कौन था शिशुपाल? 100 गलतियां कर भर गया था जिसका पाप का घड़ा, सुदर्शन चक्र से श्रीकृष्ण ने किया था वध
100 गलतियां माफ करने के बाद कैसे भरा था शिशुपाल के पाप का घड़ा? क्या था कृष्ण से उसका रिश्ता ...और पढ़ें

शिशुपाल, भगवान श्रीकृष्ण का फुफेरा भाई था । (Picture Credit- AI Generated)

समय कम है?
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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। महाभारत की कथा में भगवान श्रीकृष्ण और शिशुपाल के बीच की दुश्मनी का प्रसंग बहुत महत्वपूर्ण है। इस प्रसंग को शिशुपालवध पर्व के अध्याय 36 से 45 के बीच बताया गया है। वहीं शिशुपाल के वध की घटना का जिक्र महाभारत के अध्याय 44 और 45 में मिलता है।
हम सभी कई बार इस कथन को सुन चुके हैं कि 'पाप का घड़ा' भरने पर ईश्वर कर्मों का फल देते हैं। यह सिर्फ कहावत नहीं है, बल्कि श्रीकृष्ण ने सच में शिशुपाल के साथ ऐसा ही किया था। उसके 100 अपराधों को माफ कर 101वें अपराध पर श्रीकृष्ण ने सुदर्शन से उसका सिर काट दिया था। चलिए जानते हैं, शिशुपाल कौन था और श्रीकृष्ण से उसका क्या संबंध था।
कौन था शिशुपाल?
शिशुपाल का जन्म चेदि नरेश दमघोष और श्रीकृष्ण की बुआ के पुत्र के रूप में हुआ था। शिशुपाल श्रीकृष्ण का रिश्ते में फुफेरा भाई था, फिर भी वह हमेशा उनका विरोध करता था। जन्म के समय उसकी तीन आंखें और चार हाथ थे। बच्चे का यह स्वरूप देखकर माता-पिता भी भयभीत हो गए। वह इस संतान का त्याग करना चाहते थे, मगर तभी आकाशवाणी हुई कि बच्चे को त्यागना नहीं चाहिए। जब सही समय आएगा, तब उसकी अतिरिक्त आंख और हाथ गायब हो जाएंगे। साथ ही यह भी बताया गया कि जिस व्यक्ति की गोद में जाने के बाद शिशुपाल का यह असामान्य रूप सामान्य हो जाएगा, वही आगे चलकर उसकी मृत्यु का कारण बनेगा।
श्रीकृष्ण ने बुआ को दिया था वचन
एक दिन भगवान श्रीकृष्ण अपनी बुआ के घर पहुंचे। उन्होंने शिशुपाल को गोद में उठाया तो उसकी तीसरी आंख और अतिरिक्त हाथ गायब हो गए। यह देखकर परिवार को आकाशवाणी की बात याद आ गई।
शिशुपाल की मां बहुत डर गईं और उन्होंने श्रीकृष्ण से वचन लिया कि वे शिशुपाल के 100 अपराधों को क्षमा करेंगे। अपनी बुआ को दिए वचन का सम्मान करते हुए श्रीकृष्ण ने शिशुपाल की 100 गलतियां माफ की थीं। लेकिन 101वीं गलती के बाद श्रीकृष्ण ने सुदर्शन चक्र से उसका वध कर दिया।
रुक्मिणी के कारण बढ़ी श्रीकृष्ण से दुश्मनी
शिशुपाल रुक्मिणी से विवाह करना चाहता था। लेकिन रुक्मिणी भगवान श्रीकृष्ण को अपना पति मान चुकी थीं। जब श्रीकृष्ण रुक्मिणी को अपने साथ ले गए, तब शिशुपाल के मन में उनके प्रति और भी अधिक शत्रुता पैदा हो गई। इसके बाद वह लगातार श्रीकृष्ण का विरोध करने लगा और उनके प्रति अपमानजनक बातें कहने लगा।
शिशुपाल का अंत
युधिष्ठिर के राजसूय यज्ञ में देश-विदेश के कई राजा और बड़े-बड़े योद्धा शामिल हुए थे। इस दौरान भगवान श्रीकृष्ण का विशेष सम्मान किया गया। यह बात शिशुपाल को हजम नहीं हुई। वहां आकर भी उसने सभा में श्रीकृष्ण का अपमान किया। तब श्रीकृष्ण ने उसके अपराध की संख्या की गणना की और आखिरी अपशब्द के साथ जब शिशुपाल की 100 गलतियां पूरी हुईं, तब श्रीकृष्ण ने अपने सुदर्शन को शिशुपाल का गला काट देने का आदेश दिया। इस तरह शिशुपाल का अंत हो गया।
अत: महाभारत की यह कथा बताती है कि क्षमा की भी एक सीमा होती है। बार-बार समझाने और अवसर देने के बाद भी जब कोई व्यक्ति अपनी गलतियां दोहराता रहे, तो उसे उसके कर्मों का परिणाम भुगतना ही पड़ता है।
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