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    सीमेंट के ढेले और जंग लगी सरिया से खुली पोल, मानकों में झोल बता रहे हमीरपुर पुल के भ्रष्टाचार की कहानी

    Updated: Mon, 01 Jun 2026 02:04 AM (IST)

    हमीपुर में बेतवा नदी पर 92 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा पुल भ्रष्टाचार और घटिया सामग्री के कारण ढह गया, जिससे छह लोगों की मौत हो गई। जांच में सीमेंट ...और पढ़ें

    सीमेंट के ढेले और जंग लगी सरिया बता रही है पुल के भ्रष्टाचार की कहानी।

    सीमेंट के ढेले और जंग लगी सरिया बता रही है पुल के भ्रष्टाचार की कहानी।

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    जागरण संवाददाता, हमीरपुर। मानकविहीन और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़े इस निर्माणाधीन पुल के ढहने की कहानी सीमेंट के ढेले और जंग लगी सरिया बयां कर रही हैं। असली राज जो जांच के बाद ही खुलेगा। लेकिन जानकारों के मुताबिक प्रथम दृष्टया यह पुल आंधी तूफान के झोंके से नहीं बल्कि भ्रष्टाचार के कारण धराशायी हो गया और छह जिंदगिया इसमें दफन हो गईं।

    बेतवा नदीं पर 92 करोड़ रुपये से बन रहे 700 मीटर लंबे पुल का पिलर जिस तरह से तीन जगह से टूटा और स्लैब गिर गई, उससे पूरे निर्माण पर सवालियां निशान लगा दिए हैं।

    विशेषज्ञ कहते हैं कि निर्माण में प्रयोग की गई सीमेंट और सरिया की गुणवत्ता कमजोर होने पर ही ऐसा हो सकता है। वहीं जब इसकी पड़ताल की गई तो कुछ ऐसा ही मिला। स्टोर पर रखी सीमेंट को जब देखा गया तो यह सीमेंट जमी हुई थी और उसके ढेले बन गए थे। यदि इस सीमेंट का प्रयोग पुल निर्माण में किया जाएगा तो कमजोरी कहीं न कहीं जरूर रहेगी।

    वहीं स्टोर में पड़ी जंग लगी सरिया भी इस मानकविहीन निर्माण की कहानी को बयां कर रही है। निर्माणाधीन पुल के एक पिलर के गिरने से छह लोगों की मौत के बाद इस भ्रष्टाचार की पोल खुलना शुरू हो गई है। यदि ऐसी सामग्री से पुल तैयार किया गया है तो ऐसे पुल को पूरी तरह से ध्वस्त कर उसकी जगह नया पुल बनाना होगा। नहीं तो आगे भी कोई बड़ा हादसा होने से कोई नहीं रोक सकता है।

    विशेषज्ञों ने बताया कि जो तस्वीरें सामने आईं हैं उससे ऐसा लग रहा है कि इसमें प्रापर ग्रेडिंग अर्थात अद्धा और पौना गिट्टी का मिश्रण बालू से सही तरह से नहीं हो सका है। इसमें जीरा गिट्टी का प्रयोग किया जा रहा है। इसके अलावा जंग लगी सरिया भी इसकी कमजोरी का मुख्य कारण है।

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    सीमेंट की भी गुणवत्ता अच्छी न होने के कारण इसका जोड़ मजबूत नहीं हो सका और यह पिलर धराशायी हो गया। इतना ही नहीं बालू के साथ डस्ट का भी प्रयोग किया गया, यह भी कहीं न कहीं कमजोरी का कारण बना। इसके अलावा पाइल की डिजाइन फेल्यूर की भी बात सामने आई है। जिसकी पुष्टि जांच टीम में शामिल सदस्य के द्वारा पिलर की अधिक लंबाई की बात कहने से हो रही है।

    लंबाई अधिक होने के कारण पिलर भार पूरी तरह से नहीं सह सका और धराशायी हो गया। इस मानकविहीन निर्माण और भ्रष्टाचार की परतें खुद खुलना शुरू हो गई हैं और जांच रिपोर्ट के बाद और भी स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। जिसके बाद कितनों पर कार्रवाई होगी यह समय बताएगा।

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