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53 करोड़ के छात्रवृत्ति घोटाले में मोनाड यूनिवर्सिटी ब्लैकलिस्ट, यूपी सरकार ने की कार्रवाई

Published: Thu, 23 Jul 2026 11:50 PM (IST)

मोनाड यूनिवर्सिटी को 53 करोड़ रुपये के छात्रवृत्ति घोटाले में शासन स्तर से ब्लैकलिस्ट किया गया है। विश्वविद्यालय पर सामान्य ...और पढ़ें

मोनाड यूनिवर्सिटी को 53 करोड़ रुपये के छात्रवृत्ति घोटाले में शासन स्तर से ब्लैकलिस्ट किया गया है।

मोनाड यूनिवर्सिटी को 53 करोड़ रुपये के छात्रवृत्ति घोटाले में शासन स्तर से ब्लैकलिस्ट किया गया है।

HighLights

  1. मोनाड यूनिवर्सिटी 53 करोड़ छात्रवृत्ति घोटाले में ब्लैकलिस्ट।

  2. सामान्य छात्रों को एससी दिखाकर करोड़ों की छात्रवृत्ति हड़पी।

  3. प्रारंभिक जांच में 90% छात्रवृत्ति आवेदन फर्जी पाए गए।

ठाकुर डीपी आर्य, हापुड़। फर्जी डिग्री और मार्कशीट के गंभीर आरोपों का सामना कर रही मोनाड यूनवर्सिटी पर अब छात्रवृति घोटाले का फंदा कस गया है। यूनिवर्सिटी में सामान्य वर्ग के छात्रों को एससी दिखाकर करोड़ों रुपये की छात्रवृति हड़पने के आरोप लगे थे। प्रारंभिक जांच में 53 करोड़ रुपये का फर्जीवाड़ा सामने आया था।

विभाग द्वारा जिन छात्रों की जांच की गई, उनमें से 90 प्रतिशत की छात्रवृति और प्रतिपूर्ति फर्जी पाई गई थी। इसके चलते तत्कालीन डीएम अभिषेक पांडेय ने फरवरी में मोनाड यूनीवर्सिटी को छात्रवृति के लिए ब्लैक लिस्टेड करने के साथ ही रिपोर्ट शासन को भेज दी थी।

वहीं यूनिवर्सिटी से 53 करोड़ की वसूली प्रक्रिया आरंभ करने और एफआइआर दर्ज कराने का निर्णय लिया गया था। अब शासन ने जिला प्रशासन की रिपोर्ट को जांच के बाद स्वीकार कर लिया है। अब शासन स्तर से मोनाड को ब्लैक लिस्टेड कर दिया गया है।

मोनाड विश्वविद्यालय का विवादों से पीछा नहीं छूट रहा

जिले के पिलखुवा में स्थित मोनाड विश्वविद्यालय का विवादों से पीछा नहीं छूट रहा है। अब विश्व विद्यालय को शासन स्तरा से भी छात्रवृति घोटाले में ब्लैक लिस्ट कर दिया गया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया था कि विश्वविद्यालय में सामान्य वर्ग के छात्रों को अनुसूचित जाति (एससी) का दर्शाकर करोड़ों रुपये की छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति प्राप्त की गई। जांचे गए मामलों में करीब 90 प्रतिशत आवेदन फर्जी पाए गए थे। जांच में 50 करोड़ रुपये एससी वर्ग तथा तीन करोड़ रुपये सामान्य वर्ग की छात्रवृत्ति एवं प्रतिपूर्ति में अनियमितता सामने आई थी।

तत्कालीन जिलाधिकारी अभिषेक पांडेय ने फरवरी में जांच रिपोर्ट के आधार पर मोनाड यूनिवर्सिटी को ब्लैकलिस्ट करने की संस्तुति करते हुए समाज कल्याण विभाग के निदेशक को रिपोर्ट भेजी थी। अब शासन स्तर पर रिपोर्ट का परीक्षण करने के बाद इस कार्रवाई पर अंतिम मुहर लगा दी गई है।

छात्रवृत्ति घोटाले की राशि 53 करोड़ रुपये से कहीं अधिक

इसके बाद मोनाड यूनिवर्सिटी छात्रवृत्ति योजनाओं के लिए शासन स्तर से भी ब्लैकलिस्ट हो गई है। समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों के अनुसार, मामले की विस्तृत जांच अभी जारी है। प्रारंभिक जांच केवल चयनित मामलों पर आधारित थी। ऐसे में आशंका है कि छात्रवृत्ति घोटाले की राशि 53 करोड़ रुपये से कहीं अधिक हो सकती है।

इसी आधार पर रिकवरी के साथ-साथ एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है। पिलखुवा स्थित मोनाड यूनिवर्सिटी पहले भी फर्जी डिग्री और मार्कशीट प्रकरण को लेकर जांच और कानूनी कार्रवाई का सामना कर चुकी है। अब छात्रवृत्ति घोटाले में शासन स्तर पर हुई ब्लैकलिस्टिंग से विश्वविद्यालय की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।

शासन स्तर पर गठित कमेटी ने पाया कि जिला प्रशासन द्वारा तथ्यात्मक रूप से परखने के बाद ही रिपोर्ट तैयार की गई थी। इस जांच को मोनाड प्रबंधन की ओर से चेलेंज किया गया था। इस पर शासन ने उनका पक्ष भी जाना, लेकिन वह अपने पक्ष में कोई तथ्यात्मक साक्ष्य नहीं दे पाए। शासन की जांच में आरोप सही पाए जाने पर मोनाड यूनीवर्सिटी को ब्लैक लिस्टेड कर दिया गया है। अब यह जांच आगे बढ़ेगी। - दिग्विजय सिंह, जिला समाज कल्याण अधिकारी

समाज कल्याण विभाग की रिपोर्ट पक्षपातपूर्ण है। उस पर हम पहले ही आपत्ति जता चुके हैं। जाति प्रमाण पत्र तहसील से बनाए जाते हैं। यदि सामान्य जाति के छात्रों को अनुसूचित का जातिप्रमाण पत्र दिया गया है, तो संबंधित तहसीलदार व लेखपाल पर कार्रवाई होनी चाहिए। हमने जाति प्रमाण पत्रों के आधार पर छात्रवृति दी है। ऐसे में हम दोषी कहां पर हैं? - डॉ. मोहम्मद जावेद, कुलपति, मोनाड यूनिवर्सिटी

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