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    गोरखपुर में शोर के बीच गूंजी भाई की किलकारी, बेटी का सुबह क्षत-विक्षत शव मिला; शाम को मां ने जना बेटा

    Updated: Fri, 31 Jul 2026 09:31 AM (IST)

    गोरखपुर में 10 वर्षीय बेटी का अपहरण के बाद क्षत-विक्षत शव मिलने से परिवार में गहरा शोक छा गया। इसी त्रासदीपूर्ण माहौल में, रात को मां ने ऑपरेशन से एक ...और पढ़ें

    तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

    तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

    HighLights

    1. 10 वर्षीय बेटी का अपहरण, क्षत-विक्षत शव मिलने से शोक।

    2. उसी दिन रात में, मां ने ऑपरेशन से बेटे को जन्म दिया।

    3. परिवार में शोक और नवजात के आगमन का विरोधाभास।

    जागरण संवाददाता, गोरखपुर। त्रासद मृत्यु का अपार शोक...कलेजा चीरता चीत्कार और झर-झर झरते आंसू। इसी माहौल में अभागी बहन के भाई का जन्म हुआ, तो किलकारी संताप के शोर में दब गई। अपहृत बेटी का सुबह क्षत-विक्षत शव मिलने की जानकारी से सुध-बुध खो बैठी लाचार मां ने निजी अस्पताल में रात 11:04 बजे ऑपरेशन से बेटा जना, तो हर कोई नियति को कोसने लगा। जिस भाई की कलाई पर राखी सजाने की आशा से बेचारी बहन दो दिन पहले तक चहकती थी, वह दहकती चिता में अधूरी चाहत लिए हमेशा के विदा हो चुकी है।

    आजमगढ़ के मूल निवासी ई-रिक्शा चालक युवक के घर पांच बेटियों के बाद फिर से खुशखबर आने वाली थी, लेकिन उनकी खुशियों को वर्दी में छिपे एक दरिंदे की नजर लग गई। 10 वर्षीय दूसरी बेटी का मंगलवार रात अपहरण हुआ, तो सिसकियों में खोया यह परिवार गुरुवार सुबह अंतहीन पीड़ा से चीत्कार पड़ा।

    इंसानियत को शर्मसार करती हैवानियत का प्रमाण बनी बिटिया निष्प्राण थी। राप्ती के राजघाट पर जब आंसुओं से भीगी सांझ में उसकी चिता सजाई जा रही थी, उसी दौरान निजी अस्पताल में मजबूर मां की हालत देख चिकित्सक उसे ऑपरेशन थियेटर में ले जाने की चर्चा कर रहे थे।

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    मासूम के असमय मरण पर माता-पिता ही नहीं, आमजन का भी अंत:करण रो रहा था। शोक-संताप के इसी हालात ने कुछ घंटे बाद जीवन का वरण किया। भाई की राह देख रही बहन ने हमेशा के लिए आंखें मूंद लीं, तो नियति ने उसे इस दुनिया में भेज दिया। तीन किलोग्राम का यह नवजात स्वस्थ है, लेकिन उसके आगमन पर हर्ष की जगह विषाद में डूबा परिवार मानों अभिशप्त है।

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