UP के सबसे कम आय वाले 20 जिलों की सूची जारी: बदायूं 16वें नंबर पर, अब ₹1.20 लाख करने की तैयारी; जानें क्या है 'मिशन 2030'?
बदायूं समेत यूपी के 20 जिलों के लिए बड़ी खबर! उत्तर प्रदेश स्टेट ट्रांसफार्मेशन कमीशन ने राज्य के 20 सबसे कम प्रति व्यक्ति आय वाले जिलों की पहचान की ह ...और पढ़ें

बदायूं शहर की तस्वीर। जागरण आर्काइव
HighLights
स्टेट ट्रांसफार्मेशन कमीशन की ओर से सूची जारी कर की गई बैठक, डीएम, सीडीओ से ली आगे की योजना की जानकारी
अगले पांच वर्षों में किस तरह जिले की प्रति व्यक्ति आय बढ़ाई जाए, इसकी विस्तृत रूपरेखा बनाई, दोगुनी करने का लक्ष्य
अंकित गुप्ता, बदायूं। प्रदेश के 20 जिलों चिन्हित किया गया जिनकी प्रति व्यक्ति आय न्यून्तम स्तर पर है। इन 20 जिलों में बदायूं 16वें स्थान पर है। जिले की प्रति व्यक्ति आय 60,864 रुपये है। स्टेट ट्रांसफार्मेशन कमीशन की ओर से जारी की गई इस सूची में शामिल जिलों की प्रति व्यक्ति आय कैसे बढ़े, इस पर मंथन किया गया। इसे लेकर बैठक की गई, जिसमें जिले में उपलब्ध संसाधनों को जाना गया। उनके जरिए कैसे प्रति व्यक्ति आय बढ़े इस पर चर्चा हुई।
इसके अलावा जिलाें को अभी भी किन किन मूलभूत सुविधाओं की आवश्यकता है, इसे भी जिले के अधिकारियों द्वारा बताया गया। उत्तर प्रदेश स्टेट ट्रांसफार्मेशन कमीशन (पूर्व में राज्य योजना आयोग) के सीईओ मनोज कुमार सिंह की ओर से 13 फरवरी को एक आदेश जारी कर बदायूं समेत प्रदेश के 20 जिलों को चिन्हित करते हुए बताया गया था कि इन सभी की प्रति व्यक्ति आय न्यून्तम स्तर पर है।
बदायूं आर्थिक विजन: 2030 तक का लक्ष्य
| विवरण (Metric) | वर्तमान स्थिति (Current) | लक्ष्य 2030 (Target) | वृद्धि/लक्ष्य (Impact) |
| प्रति व्यक्ति आय | ₹60,864 | ₹1,20,000 | लगभग 100% की वृद्धि (दोगुना) |
| जिला GDP | ₹30,000 करोड़ | ₹60,000 करोड़ | 12% वार्षिक वृद्धि दर |
| राज्य GDP में हिस्सा | 1.18% | 1.50% | राज्य की अर्थव्यवस्था में बड़ी भागीदारी |
| प्राथमिक क्षेत्र (कृषि) | ₹13,000 करोड़ | ₹23,500 करोड़ | उच्च मूल्य वाली फसलों पर जोर |
| द्वितीयक क्षेत्र (उद्योग) | वर्तमान आधार | ₹9,000 करोड़ | लगभग 2.5 गुना की छलांग |
| तृतीयक क्षेत्र (सेवाएं) | वर्तमान आधार | ₹27,500 करोड़ | आय का सबसे बड़ा इंजन (Driver) |
इसमें बताया गया था कि इन सभी जिलों की प्रति व्यक्ति आय बढ़ाने के लिए विस्तृत कार्य योजना तैयार करने को कहा गया था। जिले की प्रति व्यक्ति आय बढ़ाने के लिए सभी विभागों को सम्मलित करते हुए एक कार्ययोजना बनाई गई।
मंगलवार को वीडियो कांफ्रेंशिंग के जरिए प्रदेश स्तरीय कार्यशाला का आयोजन हुआ। इसमं बदायूं से इस बैठक में सीडीओ केशव कुमार ने पक्ष रखा और वर्तमान स्थितियाें और अगले पांच वर्षों की विस्तृत रूपरेखा स्टेट ट्रांसफार्मेशन कमीशन के अधिकारियों के सामने रखी।
प्रति व्यक्ति आय दोगुनी करने को बनाई कार्ययोजना
बदायूं को वर्ष 2030 तक आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से एक व्यापक कार्यकयोजना तैयार की गई है। इस कार्ययोजना का मुख्य उद्देश्य जिले की प्रति व्यक्ति आय, जो वर्तमान में लगभग 60,864 है, उसे दोगुना कर 1,20,000 रुपये तक पहुंचाना है।
