बैडमिंटन हॉल, जिम और स्विमिंग पूल फिर खुले; गाजियाबाद के महामाया स्टेडियम में सिंथेटिक ट्रैक का निर्माण शुरू
गाजियाबाद के महामाया स्टेडियम में खिलाड़ियों के लिए सुविधाओं का विस्तार हुआ है, जहां बैडमिंटन हॉल, तरणताल और जिम फिर ...और पढ़ें
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महामाया स्टेडियम स्थित जिम में अभ्यास करते हुए खिलाड़ी। जागरण
HighLights
बैडमिंटन हॉल, तरणताल, जिम खिलाड़ियों के लिए फिर से खुले।
सिंथेटिक ट्रैक, बाउंड्रीवॉल का निर्माण कार्य शुरू हुआ।
खिलाड़ियों को पहचान पत्र से प्रवेश, कोच की बायोमेट्रिक उपस्थिति।
जागरण संवाददाता, गाजियाबाद। गाजियाबाद में महामाया स्टेडियम में लंबे समय से संसाधनों और सुविधाओं की कमी से जूझ रहे खिलाड़ियों को अब बेहतर खेल माहौल देने की दिशा में काम तेज हुआ है।
जीर्णोद्धार के बाद बंद चल रहे बैडमिंटन हॉल, तरणताल और जिम को फिर से खिलाड़ियों के लिए खोल दिया गया। इससे प्रशिक्षण के साथ फिटनेस और इनडोर खेलों के खिलाड़ियों को भी राहत मिली है।
स्टेडियम में सिंथेटिक ट्रैक और बाउंड्रीवाल का निर्माण भी शुरू हो गया है। ट्रैक बनने के बाद एथलेटिक्स खिलाड़ियों को अभ्यास के लिए आधुनिक सुविधा मिलेगी।

वहीं, मैदान और अन्य संसाधनों की सुरक्षा के लिहाज से बाउंड्रीवाल का निर्माण महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब बाहरी लोगों की स्टेडियम में एंट्री पर बैन लगा है। खिलाड़ियों के पहचान पत्र से एंट्री दी जा रही है।
इससे नियमित खिलाड़ियों का रिकार्ड व्यवस्थित करने के साथ ही खेल प्रशिक्षकों की बायोमैट्रिक उपस्थिति शुरू होने से प्रशिक्षण व्यवस्था में नियमितता और जवाबदेही बढ़ी है।
हॉकी खिलाड़ियों को एस्ट्रो टर्फ का इंतजार
महामाया स्टेडियम में हॉकी को नई सुविधा देने के लिए हॉकी एस्ट्रो टर्फ लगाने का प्रस्ताव खेल कार्यालय की ओर से खेल निदेशालय को भेजा गया है। प्रस्ताव स्वीकृत होने के बाद खिलाड़ियों को आधुनिक सतह पर अभ्यास का अवसर मिलेगा। इससे जिले से राष्ट्रीय स्तर के हाकी खिलाड़ी तैयार करने में मदद मिल सकती है।

क्या बोले खिलाड़ी?
स्टेडियम में अभ्यास करने वाले नितिन, अमित और राधिका का कहना है कि सुविधाएं दोबारा शुरू होने से काफी राहत मिली है। बैडमिंटन खिलाड़ी हर्षित ने कहा कि हाल खुलने से बारिश और गर्मी में अभ्यास बाधित नहीं होगा। एथलेटिक्स खिलाड़ियों को सिंथेटिक ट्रैक का काम पूरा होने का इंतजार है।
खिलाड़ियों ने कहा कि नई सुविधाओं के साथ खेल उपकरणों की उपलब्धता, नियमित रखरखाव और प्रशिक्षकों की निरंतर मौजूदगी पर भी ध्यान दिया जाए, तभी स्टेडियम का पूरा लाभ प्रतिभाओं को मिल सकेगा।
स्टेडियम में खिलाड़ी अनुशासित रहकर खेल अभ्यास कर रहे हैं। वहीं, खेल प्रशिक्षकों में जिम्मेदारी का अहसास भी बढ़ा है। वहीं, खेल संसाधन और सुधार के साथ ही जीणोद्धार और निर्माण कार्य की गुणवत्ता की बारीकी से निगरानी हो रही है। ताकि खिलाड़ियों को मिलने वाली सुविधाएं सालों साल तक चल सकें। - राम मिलन, जिला क्रीड़ाधिकारीयह भी पढ़ें- नमो भारत और रैपिड रेल की उम्मीदों को झटका, गाजियाबाद-हापुड़ रूट का नहीं हुआ फिजिबिलिटी टेस्ट
