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    कानपुर में कार्यालय घेरने के मामले में पुलिस आयुक्त ने ITBP के DG को लिखा पत्र, जांच के साथ कार्रवाई की मांग

    Updated: Mon, 25 May 2026 05:10 AM (IST)

    कानपुर में आईटीबीपी जवान की मां का हाथ काटने के मामले में दोबारा जांच शुरू हुई है। जांच में डॉक्टरों की गंभीर लापरवाही सामने आई, जिसमें समय पर वैस्कुल ...और पढ़ें

    कार्यालय घेरने के मामले में पुलिस आयुक्त ने ITBP के DG को लिखा पत्र।

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    जागरण संवाददाता, कानपुर। इलाज के दौरान लापरवाही के चलते भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के जवान की मां का हाथ काटे जाने के मामले में दोबारा जांच शुरू हो गई है। इलाज करने वाले डॉक्टरों से पूछताछ की गई। पूछताछ से जो निष्कर्ष निकला, डॉक्टरों की भारी लापरवाही पर मुहर लगा रहा है।

    जांच टीम में शामिल प्रशिक्षु आईपीएस सुमेध मिलिंद जाधव के अनुसार एसीएमओ सहित चार डॉक्टरों के पैनल की पूछताछ में साफ हुआ कि नसों में थक्के जमने से खून का प्रेशर बढ़ रहा था, जिससे सूजन व संक्रमण की समस्या हुई। यदि सही समय पर वैस्कुलर सर्जन से सलाह लेकर हाथ में कट लगा दिया जाता तो हाथ काटने की स्थिति न बनती।

    उधर, इस मामले में शनिवार को आईटीबीपी के कमांडेंट और 50 सशस्त्र जवानों के पुलिस आयुक्त कार्यालय घेरने पर पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने आईटीबीपी के डीजी को पत्र लिखकर घटनाक्रम की जानकारी दी है और जांच के साथ कार्रवाई के लिए कहा है।विकास सिंह महाराजपुर में आईटीबीपी की 32वीं बटालियन में तैनात हैं। उनकी मां निर्मला देवी को सांस लेने में परेशानी पर 13 मई को शहर के कृष्णा अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

    आरोप है कि वहां इलाज में लापरवाही बरती गई। इंजेक्शन लगाने के बाद हाथ सूजने के साथ ही उसमें संक्रमण फैलने लगा। इसके बाद पारस अस्पताल में भर्ती कराई गई मां का हाथ 17 मई को काटना पड़ा। मां का कटा हाथ आइस बॉक्स में रखकर विकास पुलिस आयुक्त के पास पहुंचे तो सीएमओ हरिदत्त नेमी से जांच कराई गई।

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    शुक्रवार को रिपोर्ट आई, मगर इसमें संक्रमण के कारणों को स्पष्ट नहीं किया गया। गोलमोल रिपोर्ट से नाराज आईटीबीपी के कमांडेंट 50 जवानों के साथ शनिवार को पुलिस आयुक्त कार्यालय पहुंच गए। तब तय हुआ कि दोबारा जांच होगी। दोबारा बनी जांच टीम में एसीएमओ रमित रस्तोगी सहित चार डॉक्टर, आईटीबीपी का प्रतिनिधि, आइपीएस बने डॉ. विपिन ताडा और प्रशिक्षु आइपीएस सुमेध मिलिंद जाधव शामिल हैं।

    प्रशिक्षु आइपीएस के अनुसार जब मरीज को सांस लेने की दिक्कत थी तो हाथ में सूजन आने के बाद काला कैसे पड़ा, जिसके बारे में रिपोर्ट में स्पष्ट नहीं लिखा गया था। ऐसी स्थिति क्यों आई? क्या किसी सर्जन से सलाह ली गई? इसमें लापरवाही किसकी थी? ऐसे तमाम तथ्यों को जानने के लिए 50 सवाल तैयार किए गए हैं।

    प्रशिक्षु आइपीएस ने बताया कि रविवार को टीम ने डॉक्टरों के बयान लिए, इसमें सामने आया कि जवान की मां को हृदय रोग की भी समस्या थी। इलाज के दौरान उनकी नसों में थक्के जमने लगे थे, जो हाथ की नसों तक पहुंच गए। ऐसे में खून का संचार बंद होने से समस्या बढ़ जाती है। सही समय पर कट लगाकर इसे दूर किया जा सकता था, लेकिन डॉक्टरों ने सर्जन की सलाह नहीं ली।

    आईटीबीपी जवान की मां के साथ जो घटना हुई है, उसका शासन ने संज्ञान लिया है। मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए गए हैं। हर स्थिति में न्याय मिलेगा। डीजी हेल्थ को इस मामले में पुन: तथ्यों के साथ रिपोर्ट देने के आदेश गए दिए हैं। -बृजेश पाठक, उप मुख्यमंत्री।

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