यूपी के 20 पिछड़े जिलों की सूची
| श्रेणी (Rank) | जिले का नाम | प्रमुख समस्या/फोकस |
| 16वां स्थान | बदायूं | कनेक्टिविटी, डेयरी और फूड प्रोसेसिंग |
| अन्य जिले | प्रतापगढ़, सिद्धार्थनगर, जौनपुर, बलिया | बुनियादी ढांचा और कनेक्टिविटी |
| तराई क्षेत्र | बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, गोंडा | कृषि विविधीकरण और बाढ़ नियंत्रण |
| पूर्वांचल क्षेत्र | आजमगढ़, मऊ, देवरिया, गाजीपुर | सूक्ष्म एवं लघु उद्योग (MSME) |
| मध्य/अन्य | रायबरेली, हरदोई, भदोही, संतकबीर नगर | कौशल विकास और औद्योगिक क्लस्टर |
इसके साथ ही जिला प्रशासन ने अगले पांच वर्षों में 12 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि दर हासिल करने और जिला सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) को 30 हजार करोड़ से बढ़ाकर 60 हजार करोड़ रुपये तक ले जाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। जिला विजन 2030 के अनुसार बदायूं राज्य की अर्थव्यवस्था में अपनी भागीदारी भी बढ़ाना चाहता है।
वर्तमान में राज्य जीडीपी में जिले की हिस्सेदारी लगभग 1.18 प्रतिशत है, जिसे बढ़ाकर 1.50 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रशासन का मानना है कि यदि क्षेत्रवार रणनीति के साथ योजनाओं को लागू किया जाए तो यह लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
क्षेत्रवार विकास रणनीति
योजना के तहत प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्रों में संतुलित वृद्धि पर जोर दिया गया है। प्राथमिक क्षेत्र (कृषि एवं संबद्ध गतिविधियां) को 13 हजार करोड़ से बढ़ाकर 23,500 करोड़ रुपये तक ले जाने की योजना है। द्वितीयक क्षेत्र (उद्योग एवं विनिर्माण) में लगभग ढाई गुना वृद्धि कर इसे नौ हजार करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य है।
विकास के प्रमुख स्तंभ
| क्षेत्र (Sector) | रणनीति (Strategy) | प्रमुख परियोजना/मांग (Key Projects) |
| कृषि (Agri) | क्लस्टर आधारित खेती | अमरूद, दलहन, तिलहन और मत्स्य पालन |
| इंफ्रास्ट्रक्चर | बेहतर कनेक्टिविटी | बदायूं रिंग रोड और मेजर कैनाल योजना |
| स्वास्थ्य (Health) | बुनियादी ढांचा सुधार | मेडिकल कॉलेज का पूर्ण संचालन |
| रोजगार (Jobs) | कौशल विकास | सेक्टर-आधारित प्रशिक्षण और स्वयं सहायता समूह |
| उद्योग (Industry) | सूक्ष्म एवं लघु उद्योग | ई-मार्केट प्लेटफॉर्म और ब्रांडिंग |
वहीं तृतीयक क्षेत्र (सेवाएं) को सबसे अधिक बढ़ावा दिया जाएगा और इसे 27,500 करोड़ रुपये तक ले जाने की रणनीति बनाई गई है।सेवाएं क्षेत्र को आय वृद्धि का सबसे बड़ा चालक माना गया है। इसके अलावा कृषि विविधीकरण, बागवानी क्लस्टर, डेयरी, मत्स्य पालन, निर्माण गतिविधियां और लघु उद्योगों को भी आय वृद्धि का प्रमुख आधार बनाया है।
कृषि और संबद्ध क्षेत्रों पर विशेष जोर
