गाजियाबाद: 2.30 लाख उपभोक्ताओं को परेशान कर रहे स्मार्ट मीटर, रिचार्ज के बाद अंधेरे में बैठने को मजबूर
गाजियाबाद में लगाए गए प्रीपेड स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं के लिए परेशानी का सबब बन गए हैं। 2.30 लाख से अधिक उपभोक्ता तकनीकी खामियों, रिचार्ज के बाद भी बिज ...और पढ़ें

गाजियाबाद में लगाए गए प्रीपेड स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं के लिए परेशानी का सबब बन गए हैं।
लक्ष्य चौधरी, गाजियाबाद। रीयल-टाइम डाटा, सटीक बिलिंग और सुविधा के दावों के साथ घरों में लगाए गए प्रीपेड स्मार्ट मीटर अब बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं के लिए परेशानी का कारण बनते दिख रहे हैं। जिले में 2.80 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, जिनमें से करीब 80 प्रतिशत प्रीपेड प्रणाली में बदले जा चुके हैं।
यानी 2.30 लाख से अधिक उपभोक्ता इस व्यवस्था पर निर्भर हैं। लेकिन तकनीकी खामियां, जानकारी का अभाव और सिस्टम की सुस्ती लोगों को अंधेरे में बैठने पर मजबूर कर रही है। इन्हीं जमीनी समस्याओं को लेकर दैनिक जागरण ने विशेष अभियान शुरू किया है। पहली कड़ी में उपभोक्ताओं की उन्हीं रोजमर्रा की परेशानियों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत है, जिनसे उपभोक्ता रोज जूझ रहे हैं।
समस्या- 1: बैलेंस शून्य होते ही आपूर्ति बंद, रिचार्ज के बाद भी लंबा इंतजार
प्रीपेड मीटर में बैलेंस शून्य या निगेटिव होते ही बिजली स्वचलित कट जाती है। उपभोक्ता तुरंत मोबाइल ऐप या आनलाइन माध्यम से रिचार्ज करता है। पेमेंट सफल दिखता है, बैंक से पैसा कट जाता है, रसीद भी मिल जाती है, लेकिन बिजली तुरंत बहाल नहीं होती। कई उपभोक्ता बताते हैं कि कई घंटों तक घर अंधेरे में रहा। रात के समय यह परेशानी और गंभीर हो जाती है।
समस्या-2: रिचार्ज की रकम सर्वर से मीटर तक पहुंचने में देरी
रिचार्ज की प्रक्रिया कई तकनीकी चरणों से गुजरती है पेमेंट गेटवे, केंद्रीय सर्वर, आरएमएस, एमडीएम और अंत में मीटर। किसी भी स्तर पर डाटा अटकते ही मीटर तक बैलेंस अपडेट नहीं पहुंचता। सर्वर पर लोड और डाटा कतार के कारण यह प्रक्रिया रीयल-टाइम नहीं रह गई है। जब तक आरएमएस पर एंट्री अपडेट नहीं होती, मीटर रिचार्ज को पहचान ही नहीं पाता।
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समस्या-3: बिजली नहीं, फिर भी बैलेंस कटने के मैसेज
कई उपभोक्ताओं ने शिकायत की कि घर में बिजली आपूर्ति बंद है, फिर भी मोबाइल पर बैलेंस घटने के संदेश मिलते रहे। इससे लोगों को यह समझ नहीं आता कि जब खपत नहीं हो रही तो बैलेंस कैसे कम हो रहा है। इससे व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
समस्या-4: रिचार्ज और बैलेंस प्रबंधन की जानकारी का अभाव
अधिकांश उपभोक्ताओं को यह स्पष्ट नहीं है कि मीटर में बैलेंस कैसे डाला जाए, नेगेटिव बैलेंस को पाजिटिव कैसे किया जाए, और बैलेंस खत्म होने से पहले चेतावनी कैसे मिले। बुजुर्ग और ग्रामीण उपभोक्ता मोबाइल ऐप और आनलाइन प्रक्रिया को समझने में असहज हैं। न तो मीटर लगाते समय पर्याप्त जानकारी दी गई और न बाद में कोई जागरूकता अभियान चला।
समस्या 5: हेल्पलाइन और शिकायत प्रणाली बेअसर
रिचार्ज के बाद बिजली न आने पर उपभोक्ता हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराते हैं। वहां से एक ही जवाब मिलता है सिस्टम अपडेट होने का इंतजार करें। कई बार शिकायत दर्ज होने के बाद भी समाधान में घंटों लग जाते हैं। इससे उपभोक्ताओं में असंतोष बढ़ रहा है।
स्मार्ट प्रीपेड मीटर व्यवस्था उपभोक्ताओं को पारदर्शी और नियंत्रणयुक्त सुविधा देने के लिए लागू की गई है। शुरुआती दौर में तकनीकी चुनौतियों आती हैं, जिन्हें तेजी से दूर किया जा रहा है। सर्वर पर अभी हाल हीं में मेंटेनेंस कार्य भी किया गया था, जिससे रिचार्ज के तुरंत बाद आपूर्ति बहाल कर होगी और उपभोक्ताओं को बेहतर अनुभव मिलेगा।