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पूजा से लेकर दान-पुण्य तक, हिंदू धर्म में दाहिने हाथ को ही क्यों माना जाता है पवित्र?

Published: Sat, 29 Aug 2026 12:10 PM (IST)

हिंदू धर्म में पूजा और भोजन जैसे शुभ कार्यों के लिए दाहिने हाथ का उपयोग पवित्रता और सम्मान का प्रतीक ...और पढ़ें

हिंदू धर्म में दाहिने हाथ का महत्व (Picture Credits- AI Images)

हिंदू धर्म में दाहिने हाथ का महत्व (Picture Credits- AI Images)

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म ग्रंथों में कई ऐसी प्रथाओं का जिक्र देखने को मिलता है, जो आज के समय में भी अनुकूल है। इनमें जीवन के अलग-अलग पहलुओं जैसे कि भोजन और धार्मिक अनुष्ठानों से संबंधित खास दिशा-निर्देश दिए गए हैं, जिनका पालन आज भी उतनी ही श्रद्धापूर्वक किया जाता है, जितना की पहले किया जाता था।

एक खास दिशा-निर्देश यह है कि पूजा या भोजन करते समय बाएं हाथ का इस्तेमाल करना से बचना चाहिए, जबकि इन कार्यों को करने के लिए दाहिने हाथ को प्राथमिकता दी जाती है क्योंकि इसे ज्यादा शुभ माना गया है।

परंपरागत रूप से बायां हाथ व्यक्तिगत साफ-सफाई के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जबकि दायां हाथ सम्मानजनक व्यवहार से जुड़ा माना जाता है। इसलिए इसे न सिर्फ पूजा-पाठ में बल्कि दान-पुण्य और शुभ कार्यों में किया जाता है। आइए जानते हैं इस प्रथा के पीछे का कारण।

दाहिना हाथ पवित्र कार्यों से क्यों जुड़ा माना जाता है?

पुण्य कार्यों में दाहिने हाथ के इस्तेमाल करने को लेकर कई लोग सवाल उठा सकते हैं। यह प्रथा प्राचीन जीवन और धार्मिक मान्यताओं में गहराई से जुड़ा माना जाता है।

ऐतिहासिक रूप से देखा जाए तो बायां हाथ घर के काम और व्यक्तिगत कार्यों के लिए निर्धारित था, जबकि दायां हाथ भोजन और पूजा पाठ के लिए आरक्षित था, जिससे यह पता चलता था कि अनुष्ठानों के दौरान पवित्रता और ईश्वर के प्रति सम्मान बना रहे।

why is right hand considered auspicious for puja and eating in hinduism (1)

शरीर के दाहिने हिस्से को पवित्र क्यों माना जाता है?

आयुर्वेद में दाहिना भाग पिंगला नाड़ी से जुड़ी मानी जाती है, जो सौर ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करती है जिससे ज्यादा जीवंत और गतिशील माना जाता है। ईश्वर की पूजा करा भक्ति करना का माध्यम है और दाहिना हाथ जो सौर ऊर्जा से जुड़ा माना जाता है और जब हम दाहिने हाथ से भगवान की पूजा करते हैं, तो हम अपनी सबसे अच्छी और शुद्ध ऊर्जा को बड़ी आसानी से भगवान तक पहुंचा पाते हैं।

इसके अलावा, संस्कृत में दाहिनी ओर के लिए प्रयोग होने वाला शब्द 'दक्षिणा' भी शुभता और सम्मान का प्रतीक माना जाता है। यही वजह है कि भगवान को अर्पण और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए दाहिने हाथ का इस्तेमाल किया जाता है।

इसी तरह दाहिने हाथ से आरती करना और दान देना भी शुभ माना जाता है, जो ईश्वर के प्रति श्रद्धा भाव को दर्शाता है। इन्हीं सब वजहों से पूजा और अन्य शुभ कार्यों के दौरान दाहिने हाथ का इस्तेमाल करना आज भी लाभकारी और फलदायी माना जाता है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।