नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन के लिए कारखाने में लगे 2500 से अधिक पौधे, 2029 तक रखा है लक्ष्य
गोरखपुर के यांत्रिक कारखाने ने 2029 तक नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य रखा है। इसके लिए 2,500 से अधिक पौधे लगाए गए हैं और 500 केडब्लूपी का सौर ऊर्ज ...और पढ़ें

यांत्रिक कारखाना गोरखपुर। जागरण
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन के लिए यांत्रिक कारखाना गोरखपुर में 2,500 से अधिक पौधे लगाए गए हैं। कारखाना परिसर में 500 केडब्लूपी क्षमता का सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किया जा रहा है, जबकि वर्तमान में 1,000 केडब्लूपी सौर ऊर्जा का उत्पादन हो रहा है।
इसे आगामी चरणों में लगभग 6,000 केडब्लूपी तक विस्तारित करने की योजना है। जल संरक्षण के लिए 100 प्रतिशत मीटरिंग, लीकेज नियंत्रण एवं स्काडा आधारित निगरानी प्रणाली लागू की जा रही है।
पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पंकज कुमार सिंह ने बताया कि ग्रीनहाउस गैस के आकलन के अनुसार यांत्रिक कारखाना में कार्यशाला की प्रक्रियाओं से वर्तमान में लगभग 72,000 टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन होता है, जिसमें स्कोप-1 के अन्तर्गत 70,000 टन तथा स्कोप-2 के अन्तर्गत 2,000 टन कार्बन डाइऑक्साइड सम्मिलित है।
इस आधार पर प्रमुख उत्सर्जन स्रोतों की पहचान कर उन्हें नियंत्रित करने हेतु ठोस रणनीति बनाई गई है। कारखाना प्रशासन ने कार्य योजना के अनुसार इन उत्सर्जनों को घटाकर लगभग 11,500 टन कार्बन डाइऑक्साइड तक सीमित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
दरअसल, पर्यावरण संरक्षण एवं सतत विकास पूर्वोत्तर रेलवे की प्राथमिकताओं में है। इसीक्रम में नेट- जीरो कार्बन उत्सर्जन के राष्ट्रीय लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए पूर्वोत्तर रेलवे के सभी प्रतिष्ठानों में ऊर्जा दक्षता, नवीकरणीय ऊर्जा एवं हरित प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
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महाप्रबन्धक, उदय बोरवणकर के मार्गदर्शन में यांत्रिक कारखाना, गोरखपुर में समन्वित एवं समयबद्ध प्रयासों के माध्यम से वर्ष 2029 तक नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य प्राप्त करने की ओर अग्रसर है। कार्बन न्यूट्रल बनने की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं।
औद्योगिक उत्कृष्टता के साथ पर्यावरणीय उत्तरदायित्व का संतुलन स्थापित करते हुए कारखाना प्रशासन ने एक चरणबद्ध एवं वैज्ञानिक कार्य योजना तैयार कर उसका क्रियान्वयन आरंभ कर दिया है।
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प्रत्यक्ष कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने के लिए गैस कटिंग प्रक्रियाओं में डीए गैस के स्थान पर एलपीजी एवं आक्सी-हाइड्रोजन तकनीक अपनाई जा रही है, इसके अतिरिक्त डीजल आधारित आंतरिक परिवहन साधनों को चरणबद्ध रूप से बैटरी चालित एवं बीएस-6 वाहनों से प्रतिस्थापित किया जा रहा है।
मुख्य कारखाना प्रबंधक डा. सुनील कुमार शर्मा के अनुसार कारखाना प्रशासन ऊर्जा दक्षता, संसाधन संरक्षण एवं हरित प्रबंधन को कार्य संस्कृति का अभिन्न अंग बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
यह पहल औद्योगिक विकास एवं पर्यावरण संरक्षण के संतुलन की दिशा में एक सकारात्मक कदम है, जो भारतीय रेल की हरित परिवर्तन यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।