'भारत प्रोटेक्टिव टेक्सटाइल का निर्यातक बन चुका है', 2030 तक 350 अरब डॉलर का उद्योग लक्ष्य
केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने गाजियाबाद में प्रोटेक्टिव टेक्सटाइल सम्मेलन में कहा कि भारत अब इसका निर्यातक बन गया है, जिसका वैश्विक बाजार में ...और पढ़ें
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केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने गाजियाबाद में प्रोटेक्टिव टेक्सटाइल सम्मेलन में कहा कि भारत अब इसका निर्यातक बन गया है। जागरण
HighLights
भारत अब प्रोटेक्टिव टेक्सटाइल का निर्यातक, पहले होता था आयात।
मिल्कवीड फाइबर -30 डिग्री में भी शरीर को गर्म रखता है।
2030 तक टेक्सटाइल उद्योग 350 अरब डॉलर पहुंचाने का लक्ष्य।
जागरण संवाददाता, गाजियाबाद। निटरा (नार्थ इंडिया टेक्सटाइल रिसर्च एसोसिएशन) में आयोजित प्रोटेक्टिव टेक्सटाइल पर राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि एक समय भारत प्रोटेक्टिव टेक्सटाइल का आयात करता था, लेकिन अब भारत देश निर्यातक बन चुका है।
वैश्विक स्तर पर करीब 40 अरब डॉलर का प्रोटेक्टिव टेक्सटाइल बाजार है, जिसमें भारत की हिस्सेदारी सात प्रतिशत है और इसमें से चार प्रतिशत निर्यात किया हो रहा है। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक टेक्सटाइल उद्योग को 350 अरब डालर तक पहुंचाने और 100 अरब डॉलर का निर्यात करने का है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि 2014 से 2025 के बीच टेक्सटाइल सेक्टर में करीब पांच करोड़ लोगों को रोजगार मिला है। देश में दो लाख से अधिक स्टार्टअप शुरू हुए हैं, जो आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम है। सम्मेलन में मंत्री ने प्राकृतिक फाइबर और नवाचारों पर विशेष जोर दिया।
देश में पहली बार मिल्कवीड फाइबर पर गंभीर शोध किया गया है, जो माइनस 30 डिग्री तापमान में भी शरीर को गर्म रखने की क्षमता रखता है। उन्होंने बताया कि पराली से फाइबर निकालने के लिए मैकेनिकल आटोमेशन मशीन विकसित की गई है, जिससे 25 से 30 प्रतिशत तक फाइबर प्राप्त हो रहा है और आगे और बेहतर परिणाम मिलने की उम्मीद है।
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निटरा महानिदेशक के साथ उन्होंने सीआरपीएफ के डीआइजी शाहनवाज खान को मिल्कवीड फाइबर से तैयार स्लिपिंग बैग प्रदान किया। इस दौरान भारत का हरा सोना पुस्तक का विमोचन किया गया। सम्मेलन में विशेषज्ञों ने प्रोटेक्टिव टेक्सटाइल, प्राकृतिक फाइबर और टेक्नोलाजी आधारित नवाचारों पर शोध प्रस्तुत किए। वस्त्र मंत्रालय संयुक्त सचिव मनीषा चटर्जी के अलावा टेक्सटाइल उद्यमी संदीप वोहरा, विदित जैन ने भी विचार रखे।
मिल्कवीड पौधे के तने, फूल और पत्तों से बना फाइबर
