कैंसर और डायलिसिस से जंग लड़ रहे परिवार; 'घर' लौटने के लिए तड़प रहे 300 शिक्षक, क्या मिलेगी मंजूरी?
बदायूं में 300 शिक्षकों ने गंभीर बीमारियों से जूझ रहे परिवार के सदस्यों की देखभाल के लिए अंतरजनपदीय तबादले हेतु आवेदन किया है। बीएसए नवीन कुमार ने बता ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक चित्र
HighLights
कड़ी विभागीय स्क्रूटनी और पुख्ता मेडिकल सर्टिफिकेट पर टिकी हैं 300 परिवारों की उम्मीद
जागरण संवाददाता, बदायूं। जिले में शनिवार को अंतर्जनपदीय तबादलों के आवेदन की प्रक्रिया परी हो गई, जिसने प्रशासनिक आंकड़ों के पीछे छिपे मानवीय दर्द को उजागर कर दिया है। जिले के कुल 300 शिक्षकों ने गृह जनपद लौटने के लिए आवेदन किया है। ये महज कागजी दस्तावेज नहीं, बल्कि अपनों की जिंदगी बचाने की एक मार्मिक गुहार हैं।
इसका सीधा अर्थ यह है कि जिले के 300 शिक्षकों के परिवार का कोई न कोई सदस्य कैंसर, डायलिसिस या गंभीर विकलांगता जैसी जानलेवा स्थितियों से जूझ रहा है। शिक्षकों के ये आवेदन ट्रांसफर की सामान्य प्रक्रिया से कहीं ऊपर हैं। ये ड्यूटी और पारिवारिक दायित्वों के बीच फंसे अध्यापकों की एक बेबस दास्तान बयां करते हैं।
एक तरफ जहां इन शिक्षकों पर बच्चों का भविष्य संवारने की जिम्मेदारी है, वहीं दूसरी तरफ दूरदराज के जिलों में बैठे उनके अपने जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे हैं। कोई शिक्षक अपने बूढ़े पिता के कैंसर के इलाज के लिए दौड़ रहा है, तो कोई अपनी जीवनसंगिनी की नियमित डायलिसिस के लिए व्याकुल है।
उनके लिए यह तबादला सिर्फ एक नया कार्यस्थल नहीं, बल्कि अपने बीमार परिजनों को संबल देने का आखिरी जरिया है। इस संवेदनशील मामले पर बीएसए नवीन कुमार ने बताया कि शनिवार को आवेदन की अंतिम तिथि समाप्त होने तक कुल 300 आवेदन प्राप्त हुए हैं।
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उन्होंने स्पष्ट किया कि विभाग अब इन सभी आवेदनों की गहन समीक्षा करेगा। विभाग के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती इन आवेदनों की सत्यता की जांच करना है।
बीएसए के मुताबिक, केवल उन्हीं आवेदनों को आगे महानिदेशालय भेजा जाएगा जो पूरी तरह सही और वैध होंगे। जिन शिक्षकों ने गंभीर बीमारी से संबंधित पुख्ता चिकित्सा प्रमाणपत्र या आवश्यक कानूनी कागजात संलग्न नहीं किए होंगे, उनके आवेदनों को बिना किसी देरी के निरस्त कर दिया जाएगा।
अब देखना यह होगा कि स्क्रूटनी के इस कड़े इम्तिहान को पार कर कितने मजबूर शिक्षकों को अपने बीमार परिजनों की सेवा करने का हक मिल पाता है। विभागीय जांच की इस सुई पर अब 300 परिवारों की उम्मीदें और सांसें टिकी हुई हैं।
कर्तव्य और मजबूरी के बीच पिसते शिक्षक
दूरदराज के जिलों में तैनात शिक्षक इस समय दोहरे मानसिक दबाव से गुजर रहे हैं। एक तरफ उन पर स्कूली बच्चों का भविष्य संवारने की महती जिम्मेदारी है, तो दूसरी तरफ गृह जनपद में जीवन-मृत्यु से जूझ रहे उनके बीमार स्वजन।
ड्यूटी और पारिवारिक दायित्वों के बीच फंसे इन शिक्षकों के लिए यह तबादला महज एक ट्रांसफर नहीं, बल्कि अपनों की जिंदगी बचाने का आखिरी सहारा है।
कड़े इम्तिहान से गुजरेगी अपनों की उम्मीद
शिक्षकों की इस मार्मिक गुहार पर बीएसए नवीन कुमार ने रुख साफ कर दिया है। विभाग को मिले सभी 300 आवेदनों की अब कड़ी स्क्रूटनी की जाएगी।
केवल पुख्ता मेडिकल सर्टिफिकेट और वैध कानूनी दस्तावेजों वाले आवेदनों को ही महानिदेशालय भेजा जाएगा। अधूरी जानकारी या बिना ठोस प्रमाण वाले आवेदनों को तुरंत निरस्त कर दिया जाएगा, जिससे शिक्षकों की धड़कनें बढ़ी हुई हैं।
अंतर्जनपदीय तबादलों के लिए कुल 300 आवेदन मिले हैं। विभाग अब इन सभी की गहन समीक्षा करेगा। केवल पुख्ता चिकित्सा प्रमाणपत्र और वैध दस्तावेजों वाले आवेदनों को ही आगे महानिदेशालय भेजा जाएगा। बिना ठोस प्रमाण वाले आवेदनों को तुरंत निरस्त कर दिया जाएगा।
- नवीन कुमार, बीएसए
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