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    चुनावी साल में चीनी की महंगाई से बढ़ी गन्ने का भाव बढ़ने की उम्मीद, किसानों को मिल सकता है बड़ा लाभ

    Updated: Tue, 11 Aug 2026 10:15 AM (IST)

    बिजनौर में चीनी के दाम सात साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गए हैं, जिससे मिलों को राहत मिली है और किसानों को गन्ने के अच्छे दाम मिलने की उम्मीद है। ...और पढ़ें

    प्रतीकात्मक तस्वीर।

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    संक्षेप में पढ़ें

    अजीत चौधरी, बिजनौर। चुनावी साल में चीनी के दाम पिछले सात वर्षाें में सबसे अधिक हो गए हैं। थोक में चीनी लगभग चार हजार 400 रुपये प्रति कुंतल तक बिक रही है। मिलों के पास अभी भी इतना स्टाक है कि मिल चलने के बाद तक चलता रहेगा लेकिन फिर ये पिछले वर्षाें की तुलना में कम है।

    अगले वर्ष चुनाव होने हैं। चुनाव में किसान गन्ने में अच्छी वृद्धि की आस रखते हैं। चीनी के दाम जितने अच्छे रहेंगे गन्ने के दामों में भी उतनी ही वृद्धि की आस रहेगी। गन्ने के दाम जितने अच्छे होंगे किसानों को भी उतना ही लाभ होगा।

    गन्ना जिले के किसानों की मुख्य फसल है। जिले में 2.55 लाख हेक्टेयर से भी अधिक रकबे में गन्ने की फसल खड़ी है। गन्ने का दाम प्रदेश सरकार द्वारा घोषित किया जाता है लेकिन भुगतान पूरी तरह चीनी के बाजार भाव पर निर्भर रहता है। कोरोना के बाद जिले में गन्ने के रकबे में तेजी से वृद्धि हुई।

    गन्ने की पैदावार के साथ ही चीनी का उत्पादन बढ़ा। चीनी का स्टाक बढ़ा तो दाम घट गए। हालांकि तब चीनी मिलों ने भी चीनी के उत्पादन को कम करने के लिए एथनाल आदि पर ज्यादा जोर दिया था। कोविड के बाद से ही मिलों से बिकने वाली चीनी के दाम 3,900 रुपये प्रति कुंतल या इससे भी कम दाम रहे थे, लेकिन अब चीनी के दामों में वृद्धि हो रही है।

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    मिलों से थोक में बिकने वाली चीनी के दाम 4,400 रुपये प्रति कुंतल तक जा पहुंचे हैं। यह भी तब हुआ है जबकि भारत सरकार ने काफी पहले चीनी के निर्यात पर रोक लगा दी है। चीनी के निर्यात पर रोक से स्थानीय बाजार में दबाव बढ़ने पर दाम कम होने चाहिए थे जबकि दाम बढ़ रहे हैं।

    गन्ने की कम पैदावार, चीनी मिलों के सीमित स्टाक, एथनाल की ओर गन्ने डायवर्जन ने चीनी बाजार के समीकरणों को बदला है। संभावना जताई जा रही है कि आने वाले समय में चीनी के दाम और बढ़ें। चीनी के एक्स फैक्ट्री दाम ही पांच हजार रुपये कुंतल तक पहुंच जाएंगे।

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    जिले की चीनी मिलों के पास अभी भी कुल उत्पादन का 20 प्रतिशत करीब 20.62 लाख कुंतल चीनी का कोटा बचा हुआ है लेकिन बाकी वर्षाें के मुकाबले ये बहुत कम है। पिछले वर्ष चीनी का कोटा 35.50 लाख कुंतल था। आने वाले समय में चीनी की मांग ऐसे ही बनी रही तो गन्ने के दाम और भी बेहतर बढ़ने की उम्मीद रहेगी।

    चीनी मिलों में बनी और बची चीनी

    चीनी मिल चीनी उत्पाद बची चीनी
    धामपुर 16,53,950 4,20,615
    स्योहारा 16,19,910 4,88,597
    बिलाई 9,33,770 1,80,971
    बहादरपुर 7,04,130 2,04,845
    बरकातपुर 10,09,953 1,77,487
    बुंदकी 8,70,070 1,58,415
    बिजनौर 4,87,850 16,269
    चांगीपुर 8,19,570 2,50,315
    नजीबाबाद 3,79,560 1,65,396
    योग 90,86,458 20,62,856

    (नोट- चीनी की मात्रा लाख कुंतल में है। इसमें चांदपुर चीनी मिल का बचा स्टॉक शामिल नहीं है।)

    गन्ने की कम पैदावार से चीनी भी कम

    केवल जिले की ही बात करें तो चीनी मिलों ने इस बार पैराई सत्र में 1.30 करोड़ कुंतल गन्ने की पेराई कम की है। पैदावार कम तो थी ही, किसानों ने कोल्हुओं को बीते वर्षाें की तुलना में अधिक गन्ना बेचा। जितनी कम पेराई हुई उतनी ही कम चीनी बनी। सूबे में गन्ने की पैदावार और चीनी की यही स्थिति रही है।

    फुटकर में भी चढ़े दाम

    बाजार में भी चीनी के दाम बढ़े हुए चल रहे हैं। फुटकर में चीनी के दाम 52 रुपये प्रति किलोग्राम या इससे भी ज्यादा बिक्री की जा रही हैं। यानि थोक में चीनी पांच हजार 200 रुपये प्रति कुंतल तक चल रहे हैं।

    हालांकि आम उपभोक्ताओं को चीनी के दाम बढ़ने पर सीधे कोई असर नहीं पड़ेगा। आम उपभोक्ता कुल उत्पादन का छह प्रतिशत से भी कम चीनी का उपभोग करते हैं। लंबे समय बाद चीनी के दाम बाजार में चढ़ते हुए दिख रहे हैं।

    चीनी के दाम बाकी वर्षाें की तुलना में बहुत अच्छे हैं। चीनी के दामों पर ही मिल मुनाफा कमाती हैं और अभी मिल मुनाफे में हैं। सरकार गन्ने के दाम इतने अच्छे करे कि किसान का बेटा भी खुशी-खुशी खेती करे।
    दिगंबर सिंह, युवा प्रदेश अध्यक्ष- भाकियू अराजनैतिक

    इस बार चीनी के दाम कुछ ठीक हुए हैं। हालांकि मिल द्वारा बनाई जा रही चीनी में आ रही लागत को देखते हुए दामों में और वृद्धि होनी चाहिए। चीनी के दाम जितने अच्छे रहेंगे मिलों द्वारा किसानों को गन्ना भुगतान भी उतनी जल्दी किया जाएगा।
    रविन्द्र शुक्ला, यूनिट हैड-बिजनौर चीनी मिल