ट्रेनों में कचरा प्रबंधन के लिए रेलवे ने किया बड़ा बदलाव, 18 से बढ़कर 367.4 लीटर होगी डस्टबिन की क्षमता
रेलवे लंबी दूरी की ट्रेनों में कचरा प्रबंधन के लिए एलएचबी कोचों में बड़ी क्षमता वाली कूड़ा एकत्रीकरण प्रणाली लगा ...और पढ़ें

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HighLights
नई प्रणाली से एलएचबी कोचों में कचरा प्रबंधन बेहतर होगा।
डस्टबिन की क्षमता 18 लीटर से बढ़कर 367.4 लीटर होगी।
झांसी वर्कशॉप ने प्रोटोटाइप तैयार कर RDSO को भेजा है।
विवेक दुबे, चंदौली। लंबी दूरी की ट्रेनों में यात्रियों की बढ़ती संख्या के बीच कचरा प्रबंधन की चुनौती से निपटने के लिए रेलवे अब लिंक हाफमैन बुश (एलएचबी) कोचों में बड़ी क्षमता वाला कूड़ा एकत्रीकरण प्रणाली लगाने की तैयारी में है।
पं. दीनदयाल उपाध्याय (पीडीडीयू) जंक्शन से रोजाना करीब 100 यात्री ट्रेनें गुजरती हैं, जिनसे लगभग तीन टन कूड़ा निकलता है। मौजूदा एलएचबी कोचों के कूड़ेदानों की क्षमता सीमित होने से सफाई कर्मचारियों को बार-बार कचरा उठाना पड़ता है।
इस समस्या के समाधान के लिए झांसी स्थित वैगन रिपेयर वर्कशाप ने उच्च क्षमता की कूड़ा एकत्रीकरण प्रणाली का प्रोटोटाइप तैयार किया है। नई व्यवस्था में कचरा संग्रह क्षमता 18 लीटर से बढ़कर 367.4 लीटर हो जाएगी-यानी करीब 20.4 गुना का वृद्धि।
एलएचबी ट्रेनों के सीमित क्षमता वाले डस्टबिन यात्रियों के कचरे से जल्दी भर जाते हैं। इसके बाद कचरा बाहर फैलने लगता है, जिससे कोच की स्वच्छता प्रभावित होती है और सफाई कर्मचारियों को सफर के दौरान बार-बार कचरा उठाना पड़ता है। नई प्रणाली में ज्यादा मात्रा में कचरा जमा हो सकेगा, जिससे यह समस्या काफी कम हो जाएगी। संग्रह टैंक को ट्रेन के रखरखाव के दौरान खाली किया जा सकेगा, जिससे सफाई व्यवस्था बेहतर होगी।
गुरुत्वाकर्षण से सीधे स्टील कलेक्टर तक पहुंचेगा कचरा
नई व्यवस्था की खासियत यह है कि कचरे को टैंक तक पहुंचाने के लिए किसी अलग मशीन की जरूरत नहीं होगी। कोच के फर्श पर यात्रियों की पहुंच में एक कूड़ादान लगाया जाएगा। इसके नीचे सेंट्रल कनेक्टर के जरिये कचरा कोच में लगे स्टील बाक्स तक पहुंचेगा और वहां से गुरुत्वाकर्षण के सहारे सीधे संग्रह टैंक में गिर जाएगा।
राजधानी, दुरंतो समेत कई ट्रेनों को मिलेगा फायदा
पीडीडीयू जंक्शन से रोजाना बड़ी संख्या में लंबी दूरी की एलएचबी ट्रेनें गुजरती हैं, जिनमें राजधानी, दुरंतो, नेताजी, विभूति और हिमगिरी जैसी प्रमुख ट्रेनें शामिल हैं। नई प्रणाली को मंजूरी मिलने पर डीडीयू होकर गुजरने वाली इन सभी ट्रेनों में भी इसे लागू किए जाने की उम्मीद है।
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झांसी वर्कशाप द्वारा तैयार प्रोटोटाइप निरीक्षण और स्वीकृति के लिए अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (आरडीएसओ) को भेजा जा चुका है।