कृषि क्षेत्र में परंपरागत गेहूं-धान चक्र पर निर्भरता कम कर दलहन, तिलहन, सब्जी एवं अमरूद जैसे उच्च मूल्य वाली फसलों के क्लस्टर विकसित किए जाएंगे। कोल्ड स्टोरेज, पैक हाउस और वेयरहाउसिंग सुविधाओं को मजबूत किया जाएगा, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य मिल सके और फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान में कमी आए।
मत्स्य पालन क्षेत्र में तालाबों के पुनरोद्धार, हैचरी स्थापना और कोल्ड चेन विकसित करने की योजना है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में अतिरिक्त आय के अवसर पैदा होंगे। पशुपालन एवं डेयरी क्षेत्र में चिलिंग सेंटरों का विस्तार और दुग्ध प्रसंस्करण इकाइयों को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे ग्रामीण परिवारों की दैनिक नकद आय में वृद्धि हो सके।
उद्योग, कौशल और रोजगार को मजबूत बनाने की योजना
विनिर्माण और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए औद्योगिक आधार मजबूत करने की योजना है। कौशल विकास को रोजगार सृजन से जोड़ा जाएगा। सेक्टर-आधारित प्रशिक्षण केंद्र स्थापित कर युवाओं को स्थानीय मांग के अनुरूप प्रशिक्षित किया जाएगा। स्वयं सहायता समूहों को बाजार से जोड़ने, ब्रांडिंग और ई-मार्केट प्लेटफॉर्म से जोड़ने की रणनीति भी तैयार की गई है।
स्वास्थ्य एवं सामाजिक अवसंरचना
स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में मानव संसाधन की कमी दूर करने और डायग्नोस्टिक सुविधाएं बढ़ाने की योजना है। ट्रामा केयर सेवाओं को बेहतर बनाने और मेडिकल कालेज के पूर्ण संचालन को भी प्राथमिकता दी गई है।
आर्थिक विकास में कनेक्टिविटी महत्वपूर्ण आधार
जिले के आर्थिक विकास में कनेक्टिविटी को महत्वपूर्ण आधार माना गया है। ग्रामीण सड़कों के सुदृढ़ीकरण, बाजार कनेक्टिविटी और लाजिस्टिक्स सुधार पर जोर दिया गया है। शहरी क्षेत्र में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को देखते हुए बदायूं रिंग रोड परियोजना के लिए राज्य स्तर पर स्वीकृति और वित्तीय सहयोग की अपेक्षा की गई है।
इसके अलावा लखनऊ और नई दिल्ली से बेहतर रेल एवं सड़क संपर्क स्थापित करने की आवश्यकता भी रेखांकित की गई है। जिले में प्रमुख नहर नेटवर्क के अभाव को देखते हुए इसे मेजर कैनाल सिंचाई योजना में शामिल करने की मांग की गई है, ताकि कृषि उत्पादकता बढ़ाई जा सके।
बदायूं के साथ यह जिले भी पिछड़े
20 पिछड़े जिलों में बदायूं के अलावा प्रतापगढ़, सिद्धार्थनगर, जौनपुर, बलिया, बहराइच, आजमगढ़, मऊ, देवरिया, गाजीपुर, महाराजगंज, संतकबीर नगर, गोंडा, बलरामपुर, रायबरेली, कुशीनगर, हरदोई, भदोही, आंबेडकरनगर और श्रावस्ती शामिल हैं।
जिले की प्रतिव्यक्ति आय जो वर्तमान में 60,864 है। इसको बढ़ाने की दिशा में प्रयास चल रहे हैं। इसके लिए उत्तर प्रदेश स्टेट ट्रांसफार्मेशन कमीशन की ओर से कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए गए थे। प्रदेश स्तर पर हुई कार्यशाला में इसको प्रमुखता से रखा गया है।2030 तक की कार्ययोजना बनाई गई है। इसका लक्ष्य प्रति व्यक्ति आय को दोगुना करना और जिले की जीडीपी को बढ़ाना है।
- केशव कुमार, सीडीओ
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