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किसी भी पूजा में फूल बिना धोए ही क्यों चढ़ाने चाहिए? पुराणों में लिखे इसके कारण नहीं जानते होंगे आप

Published: Tue, 18 Aug 2026 10:00 AM (IST)

हिंदू धर्म में पूजा के दौरान फूल बिना धोए चढ़ाने की परंपरा है, क्योंकि ऐसा करने से उनकी प्राकृतिक सुगंध ...और पढ़ें

पूजा में फूल बिना धोए क्यों चढ़ाए जाते हैं जानें पुराणों के रहस्य (Picture Credit: AI Generated)

पूजा में फूल बिना धोए क्यों चढ़ाए जाते हैं जानें पुराणों के रहस्य (Picture Credit: AI Generated)

HighLights

  1. फूलों को धोने से उनकी प्राकृतिक सुगंध और पवित्रता नष्ट होती है।

  2. ईश्वर को हमेशा ताजे और प्राकृतिक सुगंध वाले फूल ही अर्पित करें।

  3. शास्त्रों के अनुसार, पानी से भीगे फूल बासी के समान माने जाते हैं।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में ईश्वर की पूजा के लिए कई विधान बताए गए हैं और उनका पालन जरूरी माना जाता है। जिस तरह से पूजा के बाद ईश्वर को प्रसाद चढ़ाया जाता है, वैसे ही पूजा के समाय फूल अर्पित किए जाते हैं। यूं कहा जाए कि किसी भी पूजा-पाठ का एक आवश्यक चरण होता है ईश्वर को फूल अर्पित करना।

आमतौर पर पूजा के समय जो प्रसाद स्वरूप फल अर्पित किए जाते हैं उन्हें धोकर ही चढ़ाया जाता है, जबकि फूलों को धोने से मना किया जाता है। फूल ऐसी सामग्री माने जाते हैं जी सिर्फ दिखने में सुंदर नहीं लगते हैं बल्कि अत्यंत पवित्र भी माने जाते हैं।

चाहे शिव जी को चढ़ाया जाने वाला अपराजिता का फूल हो या फिर माता लक्ष्मी को चढ़ाया जाने वाला कमल, सभी फूलों का अपना अलग महत्व होता है। अक्सर मन में यह सवाल आता है कि आखिर क्यों फूलों को बिना धोए हुए ही ईश्वर को चढ़ाना चाहिए? आइए आपको बताते हैं इसके बारे में विस्तार से।

पूजा में फूल चढ़ाने का सही तरीका क्या है?

पूजा में आप जब भी फूल चढ़ा रहे हैं इस बात का ध्यान रखें कि कभी भी बासी फूल न चढ़ाएं। फूल हमेशा स्नान करने के बाद बगीचे से तोड़ें और फिर उसे पूजा में चढ़ाएं।

आप कभी भी पूजा में ऐसे फूल अर्पित न करें जिसमें कीड़े लगे हुए हों या फिर सूखे फूल भी चढ़ाने से बचें। वहीं फूलों को हमेशा बिना धोए ही चढ़ाना चाहिए, जिससे पूजा का पूर्ण फल मिलता है।

ऐसा माना जाता है कि फूलों को पाने से धोने से उनकी शुद्दता दूर हो जाती है और इन फूलों को ईश्वर द्वारा स्वीकार्य भी नहीं माना जाता है। आपको कभी भी ऐसे फूल ईश्वर पर नहीं चढ़ाने चाहिए जो जमीन में गिर गए हों।

पूजा में फूल धोए बिना क्यों चढ़ाने चाहिए?

पूजा में आप जब भी फूल चढ़ाते हैं यह आपकी अटूट भक्ति का प्रतीक माने जाते हैं। फूल वो प्राकृतिक सामग्री होते हैं जिनमें उनकी खुद की महक होती है और प्राकृतिक रंग के साथ खूबसूरती भी होती है। फूलों को उनके प्राकृतिक रूप में ही अर्पित करना उचित माना जाता है।

ऐसे में जब आप इन फूलों को पानी से धो देते हैं तो ये अपनी प्राकृतिक सुगंध खो सकते हैं और इनका स्वरूप में बदल सकता है। चूंकि फूलों की ताजगी को ही उनकी सबसे बड़ी पवित्रता माना जाता है, इसलिए पानी से धोने के बाद से पूरी तरह से पवित्र नहीं रह पाते हैं। इसी वजह से किसी भी पूजा में फूल चढ़ाने से पहले उन्हें धोना नहीं चाहिए।

पुराणों के अनुसार पूजा में फूल चढ़ाने के सही नियम क्या हैं?

पुराणों में ईश्वर को फूल चढ़ाने के कई नियम लिखे हैं। अग्नि पुराण में बताया गया है कि आपको हमेशा भगवान को ताजे फूल चढ़ाने चाहिए जिससे पूजा का पूर्ण फल मिलता है।

भगवान को हमेशा ताजे और प्राकृतिक सुगंध वाले फूल ही चढ़ाने चाहिए। ताजे फूलों में सात्विक ऊर्जा मौजूद होती है जो किसी भी पूजा को पूर्णता के लिए जरूरी है।

वहीं पद्म पुराण में बताया गया है कि पूजा के लिए हमेशा फूल तोड़ते समय हमेशा पहले स्नान करना जरूरी है, जिससे पूजा की पवित्रता बनी रहे।

शास्त्रों में बताया गया है कि पानी से भीगा हुआ फूल भगवान को अर्पित करना बासी फूल चढ़ाने जैसा ही माना जाता है और इससे पूजा का पूर्ण फल भी नहीं मिलता है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।