गोरखपुर फर्जी कॉल सेंटर: ब्रिटेन के नागरिकों से ठगी, ईडी ने कुर्क की संपत्ति
गोरखपुर के बेतियाहाता में एक फर्जी कॉल सेंटर ब्रिटेन के नागरिकों को ठगता था, जिसमें इंटरनेट सेवा प्रदाता और साइबर ...और पढ़ें

यह तस्वीर AI द्वारा बनाई गई है।
HighLights
गोरखपुर का फर्जी कॉल सेंटर ब्रिटेन के नागरिकों को ठगता था।
इंटरनेट गति, साइबर सुरक्षा बहाने से करते थे ठगी।
ईडी ने मुख्य आरोपी अनिक दत्ता की संपत्ति कुर्क की।
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। ब्रिटेन में सुबह होते ही गोरखपुर के बेतियाहाता स्थित फर्जी काल सेंटर में ठगी का खेल शुरू हो जाता था। भारत और ब्रिटेन के समय में साढ़े चार घंटे का अंतर होने के कारण वहां सुबह 8:30 बजे के बाद यहां दोपहर करीब एक बजे कार्यालय खुलता था।
इसके बाद कर्मचारियों को ब्रिटेन के नागरिकों के मोबाइल नंबरों की सूची देकर फोन करने का लक्ष्य दिया जाता था। गिरोह के सदस्य इंटरनेट की गति बढ़ाने और साइबर अपराध से बचाने का झांसा देकर लोगों को अपने जाल में फंसाते थे।
साइबर सेल की जांच में सामने आया था कि बेतियाहाता में स्थित काल सेंटर पर ठगी के लिए एक व्यक्ति से अलग-अलग चरणों में तीन बार संपर्क किया जाता था। पहली बार ब्रिटेन की इंटरनेट सेवा प्रदाता कंपनी ओपनरीच का प्रतिनिधि बनकर फोन किया जाता। इंटरनेट की गति कम होने की बात कहकर उसकी जांच करने का भरोसा दिया जाता था।
यदि कोई उपभोक्ता तैयार हो जाता तो उसकी बात काल सेंटर के सुपरवाइजर से करा दी जाती थी। सुपरवाइजर विदेशी नाम बताकर बातचीत करता और इंटरनेट की समस्या दूर करने का भरोसा देता था। कुछ देर बाद उसी व्यक्ति को दूसरी बार फोन किया जाता। इस बार फोन करने वाला खुद को वीपीएन कंपनी का कर्मचारी बताता था।
इंटरनेट कनेक्शन की सुरक्षा जांचने के बहाने उपभोक्ता का भरोसा जीता जाता। इसके बाद तीसरी बार फोन कर खुद को ब्रिटेन की राष्ट्रीय अपराध एजेंसी या एंटी फ्राड स्क्वाड का अधिकारी बताया जाता था। उपभोक्ता को कहा जाता कि उसके इंटरनेट कनेक्शन पर साइबर हमला हुआ है और उसके बैंक खाते से जुड़ी धोखाधड़ी की जांच चल रही है।
कथित अपराधी को पकड़ने का झांसा देकर पीड़ित पर रुपये दूसरे बैंक खाते में स्थानांतरित करने का दबाव बनाया जाता था। पुलिस के अनुसार, लंदन में रहने वाले गिरोह के सहयोगी जुनैद और अश्वनी ब्रिटेन की इंटरनेट सेवा प्रदाता कंपनी के उपभोक्ताओं के मोबाइल नंबर और बैंक खातों से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराते थे।
कोलकाता में बैठे सहयोगी यह जानकारी गोरखपुर के कॉल सेंटर तक पहुंचाते थे। पीड़ित के झांसे में आने पर उससे रकम स्थानांतरित करा ली जाती थी। इसके बाद धन को अंतरराष्ट्रीय मनी ट्रांसफर सेवाओं के जरिये निकालने या दूसरे खातों तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाती थी। कार्यालय में काम करने वाले करीब 25 कर्मचारियों के मोबाइल फोन ड्यूटी के दौरान रिसेप्शन पर जमा करा लिए जाते थे। रात नौ बजे काम खत्म होने पर उन्हें फोन वापस मिलते थे।
कर्मचारियों के सामने एक सप्ताह में करीब 10 हजार मोबाइल नंबरों पर संपर्क करने का लक्ष्य रखा गया था। पुलिस को गिरोह की जानकारी काल सेंटर में काम करने वाले एक युवक से मिली थी। इसके बाद करीब तीन महीने तक निगरानी और जांच की गई।
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आरोपों की पुष्टि होने पर 17 अगस्त 2023 को साइबर थाना पुलिस और क्राइम ब्रांच ने छापा मारकर गिरोह का पर्दाफाश करने के साथ ही आठ आरोपितों को गिरफ्तार किया था। अब इसी मामले में ईडी ने मुख्य आरोपित अनिक दत्ता की 3.72 करोड़ रुपये की संपत्ति अस्थायी रूप से अटैच की है।
