राधा से प्रेम होने के बाद भी क्यों रुक्मिणी से किया था श्री कृष्ण ने विवाह ?
श्रीकृष्ण और राधा का क्या संबंध था, क्या वो केवल श्रीकृष्ण की प्रेमिका थीं? राधा से प्रेम होने के बाद ...और पढ़ें

श्रीकृष्ण और रुक्मिणी का विवाह क्यों हुआ? (Picture Credit- AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म और पुराणों में श्रीकृष्ण का जीवन प्रेम, भक्ति और धर्म से जुड़ी कई कथाओं से भरा हुआ है। हिंदू धर्म में राधा और श्रीकृष्ण का प्रेम भी आध्यात्मिक और अनंत माना गया है। मगर सभी भक्तों के मन में सवाल उठता है कि आखिर राधा के लिए इतना समर्पित होने के बाद भी भगवान को देवी रुक्मिणी से विवाह करना पड़ा। ब्रह्मवैवर्त पुराण के कृष्णजन्मखण्ड में इस विवाह से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें बताई गई हैं। चलिए जानते हैं कि वो कौन से कारण थे, जिनकी वजह से मन में श्री राधा से प्रेम होने के बाद भी श्री कृष्ण ने रुक्मिणी विवाह किया।
राधा और श्रीकृष्ण का प्रेम कैसा था?
राधा और श्रीकृष्ण का संबंध सामान्य सांसारिक प्रेम से अलग माना जाता है। हिंदू धर्म में राधा को श्रीकृष्ण की परम भक्त और उनकी आंतरिक शक्ति का स्वरूप माना गया है। दोनों का प्रेम पवित्र और भक्ति से भरा हुआ था। राधा और कृष्ण का मिलन पति-पत्नी के संबंध तक सीमित नहीं था। उनका प्रेम भक्त और भगवान के बीच के गहरे संबंध को दर्शाता है। इसी कारण राधा-कृष्ण की पूजा आज भी साथ-साथ ही की जाती है।
रुक्मिणी को किसका स्वरूप माना गया है?
ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार रुक्मिणी को देवी लक्ष्मी का स्वरूप माना गया है। श्रीकृष्ण को भगवान विष्णु और नारायण का अवतार माना जाता है। इसलिए रुक्मिणी और श्रीकृष्ण का विवाह भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के दिव्य मिलन के समान माना गया है। इस दृष्टि से उनका विवाह पहले से ही निश्चित था। जहां तक श्री राधा की बात है, तो वो श्री कृष्ण की आत्मा थीं और उनकी शक्ति थीं। कुछ ग्रंथों में तो श्री राधा को भी और रुक्मिणी को एक ही शक्ति के दो स्वरूप भी बताया गया है।
रुक्मिणी ने श्रीकृष्ण को अपना पति क्यों चुना?
रुक्मिणी ने श्रीकृष्ण के गुण, पराक्रम, दया और सुंदरता के बारे में बहुत कुछ सुना था। इन बातों से प्रभावित होकर उन्होंने मन ही मन श्रीकृष्ण को अपना पति मान लिया था। रुक्मिणी श्रीकृष्ण की भक्त थीं। उनका विश्वास था कि श्रीकृष्ण ही उनके लिए सबसे योग्य जीवनसाथी हैं। उन्होंने पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान किया।
रुक्मिणी ने श्रीकृष्ण को पत्र क्यों भेजा?
रुक्मिणी के भाई उनका विवाह शिशुपाल से कराना चाहते थे। रुक्मिणी इस विवाह के लिए तैयार नहीं थीं, क्योंकि वह श्रीकृष्ण को अपना पति मान चुकी थीं। उन्होंने एक गुप्त पत्र के माध्यम से श्रीकृष्ण को अपनी इच्छा बताई। पत्र में उन्होंने श्रीकृष्ण से अनुरोध किया कि वे विवाह से पहले आकर उन्हें अपने साथ ले जाएं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि श्रीकृष्ण उन्हें स्वीकार नहीं करेंगे, तो वह अपना जीवन त्याग देंगी।
श्रीकृष्ण ने रुक्मिणी का हरण क्यों किया?
रुक्मिणी की सच्ची भक्ति और पुकार सुनकर श्रीकृष्ण विदर्भ देश पहुंचे। विवाह के बीच से उन्होंने रुक्मिणी का हरण किया और अपने रथ पर बैठा कर उन्हें द्वारिका ले गए। श्रीकृष्ण ने यह कार्य रुक्मिणी की इच्छा और उनकी रक्षा के लिए था। बाद में श्रीकृष्ण और रुक्मिणी का विधिपूर्वक विवाह हुआ था।
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अत: श्रीकृष्ण और रुक्मिणी का विवाह धर्म की रक्षा और सच्ची भक्ति की विजय का संदेश देता है। रुक्मिणी ने अपने मन से श्रीकृष्ण को चुना और भगवान ने उनकी इच्छा का सम्मान किया।
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