निटरा के महानिदेशक डा. एमएस परमार ने बताया कि मिल्कवीड की खेती करने वाले किसानों को अप्रत्याशित लाभ होगा। इसकी फसल लगाने के बाद फसल को पानी, खाद और कीटनाशक की कुछ खास जरूरत नहीं होती। इसे एक बार खेत में लगाने के बाद यह 10 वर्ष तक फसल देता है। किसान को मिल्कवीड के फूल, पत्ते से तने तक से फाइबर मिलता है। एक एकड़ मिल्कवीड की खेती से किसान को डेढ़ से दो लाख रुपये की आमदनी होती है।
एमओयू भी हुए साइन
उड़ीसा के एक एनजीओ के साथ निटरा का एमओयू हुआ है, जिसके तहत 50 एकड़ क्षेत्र में मिल्कवीड की खेती की जाएगी। इससे अनुमानित 50 टन फाइबर उत्पादन की उम्मीद है। मिल्कवीड के एक बार रोपण से करीब 10 साल तक फसल होगी और प्रति एकड़ डेढ़ से दो लाख रुपये तक की आय संभव है। फूल, पत्ते और तने तक से फाइबर का उपयोग किया जाएगा।
मिल्कवीड फ्लास एंड सीड सेपरेटर मशीन का लोकार्पण
निटरा ने मिल्कवीड फ्लास एंड सीड सेपरेटर मशीन तैयार की है, जो मिल्कवीड (आक) के रेशे और बीज अलग करने करेगी। इस मशीन का लोकार्पण केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरीराज सिंह ने किया। यह मशीन मिल्कवीड की खेती वाले क्षेत्रों में यह मशीन बेहद उपयोगी साबित होगी। उन्होंने प्राकृतिक फाइबर से तैयार उत्पाद व प्रोटेक्टिव टेक्सटाइल के उत्पादों का अवलोकन किया।
रुमा देवी ने सुनाई अत्मनिर्भरता की कथा
राजस्थान की रूमा देवी सम्मेलन में पहुंची, जिन्होंने अपनी आत्मकथा को लोगों के सामने सुनाया। उन्होंने बताया कि बचपन में मां को खोया और कम उम्र उनका विवाह कर दिया गया। उन्होंने परिस्थितियों से हार न मानते हुए 2008 में हस्तशिल्प से ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया। उनके प्रयासों से स्थानीय कला वैश्विक मंच तक पहुंची। नारी शक्ति पुरस्कार समेत कई सम्मान मिले। अब वे मिल्कवीड से फाइबर बनाकर सैनिकों व ग्रामीण रोजगार के लिए नवाचार कर रही हैं।
एनटीटीएम के तहत 50 लाख तक की मिल रही धनराशि
सरकार की ओर से नेशनल टेक्निकल टेक्सटाइल मिशन के तहत नए स्टार्टअप्स को 50 लाख रुपये तक की नान रिफंडेबल धनराशि दी जा रही है। एनटीटीएम के निदेशक अशोक मल्होत्रा ने बताया कि 18 महीनों में उद्यमी को केवल लगभग पांच लाख रुपये खर्च करने होते हैं, जबकि बाकी खर्च सरकार और इनक्यूबेशन सेंटर उठाते हैं।
इससे नए उद्यमियों को कम जोखिम में व्यवसाय शुरू करने और प्रशिक्षण सुविधाओं का लाभ मिलता है। यह योजना उद्योग की समस्याओं के समाधान, कौशल विकास और किसानों के लिए उन्नत तकनीकों को बढ़ावा देती है।
विशेषज्ञों ने की फाइबर का इतिहास पर चर्चा
टेक्निकल टेक्सटाइल क्षेत्र के विशेषज्ञों की पैनल चर्चा हुई, जिसमें सुरक्षात्मक कपड़ों का सिंगल फाइबर से शुरू होकर फाइबर ब्लेंडिंग और अब मटेरियल सर्कुलैरिटी व रिसाइकिलिंग तक पहुंचा है।
बैलिस्टिक और पैराशूट फैब्रिक में हल्के व मजबूत मटेरियल के महत्व के साथ भारत में कच्चे माल के आयात, रिसर्च और जागरूकता की कमी को बड़ी चुनौती बताया। भविष्य में प्राकृतिक फाइबर, थ्री डी व पालीमर तकनीक और इस टेक्सटाइल उद्योग से संबंधित मानकों को मजबूत करना जरूरी है।
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