल पहले शिवम जब एंबुलेंस चलाता था तब उसका संपर्क डा. रोहित से एम्स में हुआ था। डा. रोहित ने उससे किडनी वाले केस लाने पर लाखों रुपये देने का लालच दिया था।