देवरिया में PDA के नारे पर अनुप्रिया पटेल का तंज, 'सत्ता से बाहर होते ही याद आती है पिछड़ों की'
केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने देवरिया में कहा कि आरक्षण संविधान की देन है और इसे कोई खत्म नहीं कर ...और पढ़ें

अपना दल (एस) की राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल। जागरण
HighLights
आरक्षण संविधान प्रदत्त अधिकार है, खैरात या भीख नहीं।
मोदी सरकार ने आर्थिक आधार पर भी आरक्षण की व्यवस्था दी।
विपक्षी दल सत्ता में रहते आरक्षण के मुद्दों पर चुप रहे।
जागरण संवाददाता, देवरिया। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री और अपना दल (एस) की राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल ने कहा कि चुनाव आते ही अचानक आरक्षण पर चर्चाएं तेज हो जाती हैं। ऐसे में लोगों को भ्रमित या प्रभावित होने के बजाय यह सोचना चाहिए कि चुनाव से पहले ही आरक्षण का मुद्दा क्यों उठाया जाता है। आरक्षण देश के संविधान की देन है। संविधान ने सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े, दलित, वंचित और दबे-कुचले समाज को सरकारी नौकरियों और सरकारी शिक्षण संस्थानों में आरक्षण की व्यवस्था दी है।
मोदी सरकार इससे एक कदम आगे बढ़कर आर्थिक आधार पर भी आरक्षण दे चुकी है। आज आरक्षण का लाभ किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों को मिल रहा है। आरक्षण कोई खैरात या भीख नहीं, बल्कि संविधान प्रदत्त अधिकार है। देश संविधान से चलेगा और इसमें कोई बदलाव नहीं कर सकता।
वह शहर के टाउनहाल स्थित आडिटोरियम में जिला स्तरीय कार्यकर्ता समागम को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि जो लोग आरक्षण को लेकर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं, उनसे सवाल किया जाना चाहिए कि क्या समाज में भेदभाव पूरी तरह समाप्त हो गया है? क्या सरकारी नौकरियों का बैकलॉग पूरा हो गया है? क्या शैक्षणिक संस्थानों में पिछड़े, दलित और वंचित समाज के बच्चे उस संख्या में पहुंच गए हैं, जितनी उनकी भागीदारी होनी चाहिए? यदि ऐसा नहीं हुआ है तो इसका मतलब है कि भेदभाव अभी भी जारी है।
सत्ता में रहते अधिकारों की कितनी चिंता की, जनता पूछे सवाल
अनुप्रिया पटेल ने कहा कि जो पार्टियां आज लोगों के अधिकारों को लेकर चिंतित दिखाई दे रही हैं, उन्हें यह भी बताना चाहिए कि सत्ता में रहने के दौरान उन्होंने पिछड़े, दलित और वंचित समाज के अधिकारों के लिए क्या किया। उन्होंने कहा कि यदि बिहार में नीतीश कुमार जातीय जनगणना करा सकते थे तो उत्तर प्रदेश की तत्कालीन समाजवादी पार्टी सरकार भी ऐसा कर सकती थी, लेकिन उसने नहीं कराया। इसलिए सभी का हित एनडीए में सुरक्षित है। जनता ने भी लगातार एनडीए प्रत्याशियों पर विश्वास जताया है।
संघर्षों से बनी अपनी पहचान
‘अपना दल में तो अपनापन है’ नारे का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में समय-समय पर कई पार्टियां बनीं, लेकिन बिना सत्ता का स्वाद चखे 1995 से आज तक लोगों के दिलों की धड़कन बनी रहने वाली पार्टी अपना दल ही है। सीमित राजनीतिक ताकत के बावजूद पार्टी संघर्षों से कभी पीछे नहीं हटी। अपना दल लगातार हाशिये पर पड़े समाज के अधिकारों की लड़ाई लड़ता रहा है और दलित, पिछड़े व कमजोर वर्गों की आवाज उठाता रहा है, जिन्हें व्यवस्था में हमेशा उपेक्षित रखा गया।
पीडीए की याद सत्ता से बाहर होने पर आती है
सपा पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि पीडीए की बात करने वालों को इसकी याद तब आती है, जब वे सत्ता से बाहर हो जाते हैं। ऐसी पार्टियों ने उत्तर प्रदेश में कई बार सत्ता संभाली, लेकिन उनके शासनकाल में पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समाज का कितना ख्याल रखा गया, यह जनता को याद करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार के समय यश भारती पुरस्कार दिया जाता था, लेकिन उसमें पीडीए क्यों गायब था? दलित, अल्पसंख्यक और पिछड़े वर्ग के लोगों को यह सम्मान क्यों नहीं दिया गया? यह उनके दोहरे चरित्र को दर्शाता है।
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2011 की जनगणना पर यूपीए सरकार को घेरा
उन्होंने कहा कि सत्ता और सरकार के साथ रहने के बावजूद अपना दल (एस) ने लगातार जातीय जनगणना की मांग उठाई। केंद्र सरकार ने जातीय जनगणना कराने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि यूपीए सरकार ने 2011 में जातीय जनगणना के नाम पर धोखा किया था। आज विपक्ष भले ही जातीय जनगणना के नाम पर समाज को बरगलाने की कोशिश कर रहा हो, लेकिन जब उसके हाथ में सत्ता थी, तब ऐसी सर्वे प्रक्रिया अपनाई गई कि जातियों के सही आंकड़े सामने ही नहीं आ सके।
