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    झांसी में 10 थानों की पुलिस ने साइबर ठगों के खिलाफ चलाया अभियान, 23 लोग गिरफ्तार

    Updated: Mon, 10 Aug 2026 05:30 AM (IST)

    झांसी के कटेरा थाना क्षेत्र में पुलिस ने साइबर ठगों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 23 महिला-पुरुषों को गिरफ्तार किया है। ये ठग खुद को पुलिस अधिकारी ब ...और पढ़ें

    10 थानों की पुलिस ने साइबर ठगों के खिलाफ अभियान चलाकर 23 लोगों को किया गिरफ्तार।

    10 थानों की पुलिस ने साइबर ठगों के खिलाफ अभियान चलाकर 23 लोगों को किया गिरफ्तार।

    HighLights

    1. झांसी में साइबर ठगों के खिलाफ बड़ी पुलिस कार्रवाई।

    2. कटेरा क्षेत्र के तीन गांवों से 23 आरोपी गिरफ्तार किए गए।

    3. फर्जी पुलिस वर्दी, सायरन और सेटअप बरामद हुआ।

    जागरण संवाददाता, झांसी। मध्य प्रदेश की सीमा लगते जिले के कटेरा थाना क्षेत्र के तीन गांवों कौड़ेरा, मौरयाना, खौरयाना में एक साथ छापेमारी कर 23 महिला-पुरुषों को गिरफ्तार कर रविवार को न्यायालय में पेश किया गया। अब इन्हें जेल भेजने की तैयारी चल रही है। इन्हें शुक्रवार शनिवार की रात तीन बजे साइबर ठगी के नेटवर्क पर एक साथ धावा बोलकर पकड़ा गया था।

    अभियान में छह सीओ, 10 थानों के करीब 200 पुलिसकर्मी और दो कंपनी पीएसी शामिल हुए। पुलिस ने करीब 60 लोगों को हिरासत में लिया। जांच के बाद इनमें 23 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया।

    पुलिस के अनुसार, पकड़े गए आरोपितों में लक्ष्मण यादव और उसके साथी सत्यम यादव के रिश्तेदार मध्य प्रदेश की सीमा में स्थित महेबा व उसके आसपास के गांव में रहते हैं। महेबा लगभग 12 वर्ष से साइबर ठगी का केंद्र बना हुआ है।

    झांसी के कौड़ेरा, मौरयाना, खौरयाना गांवों में साइबर ठगी का ऐसा नेटवर्क संचालित हो रहा था, जिसमें आरोपित खुद को पुलिस अधिकारी या जांच एजेंसी का कर्मचारी बताकर लोगों को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाते और रुपये ऐंठते थे।

    कार्यवाही के दौरान पुलिस को मौके से बड़ी संख्या में मोबाइल फोन, राउटर, पुलिस सायरन, नकली पुलिस वर्दी, कैप और पुलिस के लोगो समेत साइबर ठगी में इस्तेमाल होने वाला सामान मिला है।

    पुलिस के अनुसार, ठगों ने लोगों को प्रभावित करने के लिए थाने से लेकर पुलिस मुख्यालय तक का फर्जी सेटअप तैयार कर रखा था। वीडियो काल के दौरान इसी सेटअप और पुलिस की वर्दी-सामान का इस्तेमाल कर पीड़ितों को विश्वास दिलाया जाता था कि सामने वास्तविक पुलिस अधिकारी या जांच एजेंसी के लोग हैं।

    अपर पुलिस अधीक्षक अरीबा नोमान के अनुसार, मौरयाना, खौरयाना और काड़ौर को साइबर अपराध के हाटस्पाट के रूप में चिह्नित किया गया था। पुलिस लगभग एक महीने से इन गांवों की रेकी कर रही थी।

    उनकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही थी। इसी दौरान भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र और केंद्रीय जांच एजेंसी से भी इनपुट मिले। इन्हीं सूचनाओं के आधार पर पुलिस ने कार्यवाही की रणनीति तैयार की।

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