सरकारी कुर्सी पर बैठकर प्राइवेट अस्पताल चला रहे डॉक्टर की गई नौकरी, शासन स्तर से हुई कार्रवाई
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कादरचौक के एमओआईसी डॉ. अवधेश राठौर को सरकारी पद पर रहते हुए निजी नर्सिंग होम चलाने के आरोप में बर्खास्त कर दिया गया है।

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।
HighLights
डॉ. अवधेश राठौर सरकारी पद पर रहते निजी अस्पताल चला रहे थे।
नवजात की मौत के बाद जांच में खुला अवैध नर्सिंग होम।
बर्खास्तगी से जिले के अन्य डॉक्टरों में मचा हड़कंप।
जागरण संवाददाता, बदायूं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कादरचौक के एमओआईसी डॉ. अवधेश राठौर की बर्खास्तगी सिर्फ एक कार्रवाई नहीं, बल्कि जिले के ग्रामीण स्वास्थ्य सिस्टम की पोल खोलने वाली घटना है।
सवाल यह भी है कि एक डाक्टर एक ही सीएचसी पर कई साल तक एमओआईसी कैसे जमा रहा और उसके अस्पताल के बगल में ही प्राइवेट नर्सिंग होम कैसे चलता रहा और विभागीय अधिकारियों ने कोई कार्रवाई तक नहीं की। इस लापरवाही के जिम्मेदार अधिकारी भी हैं।
बहन के नाम पर खोला नर्सिंग होम
डॉ. अवधेश राठौर कई साल से कादरचौक सीएचसी में ही एमओआईसी के पद पर जमे थे। इलाके में जान-पहचान का फायदा उठाकर उन्होंने सीएचसी से चंद कदम की दूरी पर ही अपनी बहन के नाम पर ‘राधिका नर्सिंग होम’ खोल लिया था।
खेल एकदम साफ था। गांव से प्रसव के लिए गरीब महिलाएं सीएचसी आती थीं और वहां तैनात एएनएम शशिलता व दाई बबीता उनसे कहती थीं कि यहां डॉक्टर साहब नहीं हैं, बगल वाले प्राइवेट में चलो, वहीं देख लेंगे और फिर शुरू होता था वसूली का खेल।
नवजात की मौत से खुली कलई
छोटेलाल अपनी पत्नी कृष्णा को प्रसव पीड़ा पर सीएचसी लेकर आए थे। आरोप था कि स्टाफ ने उन्हें डरा-धमकाकर राधिका नर्सिंग होम भेज दिया था। वहां 15 हजार रुपये जमा कराए गए। प्रसव के दौरान न कोई प्रशिक्षित डाक्टर था, न सुविधा।
एक महिला प्रसूता के सीने पर बैठ गई और पेट दबाने लगी, जिससे नवजात की गर्भ में ही मौत हो गई। स्वजन ने विरोध किया तो उन्हें धमकाकर चुप करा दिया गया। मामला तूल पकड़ा तो तत्कालीन एसडीएम सदर मोहित कुमार ने जांच की।
जांच में नर्सिंग होम बिना लाइसेंस, बिना मानक के चलता मिला। तब प्रशासन ने उसे सील कर दिया था। अब शासन स्तर से फाइनल कार्रवाई हुई है।
डॉ. अवधेश राठौर की सरकारी नौकरी खत्म कर दी गई है। स्वास्थ्य विभाग में इस कार्रवाई से हड़कंप मचा है, क्योंकि जिले में कई और डाक्टर भी इसी तरह सरकारी कुर्सी पर बैठकर प्राइवेट प्रैक्टिस कर रहे हैं।
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