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    लंबी दूरी तय करने वालों की पहली पसंद बना गंगा एक्सप्रेसवे, टोल टैक्स लागू होने के बाद बदला रूट का नजारा

    Updated: Sat, 16 May 2026 05:47 AM (IST)

    गंगा एक्सप्रेसवे पर 15 मई से टोल शुरू होने के बाद वाहनों की संख्या में 50% की गिरावट आई है। बदायूं जिले से गुजरने वाले एक्सप्रेसवे पर पहले प्रतिदिन 30 ...और पढ़ें

    डहरपुर टोल बूथ से गुजरते दो वाहन। जागरण

    डहरपुर टोल बूथ से गुजरते दो वाहन। जागरण

    HighLights

    1. प्रतिदिन निकल रहे तीन हजार वाहनों की संख्या घटकर 1,500 के करीब पहुंची, शुक्रवार रात 12 बजे से टोल कटना शुरू

    जागरण संवाददाता, बदायूं। जिले के 92 किमी क्षेत्र से गुजरे गंगा एक्सप्रेसवे पर 15 मई की रात 12 बजे से टोल लगना शुरू हो गया। कार के लिए 2.55 प्रति किमी और भारी वाहनों से 8.20 रुपये प्रति किमी का शुल्क लिया जा रहा है। लेकिन टोल शुल्क लगना शुरू होने के बाद से जिले से गंगा एक्सप्रेसवे पर जाने वाले वाहनों की संख्या किसी टोल पर आधी तो किसी पर आधी से भी कम हो गई है।

    जैसे डहरपुर के टोल पर पिछले तीन दिनों से प्रतिदिन 50 से 60 वाहन गुजर रहे जो अब 28 और 30 रह गई है। इसी तरह वनकोटा टोल से प्रतिदिन 30 से 40 वाहन गुजर रहे थे जो अब घट कर 15 से 16 रह गई। बरेली-मथुरा हाईवे पर होने के चलते सबसे अधिक वाहन घटपुरी से गुजर रहे थे, इनकी संख्या अब भी 1500 से अधिक है।

    मेरठ से प्रयागराज तक बने 594 किमी के गंगा एक्सप्रेसवे का सबसे बड़ा 92 किमी का हिस्सा जिले से होकर गुजरा है। इस 92 किमी के हिस्से में तीन इंटरचेंज हैं। जिसमें पहला इंटरचेंज वनकोटा, दूसरा घटपुरी और तीसरा डहरपुर पर बना है। इन तीनों ही इंटरचेंट पर टोल बूथ भी बनाए गए हैं।

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    इसके अलावा संभल जिले के बहजोई बार्डर पर बदायूं जिले में ही गांव चंदोई पर एक टोल प्लाजा भी बना है। गंगा एक्सप्रेसवे का संचालन 29 अप्रैल को शुरू हुआ, लेकिन इसके बाद से 15 दिनों के लिए टोल टैक्स पर छूट दे दी गई थी। जिसके चलते अब तक इस एक्सप्रेसवे पर वाहनों की संख्या अधिक थी।

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    जिल से अब तक प्रतिदिन तीन हजार या इससे अधिक वाहन गुजर रहे थे, लेकिन अब जब टोल लगना शुरू हो गया तो इसकी संख्या घटकर आधी रह गई है। सबसे अधिक वाहन घटपुरी इंटरचेंज गुजर रहे हैं। चंदोई टोल पर मौजूद कर्मियों के अनुसार टोल शुल्क शुरू होने के बाद वाहनों में आंशिक कमी ही आई है।

    सीन-1 : वनकोटा पर पसरा सन्नाटा

    जिले के वनकोटा इंटरचेंज पर शुक्रवार दोपहर करीब दो बजे सन्नाटा पसरा हुआ था। यहां मौजूद कर्मियों ने बताया कि एक्सप्रसेवे शुरू होने के बाद से यहां से बहुत अधिक वाहन नहीं गुजर रहे थे। प्रतिदिन वाहनों की संख्या 30-40 ही होती थी, लेकिन जब से टोल लगना शुरू हुआ तब से यह संख्या काफी कम हो गई है।

    अब रात 12 बजे से दोपहर दो बजे तक दस वाहन बमुश्किल निकले होंगे। शाम तक इस संख्या को अनुमानित 20 माना जा रहा था। बताया कि यहां अब तक गुजरने वालों में स्थानीय लोग अधिक थे, जो गंगा एक्सप्रेसवे को देखने आ रहे थे।

    सीन-2 : डहरपुर पर गुजर रहे थे वाहन

    गंगा एक्सप्रेसवे पर किमी संख्या 192 पर बना दातागंज क्षेत्र का डहरपुर इंटरचेंज पर भी वाहनों की लाइन आदि नहीं थी। दोपहर करीब तीन बजे यहां दो वाहन गुजरते नजर आए। करीब एक घंटे में यहां से कुल तीन वाहन गुजरे। टोल पर मौजूद कर्मियों ने बताया कि टोली फ्री होने पर यहां से 50 से 60 वाहन प्रतिदिन गुजरते थे।

    अब रात 12 बजे से टोल कटना शुरू हो गया है तो यह संख्या और कम हो गई है। बताया कि अब स्थानीय लोग तो जा ही नहीं रहे हैं। जो लंबी दूरी पर जा रहे हैं, वही गुजर रहे हैं। बताया कि तीन बजे तक मात्र 30 वाहन गुजरे थे।

    गंगा एक्सप्रेसवे पर घटी स्थानीय लोगों की संख्या

    टोल कटना शुरू होने के बाद स्थानीय लोगों की संख्या कम हो गई है। बताते हैं कि अब जिन लोगों को जिले में ही जाना है, वह लंबी दूरी तय कर ले रहे हैं, लेकिन शुक्रवार को स्थानीय स्तर पर जाने वाले वाहन चालकों की संख्या काफी कम रही।

    वहीं जो लोग गंगा एक्सप्रेसवे देखने आ रहे थे, वह लोग भी अब नहीं आ रहे हैं। शाम के समय भी वाहनों की संख्या में काफी कमी देखी गई। टोल कर्मियों ने बताया कि अब जो वाहन गुजर रहे हैं, उनमें मालवाहक या वह छोटे वाहन जिन्हें लंबी दूरी तय करनी है, वही गुजर रहे हैं।

    बरेली-मथुरा हाईवे से चढ़ रहे अधिक लोग

    जिले के तीनों इंटरचेंज में से सबसे अधिक वाहन घटपुरी इंटरचेंज से चढ़ और उतर रहे थे। हालांकि इसमें अब भी कमी नहीं आई है। लेकिन हां जो अब तक टोल न लगने पर वाहनों की संख्या 2400 से 2800 के करीब थी, वह शुक्रवार को घटकर 1500 के करीब पहुंच गई थी।

    यहां मौजूद टोल कर्मी ने बताया कि बरेली मथुरा हाईवे नजदीक होने के चलते बरेली व आसपास के अन्य कस्बों के लोग इसी रास्ते से होकर गंतव्य को जा रहे थे। बताया कि अब भी अधिकारी, कर्मचारी और नौकरीपेशा वाले लोग बरेली से आते समय इस इंटरचेंज पर चढ़कर लखनऊ, रायबरेली, कानपुर, प्रयागराज आदि जा रहे हैं।

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