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गोरखपुर आयुष विश्वविद्यालय बनेगा इंटीग्रेटेड हेल्थ हब, मिलेगी टेलीमेडिसिन और टीकाकरण सुविधा

Published: Sat, 30 May 2026 12:54 PM (IST)

महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय एक एकीकृत स्वास्थ्य केंद्र बनने की दिशा में अग्रसर है। यहां जल्द ही टेलीमेडिसिन से ...और पढ़ें

महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय। जागरण

महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय। जागरण

HighLights

  1. टेलीमेडिसिन से कैंसर विशेषज्ञों से परामर्श की सुविधा।

  2. गर्भवती महिलाओं और नवजातों के लिए टीकाकरण सेवाएं।

  3. आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा का समन्वय होगा।

जागरण संवाददाता, गोरखपुर। महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय इंटीग्रेटेड हेल्थ हब (एकीकृत स्वास्थ्य सेवाओं का केंद्र) बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। विश्वविद्यालय में जल्द ही टेलीमेडिसिन, कैंसर स्क्रीनिंग और नियमित टीकाकरण जैसी आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं शुरू की जाएंगी। इससे ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर रोगियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

प्रदेश के आयुष मंत्री डाक्टर दयाशंकर मिश्र दयालु के निर्देश पर विश्वविद्यालय में काशी हिंदू विश्वविद्यालय की तर्ज पर स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ किया जा रहा है। उन्होंने गायनिक ओपीडी के संचालन का भी निर्देश दिया है।

कुलपति डाक्टर के. रामचंद्र रेड्डी ने बताया कि आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा पद्धति के समन्वय से बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराना विश्वविद्यालय का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि ओपीडी में आने वाले रोगियों की प्रारंभिक जांच के दौरान यदि कैंसर के लक्षण मिलते हैं, तो उन्हें तत्काल टेलीमेडिसिन कक्ष में भेजा जाएगा। वहां वीडियो काल के माध्यम से देश के विशेषज्ञ आन्कोलाजिस्ट से परामर्श कराया जाएगा।

गांठ, लगातार खांसी, वजन घटना या मुंह का घाव लंबे समय तक न भरने जैसे लक्षण मिलने पर रोगियों की तत्काल स्क्रीनिंग होगी। आवश्यकता पड़ने पर एक सप्ताह के भीतर बायोप्सी या फिर उच्च संस्थान में रेफर करने की व्यवस्था भी की जाएगी।

विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि कैंसर की पहचान पहले या दूसरे चरण में होने पर रोगी के बचाव की संभावना काफी बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि आधुनिक जांच और उपचार के साथ आयुर्वेदिक सहायक चिकित्सा को भी जोड़ा जाएगा। कीमोथेरेपी और रेडियो थेरेपी के दुष्प्रभाव कम करने के लिए शतावरी, गिलोय और यशद भस्म जैसी आयुर्वेदिक औषधियों का उपयोग किया जाएगा। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता और मानसिक स्थिति बेहतर रखने में सहायता मिलेगी।

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गर्भवती महिलाओं और नवजातों की बढ़ेगी सुविधा
विश्वविद्यालय में गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं, किशोरियों और नवजात शिशुओं के नियमित टीकाकरण की व्यवस्था भी शुरू की जा रही है। गर्भवती महिलाओं को एंटीनेटल जांच के साथ टिटनेस टाक्साइड का टीका आयुष ओपीडी में ही लगाया जाएगा।

नवजात को जन्म के समय बीसीजी और हेपेटाइटिस-बी सहित आवश्यक टीके भी विश्वविद्यालय परिसर में ही उपलब्ध होंगे। इसके बाद 45 दिन पर लगने वाले पेंटावेलेंट(डिप्थीरिया, टिटनेस, पर्टुसिस - काली खांसी, हेपेटाइटिस बी और हीमोफिलस इन्फ्लुएंजा टाइप बी - हिब से एक साथ सुरक्षा) टीके भी लगेंगे।। 10 से 19 वर्ष आयु वर्ग की किशोरियों को रुबेला और टीडी के टीके लगाए जाएंगे। साथ ही एनीमिया से बचाव के लिए आयुर्वेदिक औषधियां भी दी जाएंगी।

इन सेवाओं के संचालन के लिए स्वास्थ्य विभाग के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। इसके तहत मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय से वैक्सीन उपलब्ध कराई जाएगी और एएनएम की प्रतिनियुक्ति भी की जाएगी।