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गोरखपुर की बेटी का कमाल, सहजनवा की पहली महिला सेना अधिकारी बनीं रितिका दुबे; भारतीय सेना ने जमकर की तारीफ

Published: Sun, 06 Sep 2026 10:11 PM (IST)

रितिका दुबे ने 23 वर्ष की आयु में भारतीय सेना में अधिकारी बनकर गोरखपुर के सहजनवा तहसील का नाम रोशन ...और पढ़ें

23 की उम्र में सेना में अधिकारी बनीं रितिका दुबे।

23 की उम्र में सेना में अधिकारी बनीं रितिका दुबे।

HighLights

  1. रितिका दुबे 23 वर्ष की आयु में सेना अधिकारी बनीं।

  2. सहजनवा तहसील की पहली महिला सेना अधिकारी का गौरव।

  3. पहले प्रयास में एसएसबी उत्तीर्ण कर बनीं प्रेरणास्रोत।

जागरण संवाददाता, सहजनवा (गोरखपुर)। लगन, हौसले और लगातार मेहनत के दम पर पाली ब्लॉक के तिलौरा गांव की रितिका दुबे ने 23 वर्ष की उम्र में भारतीय सेना में अधिकारी बनने का गौरव हासिल किया है। वह सहजनवा तहसील की पहली महिला हैं, जिन्होंने सेना में अधिकारी का पद हासिल किया है। भारतीय सेना की आर्मी ट्रेनिंग कमांड ने भी रितिका के संघर्ष और उपलब्धियों की सराहना की है।

रितिका ने पहले ही प्रयास में सर्विसेज सिलेक्शन बोर्ड (एसएसबी) का साक्षात्कार उत्तीर्ण किया। सितंबर 2025 में चेन्नई स्थित आफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी में प्रशिक्षण के लिए उनका चयन हुआ। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद वह लेफ्टिनेंट बनीं।

सेना की ओर से अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर रितिका की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए उनके शैक्षिक प्रदर्शन, राष्ट्रीय स्तर की एथलेटिक्स और पहली बार एसएसबी उत्तीर्ण करने तक के सफर को लक्ष्य के प्रति समर्पण और मेहनत का उदाहरण बताया गया है।

ritika dubey

रितिका दो भाइयों और एक बहन में सबसे बड़ी हैं। उनके भाई आर्यन दुबे विदेशी कंपनी में मैनेजर हैं, जबकि छोटा भाई अभी पढ़ाई कर रहा है। मां गीता दुबे शिक्षामित्र हैं और पिता व्यवसाय करते हैं। सीमित संसाधनों के बीच शिक्षा हासिल करने और परिवार के सहयोग से रितिका ने अपने लक्ष्य को प्राथमिकता दी और सेना में अधिकारी बनने का सपना पूरा किया।

गांव में ही हुई प्रारंभिक शिक्षा

रितिका ने गांव में ही प्रारंभिक शिक्षा हासिल की। विद्यापीठ सीतापुर से हाईस्कूल की परीक्षा में उन्होंने जिला स्तर पर शीर्ष स्थान प्राप्त किया। इंटरमीडिएट में भी बेहतर अंक हासिल किए। इसके बाद चेन्नई से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। बचपन से खेलों में रुचि रखने वाली रितिका ने एथलेटिक्स में राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभाग कर कई पदक जीते। पढ़ाई के दौरान उन्हें कई छात्रवृत्तियां भी मिलीं।

 

दूसरी बेटियों के लिए प्रेरणा बनीं रितिका

रितिका की सफलता उन बेटियों के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के कारण बड़े सपनों को लेकर संशय में रहती हैं। गांव के सामान्य परिवेश से निकलकर उन्होंने पढ़ाई के साथ खेल में भी अपनी प्रतिभा साबित की।

राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने के बाद सेना में अधिकारी बनने तक उनका मेहनत का सफर जारी रहा। उनकी उपलब्धि ग्रामीण क्षेत्र की अन्य छात्राओं को शिक्षा, खेल और प्रतियोगी परीक्षाओं में आगे बढ़ने का हौसला दे सकती है।

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