बरेली में मानसून का रौद्र रूप: 24 घंटे में रिकॉर्ड 381.1mm बारिश, डूबा शहर, रेलवे स्टेशन पर भी भरा पानी
Bareilly Weather Update: बरेली में रविवार रात से सोमवार दोपहर तक मानसून ने अपना रौद्र रूप दिखाया, जहां 24 घंटे ...और पढ़ें

भारी बारिश के चलते शहर में हुआ जलभराव
HighLights
रविवार रात से शुरू हुआ वर्षा का सिलसिला सोमवार दोपहर तक जारी
निचले क्षेत्रों में सड़क और नालों का मिटा अंतर, बढ़ा हादसों का खतरा
जागरण संवाददाता, बरेली। जिले में रविवार रात से सोमवार दोपहर तक मानसून ने अपना रौद्र रूप दिखाया। लगातार मूसलाधार बारिश से पूरा शहर जलमग्न हो गया और कई मोहल्लों व कालोनियों में कमर तक पानी भर गया। सुबह से ही लोगों को घरों के अंदर घुसे पानी को बाल्टियों और मोटर पंप की मदद से बाहर निकालना पड़ा।
Monsoon Update: सुबह 8:30 बजे तक बीते 24 घंटे में 381.1 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई, जिसे जिले में एक दिन की अब तक की सर्वाधिक वर्षा माना जा रहा है। तेज गर्जना और घने बादलों के बीच शुरू हुई बारिश का सिलसिला सोमवार दोपहर तक जारी रहा, जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया।

सबसे अधिक परेशानी निचले इलाकों के निवासियों को उठानी पड़ी। सुभाष नगर, हजियापुर, किला, शहामतगंज और अन्य निचले क्षेत्रों में सड़क और नालों का अंतर मिट गया।

कई स्थानों पर खुले नाले पानी में डूब गए, जिससे दुर्घटना का खतरा बढ़ गया। जलभराव के कारण दोपहिया और चारपहिया वाहन बीच रास्ते में बंद हो गए, जबकि पैदल यात्रियों को गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ा।
रेलवे ट्रैक पर भी भरा पानी
भारी वर्षा के कारण सड़कों संग रेलवे ट्रैक भी प्रभावित हुए, सिटी स्टेशन पर पंप लगाकर पानी निकाला जा रहा है। लगातार बारिश से बाजारों में चहल-पहल भी कम रही।
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UP Weather Update: आवश्यक कार्य से निकलने वाले लोग छाते और रेनकोट के सहारे गंतव्य तक पहुंचे। तेज बारिश के दौरान अनेक राहगीर ओवरब्रिज, बस स्टाप और दुकानों के छज्जों के नीचे रुककर बारिश थमने का इंतजार करते दिखाई दिए, जबकि कुछ ने भीगते हुए ही सफर जारी रखा।
प्रशासन की टीमें जलभराव वाले क्षेत्रों में जलनिकासी की व्यवस्था में जुटी रहीं। मौसम विभाग के अनुसार अगले कुछ घंटों तक रुक-रुक कर तेज बारिश की संभावना बनी हुई।
नाले के पानी से सड़कें बनीं तालाब, पार्षद ने नाव चलाकर जताया विरोध
प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ निर्दलीय पार्षद जय प्रकाश राजपूत ने अनोखा प्रदर्शन किया। वे प्लास्टिक की कामचलाऊ नाव में बैठकर जलमग्न गलियों में उतरे।
स्थानीय युवकों के साथ नाव पर सवार होकर उन्होंने तख्तियों के जरिए तीखे सवाल पूछे- 'करोड़ों का बजट, फिर भी जलभराव क्यों?' और 'सड़कें बनीं तालाब, जनता मांगे जवाब।' पार्षद राजपूत ने कहा कि स्मार्ट सिटी के नाम पर केवल कागजी विकास हो रहा है।
ऐतिहासिक नालों पर अतिक्रमण और घटिया जलनिकासी के कारण जनता हर बारिश में नारकीय जीवन जीने को मजबूर है। स्थानीय नागरिकों ने जल्द से जल्द इस समस्या के स्थायी समाधान की मांग की है।
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