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डोमिनगढ़ से छपिया तक 'डिजिटल कवच': अब एक ही पटरी पर आ भी जाएं ट्रेनें, तो नहीं होगी टक्कर

Published: Wed, 02 Sep 2026 09:45 AM (IST)

पूर्वोत्तर रेलवे के डोमिनगढ़-स्वामी नारायण छपिया रेलखंड पर 'कवच' स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली शुरू हो गई है, जिससे ट्रेनों की ...और पढ़ें

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

HighLights

  1. डोमिनगढ़-छपिया रेलखंड पर 'कवच' प्रणाली शुरू।

  2. ट्रेनों की आमने-सामने टक्कर अब नहीं होगी।

  3. घने कोहरे में भी सुरक्षित संचालन संभव।

जागरण संवाददाता, गोरखपुर। डोमिनगढ़-स्वामी नारायण छपिया के बीच अब ट्रेनों की आमने-सामने व पीछे से टक्कर नहीं होगी। ट्रेनें ओवरशूट (लाल सिग्नल पार करना) नहीं करेंगी। एक रेल लाइन पर दो ट्रेनों के आने पर स्वत: ब्रेक लग जाएगा। घने कोहरे में भी ट्रेनों का निर्बाध संचालन संभव हो सकेगा। डोमिनगढ़-स्वामी नारायण छपिया 101.97 रूट किमी रेलखंड पर पूर्वोत्तर रेलवे (एनईआर) की पहली 'कवच' स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली (एटीपी) 31 अगस्त, 2026 से कार्य करने लगी है। 26 अगस्त को 'कवच' का परीक्षण किया गया था।

मुख्य जनसंपर्क अधिकारी सुमित कुमार के अनुसार भारतीय रेल में ट्रेनों का सुरक्षित एवं संरक्षित परिचालन के लिए 'कवच' सिस्टम लगाने का कार्य प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है। इसीक्रम में पूर्वोत्तर रेलवे में 2,101 रूट किमी पर स्वदेशी रूप से विकसित 'कवच' लगाने का कार्य तेजी के साथ शुरू हो चुका है। इस कार्य को पूर्ण करने के लिए रेल मंत्रालय ने 787.21 करोड़ रुपये स्वीकृत किया है।

प्रथम चरण में 551 रूट किमी रेल खंड पर कवच लगाने का कार्य तेजी से किया जा रहा है, जिसमें से डोमिनगढ़-स्वामी नारायन छपिया (101.97 रूट किमी) रेल खंड पर स्टैंडर्ड ‘कवच‘ (स्वदेशी टक्कर निरोधी प्रणाली) की कमीशनिंग पूरी कर ली गई है। स्टैंडर्ड कवच के चालू होने से कवच लगे लोकोमोटिव में इन खंड के 14 ब्लाक सेक्शनों में आमने-सामने और पीछे से होने वाली टक्करों की घटनाओं को रोका जा सकेगा।

यह रेल खंड पूर्वाेत्तर रेलवे का पहला स्टैंडर्ड कवच युक्त रेल खंड है। कवच प्रणाली आवश्यकता पड़ने पर इंजनों में स्वचालित रूप से ब्रेक लग जाता है, ट्रेनों को अधिकतम अनुमन्य गति पर संरक्षित रूप से चलने में सक्षम बनाती है, परिचालन विश्वसनीयता में सुधार करती है, तथा घने कोहरे जैसी प्रतिकूल मौसम स्थितियों में भी संरक्षित ट्रेन संचलन में सहायता करती है।

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पूर्वोत्तर रेलवे के लखनऊ मंडल में यहां स्वीकृत है कवच का कार्य
लखनऊ जंक्शन-मानक नगर, लखनऊ जंक्शन-मल्हौर, बाराबंकी जंक्शन-बुढ़वल जंक्शन, सीतापुर सिटी-बुढ़वल जंक्शन एवं बुढ़वल जंक्शन-गोरखपुर कैंट और वाराणसी मंडल में गोरखपुर कैंट-गोल्डिनगंज, गोरखपुर कैंट-वाल्मीकिनगर रोड, भटनी जंक्शन-वाराणसी जंक्शन, वाराणसी जंक्शन-प्रयागराज जंक्शन एवं औंड़िहार जंक्शन-छपरा जंक्शन तथा इज्जतनगर मंडल में रावतपुर-फर्रूखाबाद जंक्शन, फर्रूखाबाद जंक्शन-कासगंज जंक्शन, कासगंज जंक्शन-मथुरा जंक्शन, कासगंज-इज्जतनगर, इज्जतनगर- काठगोदाम, लालकुआं-रामपुर, लालकुआं-काशीपुर, रामनगर-कटघर, भोजीपुरा-टनकपुर, पीलीभीत-शाहजहांपुर, पीलीभीत-मैलानी तथा मंधना जंक्शन-ब्रह्मावर्त रेल खंड।

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