गोरखपुर जेल से बंदी फरार होने पर बड़ी कार्रवाई, सुरक्षा व्यवस्था की होगी गहन पड़ताल
दुष्कर्म के आरोपित बंदी विपिन कुमार के गोरखपुर जिला कारागार से फरार होने के बाद महानिदेशक कारागार ने सख्त कार्रवाई की है। एक जेलर समेत पांच निलंबित हु ...और पढ़ें

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण
HighLights
बंदी विपिन कुमार के फरार होने पर सख्त कार्रवाई।
जेलर, हेड वार्डर निलंबित; अधीक्षक पर विभागीय कार्रवाई।
जेल की सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी तंत्र की समीक्षा।
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। दुष्कर्म और अपहरण के आरोपित बंदी विपिन कुमार के जिला कारागार से फरार होने के मामले में महानिदेशक कारागार पी.सी. मीणा की कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि सुरक्षा में चूक को लेकर किसी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
एक जेलर, दो हेड जेल वार्डर और दो जेल वार्डरों के निलंबन के साथ ही जेल अधीक्षक के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की संस्तुति के बाद अब पूरा फोकस इस बात पर है कि आखिर प्रदेश की संवेदनशील जेलों में शामिल गोरखपुर जिला कारागार में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई। विभागीय कार्रवाई के बाद अब जेल की सुरक्षा व्यवस्था, निगरानी तंत्र और ड्यूटी सिस्टम की व्यापक समीक्षा शुरू हो गई है।
प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि बंदी जिस स्थान से पेड़ के सहारे 20 फीट ऊंची दीवार फांदकर भागा, वह सीसीटीवी कैमरों की प्रभावी निगरानी से बाहर था। अब जेल परिसर के सभी ब्लाइंड स्पाट चिह्नित किए जा रहे हैं। कैमरों की स्थिति, उनकी कवरेज, निगरानी व्यवस्था और कंट्रोल रूम की कार्यप्रणाली की भी समीक्षा होगी। अधिकारियों का मानना है कि केवल कैमरे लगाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि हर संवेदनशील हिस्से पर प्रभावी निगरानी भी सुनिश्चित करनी होगी।
यह भी पढ़ें- गोरखपुर में फरार बंदी मामला: तीन घंटे तक जेल के चप्पे-चप्पे की तलाशी, फिर अधिकारियों को दी गई सूचना
पुरानी घटनाओं से नहीं ली सीख
जिला कारागार पहले भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवालों में रही है। वर्ष 2016 में बंदियों ने जेलकर्मियों पर हमला कर फरार होने का प्रयास किया था, जबकि 2019 में भी ऐसी कोशिश सामने आई थी। उन घटनाओं के बाद सुरक्षा मजबूत करने के दावे किए गए थे, लेकिन विपिन कुमार की फरारी ने एक बार फिर उन व्यवस्थाओं की पोल खोल दी।
खबरें और भी
अब विभागीय कार्रवाई के बाद जेल प्रशासन पर सुरक्षा मानकों में व्यापक सुधार का दबाव बढ़ गया है। अधिकारियों का कहना है कि ड्यूटी प्रणाली, बंदियों की निगरानी, खेत में कार्य कराने की व्यवस्था और इलेक्ट्रानिक सर्विलांस को नए सिरे से व्यवस्थित किया जाएगा, ताकि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो सके।