गोरखपुर बालिका हत्याकांड: पुलिस ने सामने रखीं 'खास तस्वीरें' तो कांप उठा बर्खास्त सिपाही, उगल दिया पूरा सच
बर्खास्त सिपाही अभिषेक यादव ने गोरखपुर बालिका हत्याकांड में पुलिस के तकनीकी और वैज्ञानिक साक्ष्यों के सामने सच कबूल कर लिया। शुरुआत में गुमराह करने के ...और पढ़ें

जिला अस्पताल में आरोपी की पिटाई। जागरण
HighLights
बर्खास्त सिपाही अभिषेक यादव ने सच कबूला।
पुलिस ने तकनीकी और वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए।
मोबाइल डेटा, सीसीटीवी फुटेज निर्णायक साबित हुए।
जागरण संवाददाता,गोरखपुर। बर्खास्त सिपाही अभिषेक यादव से सच उगलवाने के लिए पुलिस ने पारंपरिक पूछताछ के साथ तकनीकी और वैज्ञानिक साक्ष्य का सहारा लिया। 29 जुलाई की शाम करीब सात बजे हिरासत में लिए जाने के बाद आरोपित लगातार पुलिस को गुमराह करता रहा।
कभी उसने बाएं पैर में चोट लगने के कारण दवा लेने जिला अस्पताल जाने की बात कही तो कभी पूरी घटना से ही इन्कार करता रहा। लेकिन जैसे-जैसे डिजिटल और वैज्ञानिक साक्ष्य पुलिस के हाथ लगते गए, पूछताछ की दिशा बदलती गई और आखिरकार मामले की परतें खुलने लगीं।
हिरासत में लेने के बाद पुलिस ने सबसे पहले आरोपित का मोबाइल फोन कब्जे में लेकर उसकी डिजिटल जांच शुरू कराई। जांच के दौरान मोबाइल में आपत्तिजनक लिंक मिलने के साथ यह भी जानकारी मिली कि वह टेलीग्राम के जरिए एडल्ट वीडियो देखता था। इसके बाद साइबर टीम ने उसकी इंटरनेट हिस्ट्री, कॉल डिटेल, चैट और लोकेशन का विश्लेषण शुरू किया।
इसी दौरान सीसीटीवी कैमरों से उसके आने-जाने के रास्ते और समय का मिलान भी किया गया। अधिकारियों के अनुसार मोबाइल से मिले डिजिटल इनपुट ने पूछताछ को नई दिशा दी और आरोपी के शुरुआती दावों पर संदेह और गहरा हो गया। घंटों पूछताछ के बाद भी जब आरोपित सच बताने को तैयार नहीं हुआ तो पुलिस ने मनोवैज्ञानिक रणनीति अपनाई।
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उससे कहा गया कि यदि बच्ची की मौत किसी दुर्घटना में हुई है तो सच बता दे। इसके बाद उसने दावा किया कि बच्ची बाइक से गिर गई थी और उसी कारण उसकी मौत हुई। आरोपित के बताए अनुसार पुलिस उसे चिउटहा पुल के पास लेकर पहुंची, लेकिन सर्विलांस और मोबाइल लोकेशन पहले ही यह पुष्टि कर चुके थे कि घटना वाली रात वह उसी इलाके में गया था।
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घटनास्थल पर मिले साक्ष्य और उसकी कहानी में कोई सामंजस्य नहीं मिला। जब पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, लोकेशन और अन्य तकनीकी साक्ष्य उसके सामने रखे तो उसका बचाव कमजोर पड़ने लगा। इसी बीच पुलिस गाजीपुर से उसकी पत्नी और दो बच्चों को भी गोरखपुर लेकर आई और उन्हें महिला थाने में रखा गया।
पूछताछ के दौरान परिवार के विरुद्ध भी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई। लगातार बढ़ते तकनीकी साक्ष्य, फोरेंसिक रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज, सर्विलांस और इलेक्ट्रानिक प्रमाणों के दबाव में आखिरकार आरोपित का बयान बदल गया। हथियार की बरामदगी और अन्य साक्ष्य जुटाने के लिए पुलिस रिमांड लेने की तैयारी भी की जा रही है।