हापुड़ में दिल्ली रोड पर हरे-भरे पेड़ काटे, वन रक्षक निलंबित और कई अधिकारियों को नोटिस जारी
हापुड़ के दिल्ली रोड पर हरे-भरे पेड़ों की अवैध कटाई से लोगों में नाराजगी है, जबकि शासन-प्रशासन पौधरोपण के दावे कर रहा है। इस मामले में एक वन रक्षक को ...और पढ़ें
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शहर के बीचोंबीच वर्षों पुराने हरे-भरे पेड़ काटे। जागरण
HighLights
हापुड़ के दिल्ली रोड पर दर्जनों हरे पेड़ काटे गए।
वन रक्षक निलंबित, अन्य अधिकारियों को नोटिस जारी।
सूखे पेड़ों की आड़ में हरे पेड़ों का कटान हुआ।
जागरण संवाददाता, हापुड़। एक ओर शासन-प्रशासन करोड़ों रुपये खर्च कर पौधरोपण और पर्यावरण संरक्षण के अभियान चलाकर हरियाली बढ़ाने के दावे कर रहा है, वहीं दूसरी ओर शहर के बीचोंबीच वर्षों पुराने हरे-भरे पेड़ों पर कुल्हाड़ा चलने से इन दावों पर सवाल खड़े हो गए हैं।
दिल्ली रोड पर दर्जनों पेड़ों की कटाई को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी है। आरोप है कि कुछ खास प्रतिष्ठानों को सुविधा पहुंचाने के लिए ऐसे पेड़ों को भी काट दिया गया, जिनसे न यातायात प्रभावित हो रहा था और न ही आम लोगों को किसी प्रकार की परेशानी थी। यह पौधे विद्युत लाइनों के संपर्क में भी नहीं थे।
नोटिस जारी किया गया
प्रतिष्ठान के मालिक से मिलीभगत कर पेड़ कटवाने के आरोपितवन रक्षक को सस्पेंड कर दिया गया है। वहीं, सेक्शन अधिकारी व क्षेत्रीय वन अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। इस मामले में अभी कई अधिकारी-कर्मचारी जांच के दायरे में हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सूखे पेड़ों को हटाने की कार्रवाई की आड़ में कई हरे-भरे और स्वस्थ पेड़ों का भी सफाया कर दिया गया। कटान के तुरंत बाद संबंधित स्थानों पर टाइल्स बिछा दी गईं, जिससे पूरे मामले को सामान्य दिखाने की कोशिश की गई।
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इससे यह सवाल और गहरा गया है कि क्या पेड़ों की कटाई पूर्व नियोजित थी और क्या इसके लिए निर्धारित नियमों का पालन किया गया।
सवाल उठाए जा रहे
शहरवासियों का कहना है कि वर्षों में तैयार होने वाले इन विशाल पेड़ों को कुछ ही घंटों में खत्म कर दिया गया, जबकि इन्हीं पेड़ों से लोगों को छाया, स्वच्छ हवा और पर्यावरणीय संतुलन मिलता था। लगातार बढ़ते तापमान और प्रदूषण के बीच पेड़ों की कटाई को लेकर लोगों ने जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
पर्यावरण संरक्षण के लिए हर वर्ष बड़े स्तर पर पौधरोपण अभियान चलाए जाते हैं और लाखों पौधे लगाने के दावे किए जाते हैं। ऐसे में शहर के बीचोंबीच हरे-भरे पेड़ों की कटाई इन अभियानों की गंभीरता पर प्रश्नचिह्न लगा रही है।
लोगों का कहना है कि यदि किसी कारणवश पेड़ों को हटाना आवश्यक भी था तो इसकी स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए थी और नियमानुसार अनुमति और प्रतिपूरक पौधरोपण की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जानी चाहिए थी। आक्सीजन व छाया का बड़ा स्रोत बनें इन बड़े पेड़ों को अत्याधुनिक तकनीक से दूसरे स्थान पर शिफ्ट भी कियाजा सकता था।
अब शहरवासियों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि पेड़ों की कटाई किस विभाग की अनुमति से हुई, कितने पेड़ काटे गए तथा इसके पीछे क्या कारण थे। इसके साथ ही, यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है तो जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित पक्षों के खिलाफ कार्रवाई की जाए, ताकि शहर की बची हुई हरियाली सुरक्षित रह सके।
सूखे पेड़ों की आड़ में हरे नीम-शीशम का कटान
एनएच-24 के किमी 52 पर बीकानेर की दुकान के पास दो सूखे शीशम के पेड़ों के जड़ से गलने के कारण गिरने की आशंका थी। क्षेत्रीय वनाधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर दोनों पेड़ों को सुरक्षा की दृष्टि से काटकर विभागीय स्टॉक में दर्ज करने के निर्देश दिए गए थे। कटान के दौरान अनुमति प्राप्त दो सूखे पेड़ों के साथ एक हरा नीम और एक हरा शीशम भी काट दिया गया।
इस मामले में बीट प्रभारी वनरक्षक राहुल सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। सेक्शन अधिकारी और क्षेत्रीय वनाधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। वन अपराध भी दर्ज किया गया है।
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हमने दिल्ली रोड पर सूखे पेड़ों को काटने की स्वीकृति दी है। इसके बावजूद स्वीकृति से ज्यादा व हरे पेड़ों का कटान किया गया है। इसकी जांच के लिए हमने टीम का गठन कर दिया था। टीम की रिपोर्ट में जो भी दोषी पाए गए हैं, उन पर कार्रवाई की गई है। - गौतम कुमार, जिला वन अधिकारी