गोरखपुर के जैतपुर पर मंडराया सरयू का कहर, गांव की दहलीज तक पहुंची नदी; दहशत में ग्रामीण
गोरखपुर के जैतपुर गांव में सरयू नदी की कटान से उपजाऊ भूमि नष्ट हो रही है और आबादी खतरे में ...और पढ़ें

बड़हलगंज के जैतपुर गांव में कटान करती सरयू नदी। जागरण
HighLights
सरयू नदी ने जैतपुर गांव में तेज कटान शुरू की।
उपजाऊ भूमि कटकर नदी में बह गई, आबादी खतरे में।
ग्रामीणों में भय, बचाव कार्य और राहत सामग्री नहीं मिली।
संवाद सूत्र, मधुपुर, गोरखपुर। बड़हलगंज के पूर्वी कछार क्षेत्र में सरयू नदी ने जैतपुर गांव को तेजी से काटना शुरू कर दिया है।उपजाऊ भूमि को काटते हुए नदी आबादी के करीब पहुंच गई है। कटान की गति देख लोगों ने मकान से कीमती सामान हटाना शुरू कर दिया है। कटान से ग्रामीणों में भय का माहौल है लेकिन बचाव कार्य न शुरू होने से सभी नाराज हैं।
जैतपुर गांव में 70 घर हैं। गांव के शिवचंद, नंदकुमार, सत्यदेव आदि के मकान कटान की जद में आ गए हैं। सभी कीमती सामान सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रहे हैं। गांव के सत्यदेव, मनोज, सिद्धू, बैजू यादव, परमा यादव, दलसिंगार, सूरत, कैलाश, शिवचंद, रमेश, नंदकुमार, नंदलाल, राजा, लल्लन, हरिकेश, गिरिजेश, श्रीभागवत, राजेश आदि की उपजाऊ भूमि कटकर नदी में बह गई। कई परिवार अब भूमिहीन की श्रेणी में आ गए हैं। जिससे इनके सामने रोजीरोटी का संकट खड़ा हो गया है।
न पहुंचे अधिकारी, न पहुंची बाढ़ राहत सामग्री
कुछ दिन पहले कछार क्षेत्र में आई बाढ़ से डेढ़ दर्जन गांव प्रभावित हुए थे। जैतपुर भी बाढ़ प्रभावित गांवों में शामिल था। यह गांव चारों ओर से नदी से घिरा हुआ है। बाढ़ के समय हालात ज्यादा बिगड़ जाते हैं। गांव में पूरे साल नाव से ही पहुंचा जा सकता है। आरोप है कि बाढ़ आने के बाद भी गांव के लोगों का हाल जानने न तो कोई अधिकारी पहुंचा और न ही किसी को राहत सामग्री मिली।
गांव की प्रधान सरिता देवी का कार्य देखने वाले उनके जेठ योगेंद्र साहनी का कहना है कि केवल पशु विभाग ने भूसा व चोकर दिया था। इसके अलावा कोई हाल पूछने भी नहीं आया। हम लोग गांव के लेखपाल से तैयार भोजन व बाढ़ राहत सामग्री की मांग करते रहे लेकिन हम लोगों को कुछ नहीं मिला। हां, एक बड़ी नाव मिली है।
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एक वर्ष पहले भी हुई थी कटान
बीते वर्ष भी बाढ़ के समय कटान हुई थी। इसमें उपजाऊ भूमि के साथ ही रिहायशी झोपड़ी कटकर बह गई थी। इसके बाद भी कटान से बचाने के लिए कोई कार्य नहीं हुआ।
