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    हरियाली अमावस्या पर नान्दीमुख श्राद्ध करना क्यों माना जाता है शुभ? इसके महत्व के बारे में जरूर पढ़ें

    Updated: Tue, 11 Aug 2026 05:45 PM (IST)

    हरियाली अमावस्या पर नान्दीमुख श्राद्ध पूर्वजों की आत्मा की शांति और पितृ दोषों को दूर करने के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। यह श्राद्ध किसी भी शुभ क ...और पढ़ें

    हरियाली अमावस्या पर नान्दीमुख श्राद्ध: महत्व और विधि (Picture Credit: AI Generated)

    हरियाली अमावस्या पर नान्दीमुख श्राद्ध: महत्व और विधि (Picture Credit: AI Generated)

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में किसी भी श्राद्ध का विशेष महत्व होता है। मुख्य रूप से किसी भी अमावस्या तिथि पर पूर्वजों के निमित्त श्राद्ध कर्म किया जाता है जिससे उनकी आत्मा को मुक्ति मिलती है और घर से पितृ दोष दूर होते हैं। ऐसे ही सावन महीने में पड़ने वाली हरियाली अमावस्या को भी बहुत खास माना जाता है।

    इस दिन पूर्वजों का श्राद्ध करने से जीवन में आने वाली समस्याएं दूर होती हैं। वहीं इस दिन के लिए एक विशेष प्रकार का श्राद्ध करने की सलाह दी जाती है, जिसे नान्दीमुख श्राद्ध के नाम से जाना जाता है।

    यह एक ऐसा श्राद्ध है जिसमें हम अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पूजा और श्राद्ध करते हैं। यही नहीं पूर्वजों की शांति के लिए तर्पण भी करते हैं। आइए आपको बताते हैं इस विशेष प्रकार के श्राद्ध का महत्व क्या है और ये हरियाली अमावस्या के दिन क्यों किया जाता है?

    नान्दीमुख श्राद्ध क्यों किया जाता है?

    नान्दीमुख श्राद्ध को किसी भी शुभ काम को करने से पहले करना जरूरी माना जाता है। नंदी का अर्थ है 'आनंद' और मुख का अर्थ है 'मुख या आरंभ'।

    नान्दीमुख श्राद्ध को आमतौर पर मृतकों के श्राद्ध से अलग रूप में देखा जाता है और यह किसी भी काम की शुभता के लिए संपन्न किया जाता है। इसका मुख्य कारण कार्यों की सिद्धि के लिए पूर्वजों का आह्वाहन करना होता है और इस दौरान पितरों से प्रार्थना की जाती है कि आपको आगे आने वाले हर काम में सफलता मिले।

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    हरियाली अमावस्या पर नान्दीमुख श्राद्ध करना क्यों हैं जरूरी?

    हरियाली अमावस्या पर नान्दीमुख श्राद्ध करना विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन पितरों की शांति के लिए पूजा-पाठ किया जाता है और जब आप नान्दीमुख श्राद्ध करते हैं तो पीढ़ियों से चले आ रहे पितृ दोषों को दूर करने में भी मदद मिलती है। यही नहीं इस श्राद्ध से घर में आने वाली किसी भी बाधा से मुक्ति मिलती है।

    इस श्राद्ध को घर के सभी कामों को बाधाओं के बिना पूरा करने का एक माध्यम माना जाता है। हरियाली अमावस्या को पूर्वजों की मुक्ति के लिए सबसे शुभ दिन माना जाता है, इसलिए इस दिन नान्दीमुख श्राद्ध जरूर करना चाहिए।

    कैसे किया जाता है नान्दीमुख श्राद्ध?

    नान्दीमुख श्राद्ध में सबसे पहले मातृका पूजन और वसोर्धारा कर्मकांड किया जाता है। इसके बाद सपिण्ड, पिंड रहित, आमान्न और हेम श्राद्ध किए जाते हैं।

    शिव पुराण की मानें तो नान्दीमुख श्राद्ध में पवित्रीकरण, आचमन, शिखा बंधन, आसन शुद्धि, प्राणायाम, पंचगव्य निर्माण, संकल्प, पिंडदान, ब्राह्मण भोजन, आशीर्वाद आदि कर्म भी किए जाते हैं। इस श्राद्ध को पूर्वजों को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है और इस श्राद्ध में विष्णु जी को याद किया जाता है और श्राद्ध किया जाता है।

    अगर आप हरियाली अमावस्या के दिन नान्दीमुख श्राद्ध करते हैं तो यह पूर्वजों के प्रति सम्मान दिखाने का एक अच्छा तरीका है और आपको सभी दोषों से मुक्त भी करता है।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।