बदायूं मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अरुण हटाए गए, चूहों द्वारा मरीज के अंग कुतरने से लेकर वित्तीय गड़बड़ी तक गिरी गाज
बदायूं मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अरुण कुमार को पद से हटा दिया गया है। यह कार्रवाई उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक के निरीक्षण में मिली गड़बड़ियों, वित्ती ...और पढ़ें

डॉ. अरुण कुमार और राजकीय मेडिकल कालेज बदायूं
HighLights
डिप्टी सीएम बृजेश पाठक को निरीक्षण में मिली थी गड़बड़ी, ले गए थे फाइलें
फर्नीचर खरीद, बाहर से दवाएं खरीद प्रकरण में भी लगे आरोप, शासन तक पहुंचे
जागरण संवाददाता, बदायूं। अनियमितताओं एवं विवादों में घिरे डॉ. अरुण कुमार को राजकीय मेडिकल कालेज प्राचार्य पद से हटा दिया गया। तीन महीने पहले उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक को भी निरीक्षण के दौरान मेडिकल कालेज में गड़बड़ियां मिली थीं। वह अपने साथ कई फाइलें ले गए थे, जिसके बाद अंदरखाने जांच चल रही थी। बुधवार को शासन ने डॉ. अरुण कुमार को पद से हटा दिया। उनके स्थान पर डॉ. शिवकुमार को नया प्राचार्य बनाया गया है।
राजकीय मेडिकल कालेज में बाहर से दवाएं लिखने एवं वित्तीय गड़बड़ी के मामले कई बार उछले थे। इसको लेकर प्राचार्य डॉ. अरुण कुमार एवं अन्य स्थानीय अधिकारियों में खींचतान चल रही थी। जहां सत्ता पक्ष के जनप्रतिनिधि लगातार शिकायतें कर रहे थे, वहीं विपक्ष मेडिकल कालेज की दुदर्शा को मुद्दा बना रहा था। कुछ समय पहले फर्नीचर खरीद हुई, उसमें भी वित्तीय अनियमितता की बात उछली थी।
उस प्रकरण को दबाने के कई प्रयास हुए, इसके बावजूद शासन तक जानकारी पहुंच गई थी। इसी तरह, एक महिला चिकित्सक का प्रकरण तूल पकड़ा, तब भी प्राचार्य डॉ. अरुण कुमार के नेतृत्व पर सवाल उठे थे। इससे पहले, मेडिकल कालेज में भर्ती मरीज के अंग चूहे ने कुतर दिए थे। पीड़ित पक्ष ने इसकी शिकायत की, मामला शासन तक पहुंचा।
इसके बाद स्टाफ की जवाबदेही तय कर दी गई मगर, यह स्पष्ट नहीं किया गया था कि मरीजों की दुर्दशा का जिम्मेदार कौन था, निगरानी की जिम्मेदारी किसके पास थी। पिछले साल मेडिकल कालेज में अनुशासन का प्रकरण भी उछला था। कालेज के अंदर छात्रों के दो गुटों में दो-तीन बार मारपीट हुई। कुछ छात्रों ने घटनाओं के वीडियो बनाकर इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित किए थे।
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ऐसे कई विवाद मेडिकल कालेज से निकलकर थाने तक पहुंचे थे। उस समय प्रबंधन की ओर से कहा गया कि जूनियर छात्रों एवं नर्सिंग छात्रों के बीच आपसी मनमुटाव था। इससे इतर, छात्रों का कहना था कि कैंपस में अनुशासनहीता है। ऐसे कई मामले शासन तक पहुंच चुके थे। बताया जाता है कि अंदरखाने जांच चल रही थी, जिसमें डॉ. अरुण कुमार की लापरवाही पाई गई।
वित्तीय अनियमिताओं में भी उनकी भूमिका मानी गई। इसी आधार पर बुधवार को उन्हें पद से हटा दिया गया। उनके स्थान पर राजकीय मेडिकल कालेज झांसी से प्राचार्य डॉ. शिवकुमार को बदायूं मेडिकल कालेज का प्राचार्य बना दिया गया।
उत्तर प्रदेश चिकित्सा शिक्षा अनुभाग-1 के विशेष सचिव कृतिका शर्मा और संयुक्त सचिव आनंद कुमार त्रिपाठी की ओर से इस संबंध में पत्र जारी किया है। मेडिकल कालेज के मीडिया प्रभारी डा. लालेंद्र यादव ने बताया शासन स्तर से ट्रांसफर हुआ है।