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    आकाश आनंद ने अखिलेश को बताया अंकल, सपा-कांग्रेस और भाजपा पर जमकर बरसे बसपा नेता

    Updated: Mon, 10 Aug 2026 03:59 PM (IST)

    बसपा के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर आकाश आनंद ने हाथरस के सादाबाद में सपा, कांग्रेस और भाजपा पर जमकर हमला बोला। उन्होंने अखिलेश यादव को 'अंकल' कहकर संबोधित ...और पढ़ें

    आकाश आनंद।

    आकाश आनंद।

    HighLights

    1. बसपा के आकाश आनंद ने सपा, कांग्रेस, भाजपा पर साधा निशाना

    2. अखिलेश यादव को 'अंकल' कहकर संबोधित किया,

    3. आरक्षण और रोजगार जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरा

    जागरण संवाददाता, हाथरस। हाथरस के सादाबाद में सोमवार को बसपा के विधानसभा स्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलन को बसपा के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर आकाश आनंद सपा और कांग्रेस पर जमकर बरसे। अखिलेश यादव को उन्होंने मंच से अंकल बोला।

    आकाश ने मंच से कहा कि कांग्रेस के लोग उसी थाली के चट्टे बैठे हैं, जब सरकार में आएंगे तो भाजपा जैसा ही काम करेंगे। गलती से भी कांग्रेस को वोट पड़ गया तो ये भी वही काम करेंगे जो भाजपा और सपा ने किया है। अखिलेश यादव की उम्र अब हो गई है, वो हमसे बड़े हैं इसलिए अंकल नहीं बोलूं तो क्या बोलूं।

    सपा मुखिया के पीडीए पर तंज कसते हुए कहा कि पीडीए का मतलब कभी भी बदल जाता है, जैसे गिरगिट रंग बदलता है वैसे ही अखिलेश भी रंग बदलते हैं।

    सपा सरकार की याद दिलाई

    आकाश ने सपा पर करारे हमले किए। आकाश ने कहा कि सपा सरकार के दौरान एक छेड़छाड़ के हादसे से मुजफ्फरनगर जल गया। इस सरकार में केवल शहरों के नाम बदलने का काम हुआ। ज्योतिबा फुले नगर को अमरोहा बना दिया। महापुरुषों के नाम पर रखे महानगरों के नाम बदल दिए। हमारे बच्चे महसूस करते की हमारे महानगरों के नाम महापुरुषों के नाम पर हैं। हमारे महापुरुषों का आदर नहीं किया।

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    विरोध-प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकार

    आकाश ने आरक्षण हटाने के नारे पर कहा कि विरोध-प्रदर्शन करना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन सही मुद्दों पर सही एक्शन लेना भी उतना ही जरूरी है। आज युवाओं को उनके असली सवालों से भटकाने के लिए ‘आरक्षण हटाओ’ का नया प्रोपेगेंडा खड़ा किया जा रहा है। जबकि असली सवाल यह है कि पढ़ने वाले बच्चों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन स्कूल-कॉलेजों की संख्या कम होती जा रही है। सीटें कम की गई हैं और कई स्कूल-कॉलेज बंद किए गए हैं। रोजगार के अवसर भी युवाओं की बढ़ती जरूरत के मुताबिक नहीं बढ़े हैं।

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    आरक्षण के नाम पर समाज के अलग-अलग वर्गों को आपस में लड़ाने की कोशिश की जा रही है। युवाओं को यह पूछना चाहिए कि आखिर कितने नए स्कूल और कॉलेज खोले गए? उच्च शिक्षा में कितनी सीटें बढ़ाई गईं? कितने नए रोजगार के अवसर पैदा किए गए?

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