गोरखपुर में 233 गांवों के लिए राहत, दो साल बाद GDA के विस्तारित क्षेत्रों में नक्शा पास करने को हरी झंडी
गोरखपुर विकास प्राधिकरण के विस्तारित क्षेत्रों में अब भवन मानचित्रों की स्वीकृति का रास्ता खुल गया है। पिपराइच, पीपीगंज समेत ...और पढ़ें

गोरखपुर विकास प्राधिकरण। जागरण
HighLights
जीडीए विस्तारित क्षेत्र में मानचित्र स्वीकृति शुरू हुई।
पिपराइच, पीपीगंज सहित 233 गांवों को लाभ।
छह माह में 177 वर्ग किमी की महायोजना बनेगी।
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) के विस्तारित क्षेत्र में रहने वाले लाखों लोगों की बड़ी मुश्किल अब दूर होने जा रही है। महायोजना लागू नहीं होने के कारण वर्षों से भवनों के मानचित्र स्वीकृत न होने की समस्या का समाधान निकल आया है। जीडीए बोर्ड ने शासन की ओर से जारी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) को अंगीकृत कर लिया है, जिसके बाद विस्तारित क्षेत्र में महायोजना तैयार होने से पहले भी मानचित्र स्वीकृत किए जा सकेंगे। इसके साथ ही दो साल से लटकी 177 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र की महायोजना को भी छह माह के भीतर तैयार कराकर शासन से अनुमोदित कराना अनिवार्य होगा।
इस फैसले का सबसे बड़ा लाभ पिपराइच, पीपीगंज और मुंडेरा बाजार नगर पंचायतों सहित 233 नए राजस्व गांवों के लोगों को मिलेगा। इन क्षेत्रों में अब तक महायोजना प्रभावी न होने के कारण भवन निर्माण के लिए मानचित्र स्वीकृति नहीं मिल पा रही थी। नई व्यवस्था लागू होने के बाद यहां नियमानुसार निर्माण की अनुमति लेने का रास्ता खुल जाएगा।
22 दिसंबर 2020 की अधिसूचना के बाद गोरखपुर विकास प्राधिकरण के विकास क्षेत्र का विस्तार किया गया था। वर्तमान में जीडीए का कुल क्षेत्रफल करीब 642 वर्ग किलोमीटर है। इसमें 465 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र के लिए जीआइएस आधारित गोरखपुर महायोजना-2031 (पुनरीक्षित) को शासन ने जनवरी 2024 में मंजूरी दे दी थी। हालांकि, शेष 177 वर्ग किलोमीटर विस्तारित क्षेत्र की महायोजना अब तक तैयार नहीं हो सकी है। इसके लिए कंसल्टेंट के चयन की प्रक्रिया चल रही है।
शासन की एसओपी में मानचित्र स्वीकृति की सुविधा के साथ महायोजना तैयार करने की समयसीमा भी तय कर दी गई है। जीडीए को छह माह के भीतर विस्तारित क्षेत्र की महायोजना तैयार कराकर उसका अनुमोदन कराना होगा। इस अवधि में स्वीकृत किए गए मानचित्रों को तैयार होने वाली महायोजना में यथासंभव समायोजित किया जाएगा।
नगर पंचायत क्षेत्रों में प्रधान गतिविधि के अनुरूप संगत उपयोग वाले मानचित्रों पर गुण-दोष के आधार पर विचार किया जाएगा। कृषि क्षेत्र में भवन निर्माण एवं विकास उपविधि तथा जोनिंग रेगुलेशन्स-2025 के प्रविधान लागू होंगे।
इस तरह की जमीनों पर नहीं पास होगा नक्शा
सभी जमीनों पर निर्माण की अनुमति नहीं मिलेगी। राजस्व अभिलेखों में जलाशय, वाटर बाडी, बंजर भूमि, वन, श्मशान और कब्रिस्तान के रूप में दर्ज भूमि पर निर्माण प्रतिबंधित रहेगा। नगर पंचायत और नगर पालिका क्षेत्रों में जल एवं वायु प्रदूषण या हैजार्डस वेस्ट उत्पन्न करने वाली संकटमय औद्योगिक इकाइयों के मानचित्र भी स्वीकृत नहीं होंगे।
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जहां सड़कें चौड़ी नहीं, वहां शर्त के साथ निर्माण को मंजूरी
जिन इलाकों में सड़कें पर्याप्त चौड़ी नहीं हैं, वहां प्रस्तावित मार्ग की मध्य रेखा से दोनों ओर आवश्यक सड़क चौड़ीकरण के लिए जमीन छोड़ने की शर्त पर निर्माण की अनुमति दी जा सकेगी। इस तरह नक्शा स्वीकृति की नई सुविधा न केवल लोगों को तत्काल राहत देगी, बल्कि वर्षों से लंबित विस्तारित क्षेत्र की महायोजना को भी तय छह माह की समयसीमा में पूरा करने का रास्ता साफ करेगी।
