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बरेली गोशाला में 3 दिन में 11 गोवंशों की मौत से मचा बवाल, सुपरवाइजर समेत 4 पर FIR दर्ज

Published: Tue, 01 Sep 2026 02:39 PM (IST)

बरेली की सीबीगंज नदौसी गोशाला में तीन दिन में 11 गोवंशों की मौत के बाद हंगामा हो गया। हिंदूवादी संगठनों ...और पढ़ें

एआई जेनरेटेड इमेज है।

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HighLights

  1. सोमवार देर रात तक चले हंगामे के बाद प्रशासन ने की बड़ी कार्रवाई

जागरण संवाददाता, बरेली। शहर के सीबीगंज स्थित नदौसी कान्हा उपवन गोशाला में गोवंशों की सिलसिलेवार मौत के बाद स्थितियां काफी तनावपूर्ण हो गईं। शनिवार को चार गोवंशों की मौत की स्याही अभी सूखी भी नहीं थी कि सोमवार शाम अचानक सात और पशुओं ने दम तोड़ दिया। मृत पशुओं को ट्रैक्टर-ट्राली में लादकर निस्तारण के लिए ले जाते समय गोरक्षकों और हिंदूवादी संगठन के कार्यकर्ताओं ने देख लिया, जिसके बाद मौके पर भारी हंगामा शुरू हो गया।

देर रात तक चले विरोध-प्रदर्शन और तीखी नोकझोंक के बाद पुलिस व प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए गोशाला सुपरवाइजर, भूसा सप्लायरों समेत चार लोगों के विरुद्ध पशुओं के प्रति क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत प्राथमिकी (मुकदमा) दर्ज कर ली है।

ट्रैक्टर-ट्राली घेरकर किया प्रदर्शन, मुख्य द्वार बंद कर भागे कर्मचारी

सोमवार शाम करीब सात बजे जैसे ही गोशाला में एक साथ सात गोवंशों की मौत की खबर फैली, हिंदूवादी संगठनों से जुड़े निर्दोष राठौर, रोहित गंगवार, अमित गंगवार, विजय मौर्य, वीरेंद्र व पंकज पाठक समेत दर्जनों कार्यकर्ता मौके पर पहुंच गए।

जब मृत पशुओं के शवों को डिस्पोजल (निस्तारण) के लिए ले जाया जा रहा था, तब कार्यकर्ताओं ने ट्रैक्टर-ट्राली को रोककर जमकर नारेबाजी की। कार्यकर्ताओं को अपनी ओर आते देख ट्रैक्टर चालक ने वाहन दौड़ाकर भागने का प्रयास किया।

इसके बाद जब उग्र कार्यकर्ताओं ने गोशाला के भीतर प्रवेश करने की कोशिश की, तो वहां तैनात कर्मचारियों ने आनन-फानन में मुख्य द्वार (मेन गेट) बंद कर दिया। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि गोशाला में भूख, प्यास और चारे की भारी किल्लत के कारण गोवंश तड़प-तड़पकर मर रहे हैं और जिम्मेदार अधिकारी सच को छुपाने में लगे हैं।

तीन दिन पूर्व भी हुई थी चार गोवंशों की मौत

उल्लेखनीय है कि 29 अगस्त को भी इसी गोशाला में चार गोवंशों की मौत हो गई थी। उस समय जब नगर निगम की टीम उन्हें बाकरगंज निस्तारण के लिए ले जा रही थी, तब भी स्थानीय लोगों ने अव्यवस्थाओं का आरोप लगाते हुए हंगामा किया था।

निगम द्वारा कराए गए पोस्टमार्टम की रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ था कि गोवंशों के पेट में अत्यधिक पॉलिथीन जमा होने के कारण उनकी मौत हुई थी। शनिवार की घटना का विवाद अभी शांत भी नहीं हुआ था कि सोमवार शाम को सात और गोवंशों ने दम तोड़ दिया, जिससे तीन दिनों के भीतर कुल मौतों का आंकड़ा 11 पहुंच गया।

एडी पशुपालन के निरीक्षण के कुछ ही घंटों बाद हादसा

घटनाक्रम का दुखद पहलू यह भी रहा कि शनिवार की घटना के बाद सोमवार को ही पशुपालन विभाग के अपर निदेशक (एडी) डा. एमपी सिंह गोशाला की व्यवस्थाएं परखने पहुंचे थे। शाम पांच बजे तक उन्होंने गोशाला का सघन निरीक्षण किया और निचले इलाकों में मिट्टी डलवाकर फर्श पक्का कराने, नए शेड निर्माण तथा गोबर निस्तारण के निर्देश दिए थे।

हालांकि, उनके जाने के महज दो घंटे बाद ही सात गोवंशों की मौत की खबर आ गई। इस पर एडी डा. एमपी सिंह ने बताया कि निरीक्षण के दौरान उन्हें कुछ पशुओं के बीमार होने की सूचना दी गई थी, परंतु उन्होंने ओपीडी क्षेत्र का निरीक्षण नहीं किया था। उन्होंने बताया कि संरक्षित गोवंश के बीमार होने की स्थिति में डा. सुनैना और डा. हरपाल सिंह द्वारा इलाज व देखरेख की जाती है।

प्रशासनिक अधिकारियों की दौड़-धूप, सुपरवाइजर को हटाया

हंगामे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस बल के साथ नगर निगम के पर्यावरण अभियंता राजीव राठी, पशु कल्याण अधिकारी डा. हरपाल सिंह व अन्य वरिष्ठ अधिकारी रात में ही मौके पर पहुंचे। रात 10 बजे तक अधिकारी प्रदर्शनकारियों को शांत कराने में जुटे रहे।

हंगामे के बीच ही नगर आयुक्त ने गोशाला सुपरवाइजर विजय कुमार को पद से हटा दिया। हालांकि, प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि निगम प्रशासन छोटे कर्मचारियों पर गाज गिराकर बड़े जिम्मेदारों को बचाने का प्रयास कर रहा है।

पशु कल्याण अधिकारी की सफाई: 'बीमारी से हुई मौत, कुछ लोग बना रहे दबाव'

मौके पर पहुंचे पशु कल्याण अधिकारी डाॅ. हरपाल सिंह ने गोरक्षकों के हाथापाई के प्रयासों के बीच दावा किया कि गोवंशों की मौत भूख-प्यास से नहीं, बल्कि बीमारी के कारण हुई है।

उनके अनुसार, सभी मृत पशुओं का ओपीडी में बाकायदा इलाज चल रहा था और उनका मेडिकल रिकॉर्ड उपलब्ध है। शाम को मौत होने के बाद नियमानुसार जेसीबी से दफनाने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन कुछ लोग पुरानी बातों को लेकर जानबूझकर माहौल खराब कर रहे हैं और अनुचित दबाव बना रहे हैं।

सुपरवाइजर व भूसा सप्लायरों पर एफआईआर दर्ज

गोरक्षकों की तहरीर और भारी दबाव के बाद पुलिस ने गोशाला के सुपरवाइजर विजय कुमार, भूसा सप्लायर रचित अग्रवाल, विशाल मल्होत्रा तथा एक अन्य अज्ञात के खिलाफ पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज कर ली है।

देर रात तक चले बवाल के कारण सोमवार को पोस्टमार्टम नहीं हो सका। अधिकारियों के अनुसार शवों का पोस्टमार्टम और निस्तारण मंगलवार को कराया जाएगा। वहीं मंगलवार को गोसेवा आयोग के सदस्य का आपात निरीक्षण भी प्रस्तावित है।

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