कुआनो मनोरमा संगम तट पर लगेगा पांच दिवसीय मनवर मेला, जानें पौराणिक महत्व
लालगंज, बस्ती में कुआनो मनोरमा संगम तट पर गुरुवार से पांच दिवसीय मनवर मेला लगेगा। पौराणिक मान्यता है कि चैत्र पूर्णिमा पर यहां स्नान और बाबा मोक्षेश्व ...और पढ़ें

लालगंज संगम तट पर जलकुंभी का अंबार। जागरण
HighLights
कुआनो मनोरमा संगम तट पर पांच दिवसीय मनवर मेला।
चैत्र पूर्णिमा पर स्नान, बाबा मोक्षेश्वर नाथ पूजा का महत्व।
नदी की सफाई, घाटों के रखरखाव की मांग।
संवाद सूत्र, लालगंज, बस्ती। महर्षि उद्यालक मुनि की तपोभूमि कुआनो मनोरमा नदी के पावन संगम तट पर पांच दिवसीय मनवर मेला गुरुवार से लगेगा। जिसमें प्रदेश के कई जनपदों के दुकानदार मेला में अपनी दुकान लगाने के लिए पहुंच रहे हैं।
पौराणिक मान्यता है कि चैत्र शुक्ल चतुर्दशी तिथि को प्रभु श्रीराम ने मिथिला से वापस आते समय अनुज लक्ष्मण और माता सीता के साथ इसी संगम तट पर लिट्टी चोखे का आहार कर रात्रि विश्राम किया था। चैत्र पूर्णिमा के दिन कुआनो मनोरमा संगम में स्नान करके बाबा मोक्षेश्वर नाथ शिवलिंग की पूजा अर्चना किया था। तभी से मान्यता चली आ रही है कि संगम में स्नान कर व बाबा मोक्षेश्वर नाथ शिवलिंग की पूजा अर्चना करने से मनुष्य के सभी पाप कर्म नष्ट हो जाते है और उसे मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है।
उमा प्रसाद पंडा ने कहा कि आज भी श्रद्धालु इस संगम तट के तीनों घाटो पर चतुर्दशी को लिट्टी चोखा बनाकर प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। रात्रि विश्राम कर पूर्णिमा का स्नान करते है । बाबा मोक्षेश्वर नाथ शिवलिंग की पूजा अर्चना करके पुण्य अर्जित करते है। इस संगम तट पर चैत्र पूर्णिमा का स्नान तथा बैसाख प्रतिपदा और द्वितीया तिथि पर मेले का विशेष महत्व है।

लालगंज संगम तट पर मेले में लग रहा झूला। जागरण
दो अप्रैल को संगम स्नान
जनजन गांव निवासी संस्कृत महाविद्यालय बखरिया के सेवा निवृत्त आचार्य पंडित शत्रुघ्न प्रसाद शुक्ल ने बताया कि इस वर्ष तिथियों का क्षय होने के कारण एक अप्रैल बुधवार को प्रातः 6.13 बजे सूर्योदय होगा, जबकि पूर्णिमा तिथि 6.32 के बाद लग रही है। गुरुवार को सुबह सूर्योदय काल के बाद प्रातः 6. 56 बजे तक पूर्णिमा तिथि का भोग काल रहेगा। इस लिए धर्म शास्त्र और पौराणिक मान्यता के अनुसार चैत्र पूर्णिमा पर कुआनो मनोरमा संगम स्नान गुरुवार को ही किया जाना चाहिए।
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नदी में जलकुंभी व घाटों के सफाई की मांग
मेला की तैयारियों को देखते हुए श्याम जी पांडेय ने कहा कि पौराणिक मेला लगने में चार दिन शेष रह गए हैं। नदी में जलकुंभी और शैवाल का अंबार है। संगम तट पर बने घाटों की साफ-सफाई भी अभी नहीं की गई है। प्रशासनिक स्तर पर भी मेला की तैयारियों को लेकर बहुत ध्यान नहीं दिया जा रहा है जबकि मेला समिति केवल बैठकी वसूलने तक सीमित रह गई है।
जनार्दन गोस्वामी, बलराम गौंड, सुनील कुमार पांडेय , राजकरन सिंह , लालगंज के पूर्व ग्रामप्रधान रामदौड़ चौधरी, शैलेन्द्र पांडेय ,नरेन्द्र कुमार यादव, वीरेंद्र कुमार उपाध्याय आदि ने मेला को देखते हुए नदी व घाटों को साफ-सफाई कराए जाने की मांग प्रशासन से की है।