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पूजा-पाठ में सबसे ज्यादा गेंदे के फूलों का इस्तेमाल क्यों होता है, इसके पीछे क्या कारण हैं?

Published: Tue, 08 Sep 2026 09:00 AM (IST)

पूजा-पाठ में गेंदे के फूलों का अधिक उपयोग उनकी सकारात्मकता, शुभता और कई देवी-देवताओं के प्रिय होने के कारण होता है। ये फूल घर में खुशहाली लाते हैं।

पूजा-पाठ में गेंदे के फूलों का विशेष महत्व (Picture Credit: AI Generated)

पूजा-पाठ में गेंदे के फूलों का विशेष महत्व (Picture Credit: AI Generated)

HighLights

  1. सकारात्मकता, शुभता और पूर्णता का प्रतीक हैं गेंदे के फूल।

  2. भगवान विष्णु, गणेश, माता लक्ष्मी के प्रिय हैं ये फूल।

  3. बृहस्पति देव से संबंध, ज्ञान और समृद्धि लाते हैं।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। आपने अक्सर देखा होगा कि किसी भी पूजा के दौरान सबसे ज्यादा गेंदे के फूलों का ही इस्तेमाल किया जाता है। घर के मंदिर की सजावट से लेकर ईश्वर का आशीर्वाद पाने तक के लिए, इन्हीं फूलों को इस्तेमाल में लाया जाता है।

इसके चमकीले नारंगी और पीले फूलों से भगवान के लिए मालाएं बनाई जाती हैं, इन्हें मुख्य द्वार पर बंधनवार की तरह सजाया जाता है। यही नहीं मंदिरों में पूजा की दुकानों में भी सबसे ज्यादा मिलने वाला फूल गेंदे का ही होता है।

आप सभी के मन में कभी न कभी यह सवाल जरूर आया होगा कि आखिर क्यों किसी भी पूजा सा सजावट में सबसे ज्यादा इसी फूल का इस्तेमाल होता है? आइए आपको बताते हैं इस सवाल का सही जवाब क्या है।

पूजा-पाठ में गेंदे के फूलों का महत्व

गेंदे का चमकीला रंग पारंपरिक रूप से जीवन में सकारात्मकता, अपनापन और शुभ शुरुआत से जुड़ा माना जाता है। इसके फूल को हमेशा से ही पूर्णता का प्रतीक माना जाता है, जो जीवन में सौभाग्य लाने और ईश्वरीय आशीर्वाद पाने का एक माध्यम माना जाता है।

गेंदे को एक पवित्र फूल भी माना जाता है, क्योंकि यह किसी भी स्थान पर आसानी से मिल जाता है और अन्य फूलों की तुलना में ज्यादा दिनों तक ताजा बना रहता है। यह फूल आसानी में माला में भी पिरोया जा सकता है, जबकि अन्य फूलों की माला से फूल टूटकर गिर जाते हैं।

इस फूल का रंग सूर्य की ऊर्जा का भी प्रतीक माना जाता है। इसके साथ ही, गेंदे के फूल कई देवी-देवताओं का प्रिय फूल है और इसे चढ़ाने से वो प्रसन्न होते हैं और घर में खुशहाली आती है।

पूजा में सबसे ज्यादा गेंदा फूल क्यों चढ़ाते हैं?

गेंदे के फूल का रंग आमतौर पर पीला या नारंगी होता है जिसे भगवान विष्णु का प्रिय रंग माना जाता है। यदि विष्णु जी की पूजा में गेंदे का फूल चढ़ाया जाता है, तो इससे उनका आशीर्वाद मिलता है।

इसे गणपति का प्रिय रंग भी माना जाता है, यदि आप भगवान गणेश की पूजा में गेंदे का फूल चढ़ाते हैं, तो उनकी कृपा दृष्टि बनी रहती है। यही नहीं माता पार्वती और लक्ष्मी जी को भी यह फूल अत्यंत प्रिय है, इसलिए देवियों के पूजन में भी गेंदे का फूल चढ़ाने से उनका आशीर्वाद बना रहता है।

सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक

गेंदे के फूलों के पीले रंग सूरज का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो भारतीय संस्कृति में शक्ति, प्रकाश और पॉजिटिव एनर्जी का प्रतीक हैं।

ऐसा माना जाता है कि ये फूल पूजा में इस्तेमाल करने से घर में खुशहाली आती है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। इसी वजह से गेंदे के फूलों का इस्तेमाल आमतौर पर मंदिरों में और दिवाली, दुर्गा पूजा, गणेश चतुर्थी जैसे त्योहारों के दौरान भी किया जाता है। सभी देवी-देवताओं को ये फूल चढ़ाना भक्ति और पवित्रता का प्रतीक है।

बृहस्पति देव से है संबंध

गेंदे का फूल पीले रंग का होने के कारण इसका सीधा संबंध गुरु बृहस्पति से होता है। इसी वजह से गुरुवार के दिन भगवान विष्णु को पीले गेंदे का फूल चढ़ाने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। गेंदे के फूल का पूजा में प्रयोग करने से ज्ञान और विद्या की प्राप्ति होती है। यही नहीं बसंत पंचमी के दिन गेंदे का फूल माता सरस्वती पर चढ़ाने से ज्ञान और बुद्धि का आशीर्वाद मिलता है।

भारतीय पौराणिक कथाओं के अनुसार गेंदे के फूलों को धन और समृद्धि की देवी माता लक्ष्मी से जोड़ा जाता है और इसे सबसे पवित्र फूलों का स्थान मिला हुआ है, इसी वजह से पूजा के समय इन फूलों का इस्तेमाल सबसे ज्यादा किया जाता है।

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