बिजली बिल बना रहेगा एड्रेस प्रूफ, नाम-पता छिपाने का फैसला UPPCL ने लिया वापस; गाजियाबाद-नोएडा के लोगों को राहत
बिजली विभाग ने गाजियाबाद और नोएडा समेत पश्चिमी यूपी के उपभोक्ताओं के लिए बिलों में नाम-पता छिपाने का फैसला वापस ले लिया है, जिससे अब बिजली बिल फिर से ...और पढ़ें

अब पहले की तरह बिजली के बिल में उपभोक्ता का नाम पूरा छापकर दिया जा रहा है। एआई इमेज
HighLights
बिजली बिलों पर नाम-पता छिपाने का फैसला UPPCL ने वापस लिया।
गाजियाबाद-नोएडा सहित पश्चिमी यूपी के लाखों उपभोक्ताओं को मिली राहत।
अब बिजली बिल फिर से एड्रेस प्रूफ के रूप में मान्य।
डिजिटल डेस्क, गाजियाबाद/नोएडा।गाजियाबाद और नोएडा समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लाखों बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है। उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL/यूपीपीसीएल) ने बिलों में नाम और पता आंशिक रूप से छिपाने वाला अपना फैसला वापस ले लिया है। अब अगस्त के बिलों में फिर से पूरा नाम और पता साफ-साफ छपने लगा है। इससे बिजली बिल को एड्रेस प्रूफ के तौर पर पेश न कर पाने की समस्या का समाधान हो गया है। हालांकि, कुछ समस्याएं अब भी बरकरार हैं।
पिछले महीने अचानक शुरू हुई थी समस्या
बीते महीने पावर कॉरपोरेशन ने बिलिंग सॉफ्टवेयर में बदलाव कर नाम और पते के कई अक्षरों की जगह ‘एक्स’ लिखना शुरू कर दिया था। इससे गाजियाबाद और नोएडा के उन उपभोक्ताओं को खास परेशानी हुई जो बिजली बिल को पते के दस्तावेज के रूप में इस्तेमाल करते हैं। आधार, बैंक, पासपोर्ट या गैस कनेक्शन जैसे कामों में यह बिल महत्वपूर्ण साबित होता है।
उपभोक्ता परिषद ने दर्ज कराई थी आपत्ति
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने इस बदलाव को विद्युत वितरण संहिता के खिलाफ बताया और नियामक आयोग तथा पावर कॉरपोरेशन के अधिकारियों के पास आपत्ति दर्ज कराई। परिषद का कहना था कि बिल सिर्फ भुगतान का दस्तावेज नहीं, बल्कि सरकारी कामकाज में पते का प्रमाण भी है। विरोध के बाद विभाग को अपना फैसला वापस लेना पड़ा।
बिना अनुमति के लागू किया गया था बदलाव
सूत्रों के अनुसार, नाम-पता छिपाने की व्यवस्था शुरू करने से पहले पावर कॉरपोरेशन ने नियामक आयोग से अनुमति नहीं ली थी। मकसद उपभोक्ताओं की निजता की रक्षा बताई गई थी, लेकिन व्यावहारिक दिक्कतों पर ध्यान नहीं दिया गया। विरोध बढ़ने पर सॉफ्टवेयर फिर से पुरानी व्यवस्था पर लौटा दिया गया।
खबरें और भी
आरडीएसएस योजना पर भी उठ रहे सवाल
इस बीच केंद्र की रिवैंप डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (आरडीएसएस) में हजारों करोड़ खर्च के बावजूद गाजियाबाद-नोएडा समेत पूरे प्रदेश में बिजली सेवाओं में अपेक्षित सुधार नहीं दिख रहा। स्मार्ट मीटर लगाने और नेटवर्क सुधार के दावों के बावजूद कई उपभोक्ताओं को नियमित बिल नहीं मिल पा रहे और शिकायत निस्तारण में देरी हो रही है।
जवाबदेही तय करने की मांग
उपभोक्ता परिषद ने मांग की है कि इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बाद भी सेवा में सुधार न होने पर निचले स्तर से लेकर शीर्ष अधिकारियों तक जवाबदेही तय की जाए। गाजियाबाद और नोएडा जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में बेहतर बिलिंग और तेज शिकायत निस्तारण की जरूरत और भी ज्यादा है।