विप्रा, बहन और पिता पर दो और केस: एसडीएम बताकर नायब तहसीलदार और बीडीओ बनाने के नाम पर 36 लाख की ठगी
ठग विप्रा शर्मा, उसकी बहन और पिता पर नौकरी दिलाने के नाम पर 36 लाख रुपये की ठगी के दो ...और पढ़ें

विप्रा शर्मा
HighLights
तीनों ने एक की नायब तहसीलदार और एक की बीडीओ की नौकरी लगवाने के बहाने की ठगी
जागरण संवाददाता, बरेली। ठग बहनों और उसके पिता के जाल में फंसे लोग लगातार सामने आ रहे हैं। तीनों ने एक महिला समेत दो लोगों से बीडीओ और नायब तहसीलदार की नौकरी लगवाने का झांसा देकर 36 लाख रुपये ठगी कर फर्जी नियुक्ति पत्र थमा दिए। दोनों पीड़ितों के शिकायती पत्र पर थाना बारादरी पुलिस ने विप्रा शर्मा, उसकी बहन शिखा पाठक और पिता पर दो और प्राथमिकी दर्ज कर ली हैं। अब तक तीनों पर 44 मुकदमे दर्ज हो चुके हैं। दोनों बहनें जेल में हैं, लेकिन आरोपित पिता वीरेंद्र अभी पुलिस गिरफ्त से दूर है।
ग्रेटर कैलाश, सुभाषनगर निवासी माधव के अनुसार वर्ष 2024 में उनकी मुलाकात शिखा पाठक से हुई। शिखा ने उन्हें बताया कि उसकी बहन विप्रा शर्मा एसडीएम है और सरकारी नौकरी लगवा देती है। शिखा ने कहा कि यूपीपीसीएस के माध्यम से नायब तहसीलदार की नियुक्तियां निकली हैं।
उसने अपनी बहन विप्रा शर्मा से अपने घर ग्रेटर ग्रीन पार्क, बारादरी में मिलवाया। यहां पर उसके पिता वीरेंद्र शर्मा भी मिले। सरकारी नौकरी लगवाने के लिए उन्होंने 23.50 लाख रुपये ले लिए। उन्होंने 19.50 लाख रुपये सेंट्रल बैंक के खाते से अलग-अलग तिथि में और चार लाख रुपये नकद दिए।
इसके बाद विप्रा शर्मा ने नायब तहसीलदार पद के लिए संजय श्रीनेत आयुक्त एवं सचिव उत्तर प्रदेश शासन लखनऊ के नाम से फर्जी हस्ताक्षर व फर्जी दस्तावेज तैयार कर नियुक्ति पत्र दे दिए। उनके पास अलग-अलग तारीख में अलग-अलग स्थानों के लिए डाक, वाट्सएप, मेल से फर्जी नियुक्ति पत्र मिले।
वहीं, ग्रेटर कैलाश, सुभाषनगर की कौशल्या के अनुसार वर्ष 2024 में शिखा पाठक उनके भाई के मेडिकल स्टोर पर दवाएं लेने आती थी, तब उसने बताया था कि उसकी बहन विप्रा शर्मा एसडीएम है।
उसने कहा कि यूपीपीएससी के माध्यम से बीडीओ की नियुक्तियां निकली हैं और नौकरी लगवाने के बहाने उसे ग्रेटर ग्रीन पार्क आवास पर विप्रा और पिता वीरेंद्र कुमार शर्मा भी मिले। तीनों के झांसे में आकर उन्होंने 12.50 लाख रुपये दे दिए।
कुछ समय उन्हें बीडीओ पद पर तैनाती के संजय श्रीनेत आयुक्त एवं सचिव उत्तर के नाम से फर्जी हस्ताक्षर के फर्जी नियुक्ति पत्र भेजे गए। आरोप है कि बाद में रुपये वापस मांगने पर विप्रा ने अधिकारियों को रिश्वत देने के जुर्म में उन्हें ही जेल भिजवाने और जान से मारने की धमकी दी।
